कामाईपुर गांव में दो सगी बहनें प्रिया और दीप्ति रहती थीं। कुछ साल पहले माता-पिता के निधन के बाद वे अपने चाचा-चाची के घर रहने लगीं। काले रंग के कारण उन्हें हमेशा ताने सुनने पड़ते थे। एक दिन उन्होंने घर के सामने एक पेड़ लगाया और उसी दिन से उनके जीवन में अद्भुत परिवर्तन शुरू हुए।
“दीदी, यहां पेड़ लगा रही हो? चाचा-चाची देख लेंगे तो गुस्सा होंगे,” दीप्ति ने चिंतित स्वर में कहा।
“यह हमारा घर है। हम अपने घर में पेड़ लगा सकते हैं,” प्रिया ने दृढ़ता से उत्तर दिया।
दोनों बहनें दिन भर काम करती थीं, बदले में उन्हें सिर्फ दो वक्त का खाना मिलता था। उनका आत्मविश्वास इतना कम था कि वे खुद को बदसूरत मानती थीं।
उसी समय, पास के गांव से राज और सुमित नामक दो दोस्त शिकार करने जंगल में गए। रास्ता भटक जाने के कारण वे एक पेड़ पर चढ़कर रात बिताने को मजबूर हुए।
अगली सुबह, प्रिया और दीप्ति लकड़ी लेने उसी जंगल में पहुंचीं। उन्होंने पेड़ पर बैठे राज और सुमित को देखा।
“आप लोग पेड़ पर क्यों बैठे हैं?” प्रिया ने पूछा।
“हम रास्ता भटक गए हैं,” राज ने बताया।
दोनों बहनों ने उन्हें जंगल से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया। इस प्रक्रिया में राज और प्रिया अलग हो गए, जबकि सुमित और दीप्ति दूसरे रास्ते से निकले।
कई दिनों बाद जब सभी गांव लौटे, तो राज प्रिया से मिलने आया। उसने पाया कि चाची ने प्रिया की शादी एक अंधे भिखारी चिराग से तय कर दी है।
“तुम्हारे जैसी काली लड़की से कौन शादी करेगा? चिराग ही तुम्हारे लिए ठीक है,” चाची ने कठोरता से कहा।
प्रिया ने रोते हुए दीप्ति से कहा, “दीदी, मैं ऐसी शादी नहीं करूंगी। हम यहां से भाग चलते हैं।”
उस रात चाचा-चाची ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया। लेकिन दोनों बहनों ने खिड़की तोड़कर भागने में सफलता पाई। वे जंगल की ओर चली गईं।
उधर, राज और सुमित भी उनसे मिलने आए थे। उन्हें पता चला कि दोनों बहनें घर से भाग गई हैं। वे उन्हें ढूंढने निकल पड़े।
जंगल के किनारे उन्हें प्रिया और दीप्ति बैठी मिलीं। दोनों असहाय और डरी हुई थीं।
“क्या हुआ? आप यहां क्यों हैं?” सुमित ने चिंतित होकर पूछा।
प्रिया ने पूरी कहानी सुनाई। राज ने तुरंत कहा, “अगर आप चाहें तो मैं आपसे शादी कर सकता हूं। आप बहुत अच्छी हैं।”
प्रिया की आंखों में आंसू आ गए। “आप मुझ जैसी काली लड़की से शादी करेंगे?”
“रंग से खूबसूरती नहीं आंकी जाती। असली सुंदरता दिल में होती है,” राज ने मुस्कुराते हुए कहा।
सुमित ने भी दीप्ति को प्रपोज किया और उसने खुशी-खुशी हां कर दी।
दोनों जोड़ों ने शादी की तैयारी शुरू की। शादी से पहले वे चाचा-चाची से आशीर्वाद लेने गए। चाची को पैर की चोट लगी थी और वह पछता रही थी।
“मैंने तुम दोनों के साथ बहुत अन्याय किया। मुझे माफ कर दो,” चाची ने रोते हुए कहा।
“हमने आपको माफ कर दिया,” प्रिया ने कहा।
शादी के बाद दोनों बहनें अपने पुराने घर गईं। उन्होंने देखा कि उनका लगाया हुआ पेड़ विशाल हो गया था और उस पर मीठे फल लगे थे।
“यह पेड़ हमारी मेहनत और धैर्य का प्रतीक है,” दीप्ति ने कहा।
राज ने प्रिया का हाथ पकड़ते हुए कहा, “तुमने कभी हार नहीं मानी। तुम्हारी आत्मशक्ति और साहस ही तुम्हारी असली सुंदरता है।”
दोनों बहनों ने समझ लिया कि रंग या रूप से नहीं, बल्कि चरित्र और साहस से व्यक्ति की पहचान होती है। उन्होंने अपने नए जीवन की शुरुआत खुशी और आत्मविश्वास के साथ की।
पेड़ के नीचे बैठकर चारों ने मीठे फल खाए और अपने सुनहरे भविष्य का स्वागत किया।
सच्ची सुंदरता बाहरी रूप-रंग में नहीं, बल्कि चरित्र, साहस और मानवता में होती है। धैर्य और आत्मविश्वास से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

