एक समय की बात है, घने हरे-भरे जंगल में छोटू नाम का एक प्यारा सा खरगोश रहता था। छोटू बहुत ही चतुर और समझदार था। उसकी सफेद चमकदार फर और लंबे कान उसे जंगल के सभी जानवरों में अलग बनाते थे। वह हमेशा मुसीबतों से बचने के लिए अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करता था।
एक सुनहरी दोपहर को छोटू जंगल में गाजर की तलाश में घूम रहा था। वह खुशी-खुशी इधर-उधर उछल-कूद कर रहा था। तभी अचानक झाड़ियों के पीछे से लाली नाम की एक भूखी लोमड़ी प्रकट हुई। लाली के नुकीले दांत और चमकती आंखें देखकर छोटू समझ गया कि मुसीबत आ गई है। लाली कई दिनों से भूखी थी और उसकी नजर छोटू पर पड़ते ही उसके मुंह में पानी आ गया।
लाली ने डरावनी आवाज में कहा, “आज तो मैं तुम्हें अपने दोपहर के भोजन में खा जाऊंगी। तुम बहुत स्वादिष्ट लग रहे हो।” लाली अपने पंजे चटकाते हुए छोटू की ओर बढ़ने लगी। उसकी लाल आंखें भूख से चमक रही थीं।
लेकिन चालाक छोटू ने हिम्मत नहीं हारी। उसने तुरंत अपने दिमाग का इस्तेमाल किया। वह मुस्कुराया और बोला, “अरे लाली दीदी, रुकिए! आप मुझ जैसे छोटे से खरगोश को क्यों खाना चाहती हैं? मैं तो बस एक निवाला भर हूं। आपकी भूख इससे कैसे मिटेगी?”
लाली रुक गई और उलझन में पड़ गई। उसने पूछा, “तो फिर मुझे क्या करना चाहिए?”
छोटू ने चतुराई से कहा, “उस बड़े पेड़ के पीछे मेरा बड़ा भाई बब्बन रहता है। वह मुझसे दोगुना बड़ा और मोटा है। उसका मांस बहुत ही रसीला और स्वादिष्ट है। अगर आप उसे पकड़ लें, तो आपका पेट अच्छे से भर जाएगा। मैं तो बस एक छोटा सा नाश्ता हूं, लेकिन बब्बन भाई पूरा भोजन बन सकते हैं!”
लाली की आंखें चमक उठीं। उसने सोचा, “वाह! एक बड़ा मोटा खरगोश! यह तो शानदार मौका है।” लालच में आकर लाली ने पूछा, “वह कहां है? जल्दी बताओ!”
छोटू ने उस बड़े पेड़ की ओर इशारा किया और बोला, “बस उस पेड़ के ठीक पीछे। जल्दी जाइए, नहीं तो वह भाग जाएगा!”
लाली अपनी भूख और लालच में इतनी अंधी हो गई कि उसने सोचा भी नहीं कि यह एक चाल हो सकती है। वह तेजी से उस पेड़ की ओर दौड़ी। उसके मुंह में पानी आ रहा था और वह बड़े खरगोश को पकड़ने के सपने देख रही थी।
जैसे ही लाली पेड़ के पीछे गई, छोटू ने मौका देखा और तेजी से विपरीत दिशा में कूदते हुए भाग गया। वह सुरक्षित अपनी बिल में पहुंच गया। दूसरी ओर, लाली पेड़ के पीछे इधर-उधर ढूंढती रही, लेकिन उसे कोई बड़ा खरगोश नहीं मिला।
जब लाली को एहसास हुआ कि वह छोटू की चालाकी का शिकार हो गई है, तो वह बहुत गुस्सा हुई। लेकिन तब तक छोटू बहुत दूर जा चुका था। लाली को खाली हाथ वापस जाना पड़ा।
छोटू ने अपनी बुद्धिमानी से न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि बिना किसी को नुकसान पहुंचाए अपनी समस्या का समाधान भी निकाल लिया।
बुद्धिमानी और समझदारी से किसी भी मुश्किल परिस्थिति से बचा जा सकता है। ताकत से ज्यादा दिमाग काम आता है।

