एक गांव में केशव नाम का व्यापारी रहता था। उसकी दो बेटियां थीं – राधा और रानी। राधा केशव की पहली पत्नी से थी, जो उसे छोड़कर चली गई थी। बाद में केशव ने कमला से शादी की, जो रानी की मां थी।
कमला राधा से घृणा करती थी। जब केशव व्यापार के लिए बाहर जाते, तब कमला राधा से घर के सारे काम करवाती। एक दिन केशव लौटे और राधा के लिए सोने का हार लाए। यह देख रानी जलने लगी। कमला ने ठान लिया कि राधा की शादी किसी गरीब से करा देगी।
जल्द ही राधा के लिए एक अमीर व्यापारी का रिश्ता आया। लड़का राधा को देखकर बहुत खुश हुआ। लेकिन कमला ने चालाकी से लड़के को समझाया कि राधा किसी और से प्यार करती है। सच सुनकर लड़का रिश्ता छोड़कर चला गया।
केशव के व्यापार पर जाते ही कमला ने राधा की शादी एक गरीब फर्नीचर वाले विक्रम से करा दी। राधा बिना किसी शिकायत के एक टूटी झोपड़ी में रहने लगी। विक्रम को अपनी गरीबी पर शर्म आती थी, पर राधा ने उसे ढांढस बंधाया।
राधा ने विक्रम को सलाह दी कि वह जंगल के फल बेचे। विक्रम ने ऐसा किया और जल्द ही अच्छा पैसा कमाने लगा। फिर राधा ने कहा कि बाजार में दुकान खरीद लें। विक्रम ने राधा की बात मानी और कुछ ही महीनों में उनकी किस्मत बदल गई। उन्होंने शहर में बड़ा घर खरीद लिया।
जब केशव लौटे तो कमला ने डरते हुए सच बता दिया। केशव क्रोधित हो गए और राधा को ढूंढने निकले। पुरानी झोपड़ी खाली थी। एक बूढ़ी औरत ने बताया कि विक्रम अब शहर में बड़े घर में रहता है।
केशव जब राधा के घर पहुंचे तो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। राधा बहुत खुश थी। उसने केशव को बताया कि विक्रम बहुत अच्छा इंसान है और अब वे बहुत खुशहाल हैं। केशव ने कमला को माफ कर दिया। कमला को भी अपनी गलती का एहसास हुआ।
ईर्ष्या और द्वेश का परिणाम हमेशा बुरा नहीं होता। जीवन में जो होता है वह अच्छे के लिए ही होता है। कर्मठता और सकारात्मक सोच से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है।

