राजू का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा था। कई धंधे करके देख चुका था, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगी। एक दिन उसने अखबार में विज्ञापन देखा – “बीमा एजेंट बनकर कमाइए लाखों रुपए।” राजू के मन में उम्मीद की किरण जगी। उसने सोचा, अब तो सारे धंधे चौपट हो गए हैं, अब नौकरी ही एकमात्र रास्ता है। कम से कम इसमें रिस्क तो नहीं होगा।
अगले दिन राजू बीमा कंपनी के दफ्तर पहुंचा। वहां सुनीता मैडम से मुलाकात हुई। राजू ने घबराते हुए कहा, “जी, मेरा नाम राजू है। मुझे एजेंट की नौकरी करनी है।” सुनीता मैडम ने उसकी ओर देखा और पूछा, “आपको बीमा बेचना आता है? क्या आप बेच पाओगे?”
राजू ने आत्मविश्वास से कहा, “जी हां मैडम, मैं तो उस्ताद हूं। बड़ों-बड़ों को बेच दिया है। बस आप सैलरी की बात कर लीजिए।” सुनीता मैडम ने समझाया, “सैलरी पांच हजार रुपए होगी और जितने भी बीमा बेचोगे, उसका दस प्रतिशत कमीशन मिलेगा।”
राजू खुश हो गया और बोला, “यह नौकरी मेरे लिए एकदम सही है। मैं कब ज्वाइन कर सकता हूं?” सुनीता मैडम ने कहा, “कल सुबह नौ बजे आ जाना।” राजू ने कहा, “ओके मैडम, कल राजू ठीक नौ बजे आपके सामने हाजिर हो जाएगा।”
अगले दिन राजू समय पर पहुंच गया। सुनीता मैडम ने उसे एक फाइल और आईडी कार्ड दिया। फाइल में सभी बीमा पॉलिसी की जानकारी थी। राजू ने उत्साह से कहा, “मैडम, अब देखो कैसे राजू नंबर वन एजेंट बनता है।”
राजू ने अपना काम शुरू किया। सबसे पहले वह रामलाल दूधवाले के पास गया। “कैसे हो रामलाल भाई?” राजू ने पूछा। रामलाल ने जवाब दिया, “मैं ठीक हूं राजू भाई। क्या काम है?” राजू ने कहा, “तुम्हें सुरक्षा देने आया हूं भाई। अपना बीमा कराओ और आराम से मर जाओ।”
रामलाल चौंक गया, “क्या?” राजू ने जल्दी से सुधारा, “मेरा मतलब है, बीमा कराओ और घरवालों का भविष्य सुरक्षित करो। आसान किश्तों में पांच लाख रुपए मिल सकते हैं।” रामलाल ने पूछा, “किश्त कितनी है?” राजू ने बताया, “पांच सौ रुपए महीना। चार साल में पैसे मिल जाएंगे।”
लेकिन रामलाल ने मना कर दिया, “नहीं भाई, मुझे मरने का कोई शौक नहीं। तुम जाओ यहां से।” राजू निराश होकर वहां से चला गया।
फिर राजू सरपंच शर्मा जी के पास गया। उसने वहां भी वही बात दोहराई, लेकिन सरपंच जी भी नाराज हो गए। “निकल जा यहां से! मेरे मरने के पैसे से मेरे घर में दिवाली मनवाएगा?” सरपंच जी ने गुस्से से कहा।
राजू को समझ आ गया कि सीधे तरीके से काम नहीं चलेगा। उसने एक शातिर योजना बनाई। खेत में काम कर रहे किशन के पास जाकर राजू ने कहा, “पैसे तो मैं दे दूंगा अगर तुम मरने का नाटक कर सको।” किशन चौंक गया।
राजू ने समझाया, “मैं तुम्हारा पांच लाख का बीमा करूंगा। तुम मरने का नाटक करना। बीमा के पैसे घरवालों को मिल जाएंगे। फिर वापस आकर काम शुरू कर देना। पैसे मिलने के बाद पंद्रह प्रतिशत मुझे देना होगा।” किशन मान गया।
इसी तरह राजू ने मोहन को उसके घर का बीमा कराने के लिए कहा। उसने योजना बताई कि घर को बाहर से पेंट करवाओ और फिर तुड़वा दो। बीमा कंपनी से क्लेम करो और पांच लाख मिल जाएंगे। मोहन भी राजी हो गया।
विक्रम मछुआरे को राजू ने सुझाव दिया कि नदी में गिरने का नाटक करो और दूसरे किनारे से निकल आओ। बीमा के पैसे घर वालों को मिल जाएंगे। विक्रम भी तैयार हो गया।
सरपंच शर्मा जी को राजू ने उनकी पुरानी मोटरसाइकिल का बीमा कराने के लिए मनाया। “इसे भंगार में बेच दो और बोल देना कि चोरी हो गई। बीमा कंपनी पैसे दे देगी,” राजू ने कहा। सरपंच जी मान गए।
जल्द ही पूरे गांव में राजू की धूम मच गई। सभी लोग उससे बीमा करवाने लगे। सबको पांच लाख का लालच था। राजू ने सभी के फॉर्म भरे और पांच-पांच सौ रुपए लिए।
राजू सभी फॉर्म लेकर सुनीता मैडम के पास गया। मैडम खुश हो गईं, “तुमने तो कमाल कर दिया! इतने लोगों को बीमा बेच दिया। लगता है जल्दी तुम मैनेजर बन जाओगे।” राजू ने कहा, “अब आप जल्दी से मेरा कमीशन दे दीजिए।” मैडम ने कहा, “कल आकर चेक ले जाना।”
अगले दिन राजू खुशी-खुशी दफ्तर पहुंचा। लेकिन यह क्या? दफ्तर पर ताला लगा था! कंपनी रातोंरात गायब हो गई थी। राजू के होश उड़ गए। उसने सोचा, “अब क्या होगा? गांव वाले तो मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे!”
उधर मोहन ने अपना घर तुड़वा दिया था, किशन मरने का नाटक कर चुका था, विक्रम नदी में कूद चुका था। सभी लोग राजू से अपने पैसे मांगने लगे। जब उन्हें पता चला कि कंपनी भाग गई है, तो सबने राजू को ही दोषी ठहराया।
गांव वाले राजू के घर पहुंचे। राजू ने दरवाजे पर बाहर से ताला लगाकर खुद को अंदर बंद कर लिया। लेकिन गांव वाले समझदार थे। उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया और राजू को पकड़ लिया।
“इस धोखेबाज की वजह से हम सब बर्बाद हो गए!” सभी चिल्लाए। राजू को खूब मार पड़ी। वह रोते हुए भगवान से प्रार्थना कर रहा था, “कब तक ये लोग मुझे मारते रहेंगे और मैं कब तक मार खाता रहूंगा?”
राजू ने अपनी लालच और बेईमानी की कीमत चुकाई। उसे समझ आ गया कि शॉर्टकट और गलत रास्ते से कभी सफलता नहीं मिलती।
“ईमानदारी और मेहनत से कमाया गया धन ही स्थायी सुख देता है। लालच और धोखाधड़ी का अंत हमेशा दुख में होता है। जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य और सच्चाई जरूरी है।”

