दूर एक सुंदर जंगल में दो प्यारे दोस्त रहते थे – राजू नाम का एक शरारती खरगोश और मीरा नाम की एक समझदार गिलहरी। दोनों हमेशा साथ खेलते और नए रोमांच की तलाश में रहते थे।
एक दिन, हैलोवीन की शाम को, राजू और मीरा जंगल में घूम रहे थे। आसमान में नारंगी रंग की रोशनी फैली हुई थी और ठंडी हवा चल रही थी। अचानक, मीरा ने एक पुराने, विशाल पेड़ की ओर इशारा किया।
“राजू, उधर देखो! वह पुराना पेड़ कितना डरावना लग रहा है,” मीरा ने कहा। “इसकी शाखाएं बिल्कुल डरावने हाथों जैसी दिख रही हैं।”
राजू ने पेड़ की ओर देखा। सच में, पेड़ की टेढ़ी-मेढ़ी शाखाएं हवा में हिल रही थीं, जैसे कोई उन्हें बुला रहा हो। लेकिन फिर राजू की नजर कुछ और पर पड़ी।
“अरे वाह! मीरा, ध्यान से देखो। उस पेड़ की शाखाओं पर तो रंग-बिरंगी कैंडियां लटक रही हैं!” राजू उत्साह से चिल्लाया।
मीरा ने ध्यान से देखा। सचमुच, पेड़ की हर शाखा पर सुंदर चमकदार कैंडियां लटक रही थीं – लाल, पीली, नीली, हरी और बैंगनी। वे चांदनी में चमक रही थीं।
राजू की आंखें चमक उठीं। “मुझे वे कैंडियां चाहिए! मैं उन्हें ले आता हूं!” वह बिना सोचे-समझे पेड़ की ओर दौड़ा।
“राजू, रुको!” मीरा ने चिंता से कहा। “बस यूं ही कैंडियां मत उठाओ। हमें सावधान रहना चाहिए। वह पेड़ सच में भूतिया लगता है। कुछ गड़बड़ हो सकती है।”
लेकिन राजू ने मीरा की बात नहीं सुनी। वह पेड़ के पास पहुंचा और अपने छोटे हाथ बढ़ाकर एक चमकदार लाल कैंडी पकड़ने की कोशिश करने लगा।
अचानक, एक गहरी और भारी आवाज गूंजी: “कौन है जो मेरी कैंडियों को बिना पूछे छू रहा है?”
राजू इतना डर गया कि वह पीछे गिर गया। मीरा भी डर से कांप गई। दोनों ने देखा कि पेड़ के तने पर दो बड़ी आंखें और एक मुंह बन गया था। पेड़ जीवित था!
“अरे बाप रे! यह पेड़ जीवित है! यह बोल सकता है!” राजू घबराहट में बोला।
पेड़ की आवाज में दुख था। “हर साल हैलोवीन पर बच्चे आते हैं और मेरी कैंडियों को बिना पूछे छीन लेते हैं। कोई भी ‘प्लीज’ या ‘क्या मैं ले सकता हूं’ नहीं कहता। कोई भी मुझे सम्मान नहीं देता। मैं बस अकेला और उदास रहता हूं।”
राजू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने शर्मिंदगी से सिर झुका लिया। “मुझे बहुत खेद है, पेड़ जी। मैं भी वही गलती करने जा रहा था। मुझे नहीं पता था कि ये कैंडियां आपकी हैं। मैंने बिना पूछे उन्हें लेने की कोशिश की। कृपया हमें माफ कर दीजिए।”
मीरा भी आगे आई। “हां, पेड़ जी, हमें सच में बहुत खेद है। हमने सम्मान नहीं दिखाया। अगली बार हम किसी भी चीज को छूने से पहले जरूर पूछेंगे।”
पेड़ की आंखों में चमक आई। उसकी आवाज अब कोमल हो गई। “वाह! कम से कम तुम दोनों ईमानदार हो। तुमने अपनी गलती मानी और माफी मांगी। यह मुझे बहुत खुश करता है। चूंकि तुमने सम्मान दिखाया है, इसलिए मैं खुशी से अपनी कैंडियां तुम्हारे साथ बांटूंगा।”
पेड़ ने अपनी शाखाएं हिलाईं और कुछ चमकदार कैंडियां राजू और मीरा की ओर गिर पड़ीं। दोनों दोस्तों के चेहरे खुशी से चमक उठे।
“याय! धन्यवाद, पेड़ जी! आप बहुत दयालु हैं!” राजू ने खुशी से कहा।
मीरा मुस्कुराई। “देखा राजू, विनम्र होना जादू की तरह काम करता है। अगर तुमने बिना पूछे कैंडियां ले ली होतीं, तो हम मुसीबत में पड़ जाते। लेकिन सम्मान दिखाने से पेड़ जी हमारे दोस्त बन गए।”
पेड़ ने हंसते हुए कहा, “तुम बिल्कुल सही कह रही हो, छोटी गिलहरी। सम्मान और विनम्रता से किसी भी दिल को जीता जा सकता है।”
राजू ने एक कैंडी खाई और बोला, “अब मुझे समझ आया, मीरा। हमें कभी भी किसी की चीज बिना अनुमति के नहीं लेनी चाहिए। सम्मान बहुत-बहुत जरूरी है।”
“हां, राजू,” मीरा ने सहमति जताई। “सम्मान से ही दुनिया मीठी बनती है, बिल्कुल इन कैंडियों की तरह!”
दोनों दोस्तों ने पेड़ जी को धन्यवाद दिया और अपने घर की ओर चल पड़े, अपने हाथों में कैंडियां और दिल में एक महत्वपूर्ण सीख लेकर।
उस दिन से, राजू और मीरा ने हमेशा याद रखा कि कुछ भी लेने से पहले पूछना चाहिए और हर किसी के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए। और पेड़ जी? वह अब अकेला और उदास नहीं था। हर हैलोवीन पर, राजू और मीरा उससे मिलने जाते और विनम्रता से कैंडियां मांगते। पेड़ जी ने कई नए दोस्त बना लिए क्योंकि राजू और मीरा ने दूसरे बच्चों को भी सम्मान का पाठ सिखाया।
हमें हमेशा किसी की भी चीज लेने से पहले अनुमति लेनी चाहिए। सम्मान और विनम्रता से डरावने अजनबी भी दयालु दोस्त बन सकते हैं। अच्छे व्यवहार से सबको खुशी मिलती है।

