शादी के बाद अनन्या राजस्थान की पुरानी हवेली पहुंची। सावित्री देवी बोलीं, “यह काली मंदिर का धागा है, हल्दी के बाद पहनना। हल्दी की महक दुल्हन को कमजोर करती है।” अनन्या मुस्कुराई।
पांच दिन बाद शादी हुई। राहुल ने कहा, “आठ घंटे का सफर है, पहले पुश्तैनी हवेली चलेंगे।” रास्ते में एक सुनसान हवेली दिखी। अनन्या बोली, “रुको, फोटो चाहिए!” राहुल ने मना किया पर जिद पर फोटो खींच दी।
जैसे अनन्या हवेली में गई, चमगादड़ उड़े। झूला अपने आप हिलने लगा। राहुल घबराया, “चलो जल्दी!”
हवेली पर गृह प्रवेश हुआ। सावित्री ने कलश रखा। अनन्या ने बाएं पैर से उल्टा गिराया। चावल बाहर बिखरे। सावित्री क्रोधित हुईं, “कलश दाएं पैर से अंदर गिराते हैं!” अनन्या मुस्कुराकर कमरे गई। मुस्कान रहस्यमय थी।
अगले दिन सावित्री ने अनन्या को किसी से बात करते सुना। दरवाजा खोला तो खाली। बाथरूम से अनन्या निकली। शक हुआ।
दिनों बाद अनन्या बदली। अजीब हंसती, आंखें लाल। विक्रम को घूरने लगी। प्रसाद देने पर चीखकर भागी। फिर आई सामान्य, सिर ढके।
विक्रम ने मां को बताया। सावित्री परेशान हुई, “नजर रखनी होगी।”
आधी रात सावित्री की नींद टूटी। अनन्या बाहर जा रही थी। सुबह पूछने पर बोली, “मैं कमरे में थी।” सावित्री हैरान हुई।
एक रात राहुल शादी में गया। सावित्री ने मर्दाना आवाज सुनी। झांका – अनन्या पागलों सी हंस रही थी। कुर्सी हिल रही थी। आवाज भयानक, औरत-मर्द दोनों की। अचानक अनन्या ने देखा। सावित्री भागी।
रात भर दस्तक हुई। होल से झांका तो सफेद चेहरा। फर्श पर खून के निशान बने, गायब हुए। सावित्री कांप रही थी।
सुबह राहुल परेशान लौटा। “अनन्या कहां है? वह मेरे साथ थी, गायब हो गई।” सावित्री चौंकी, “वह रात भर यहां थी!” हैरानी हुई। एक इंसान दो जगह?
सावित्री बोली, “बाबा के पास चलो।” बाबा ने कहा, “बहू के पास समय कम है। कल अमावस्या। वह जिन्न के वश में है।”
राहुल ने फोटो दिखाई। काली परछाई दिखी। “समझे? वह हवेली… चलिए।”
चौसर वाली हवेली में अनन्या झूल रही थी, हंस रही थी। बाबा ने सिंदूर से घेरा बनाया। मंत्र पढ़े। पानी छिड़का। अनन्या चीखी, बेहोश हुई।
राहुल ने उठाया। बाबा ने नक्शा बांधा, धागा पहनाया। “सुरक्षित है। पर कोई महिला यहां न आए।”
बाबा बोले, “हवेली में शक्तिशाली जिन्न है। अनन्या के वश में किया। रूप धरकर घर आता था। भाग्य अच्छा था।”
राहुल अनन्या को घर लाया। ठीक थी पर कुछ याद नहीं। झूला फिर हिला। जिन्न वहीं था।
यह घटना चेतावनी है। हवेली अभी खड़ी है। झूला हिलता रहता है। रात को हंसी सुनाई देती है। कोई पास नहीं जाता।
बाबा ने समझाया, “जिन्न शक्तिशाली होते हैं। युवा महिलाओं को निशाना बनाते हैं। वश में करना आसान है।” अनन्या भाग्यशाली थी।
सावित्री सतर्क रहती हैं। धागा कभी नहीं उतरता। राहुल साथ रहता है। शांति है पर वह रात याद कर सब कांपते हैं।
गांव में नियम बना – कोई दुल्हन चौसर हवेली पास नहीं जाएगी। हर शादी में बाबा का धागा पहनाया जाता है। सुरक्षा कवच है।
अनन्या सपने देखती है। हवेली के, झूले के। राहुल जगाता है। “सिर्फ सपना है।” पर दोनों जानते हैं यादें नहीं जातीं।
आज भी उस रास्ते से तेज गुजरते हैं। चौसर हवेली का नाम सुनकर डर लगता है। रात को रोशनी नहीं। अंधेरा गहरा है।
बाबा कहते हैं, “जिन्न इंतजार कर रहा है। किसी और का।” सावधानी जरूरी है। भूतिया जगहों से दूर रहें।
अनन्या की कहानी सबक है। जिज्ञासा खतरनाक है। अनजान जगहों में न जाएं। सुनसान हवेलियों में कुछ भी हो सकता है।
राहुल-अनन्या खुश हैं पर वह दिन नहीं भूलते। जब खतरा था। जब जिन्न ने कब्जा किया। बाबा ने बचाया।
बुजुर्ग कहते हैं, “पुरानी हवेलियों में आत्माएं रहती हैं। कुछ शांत, कुछ खतरनाक। चौसर हवेली में जिन्न है, बहुत शक्तिशाली।”
अनन्या मंदिर जाती है। प्रार्थना करती है। धागा पहने रहती है। राहुल सुरक्षित महसूस करता है।
पर रात को हवा चलती है तो झूला हिलता है। जिन्न वहां है। इंतजार में। अगले शिकार का।
राजस्थान के उस गांव में आज भी यह कहानी सुनाई जाती है। माता-पिता अपने बच्चों को चेतावनी देते हैं। “चौसर हवेली से दूर रहो। वहां जिन्न है।”
नई दुल्हनों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। शादी के बाद महीने भर धागा पहनना जरूरी है। कोई सुनसान जगह में अकेले नहीं जाती।
अनन्या के साथ जो हुआ वह भयानक था। दो जगह दिखना, अजीब हंसी, लाल आंखें – सब जिन्न के संकेत थे। अगर बाबा समय पर न पहुंचते तो अनन्या हमेशा के लिए खो जाती।
सावित्री अक्सर सोचती हैं उस रात के बारे में। दरवाजे पर दस्तक, खून के निशान, सफेद चेहरा – सब याद आता है। वह रात सबसे डरावनी थी।
राहुल भी उस फोटो को देखकर सिहर जाता है। पीछे काली परछाई साफ दिखती है। उसने पहले ध्यान नहीं दिया था। बाबा की नजर तेज थी।
चौसर हवेली कभी बसती थी। एक धनी परिवार रहता था। फिर अचानक सब भाग गए। कहते हैं वहां कुछ अनहोनी हुई थी। तब से हवेली खाली है।
स्थानीय लोग कहते हैं जिन्न सदियों से वहां है। कई लड़कियां लापता हुईं। कुछ पागल हो गईं। अनन्या बची तो बाबा की कृपा से।
अब गांव में नियम सख्त हैं। कोई उस हवेली के पास नहीं जाता। रात को तो बिल्कुल नहीं। गांव वाले मिलकर रखवाली करते हैं।
बाबा हर अमावस्या पर पूजा करते हैं। जिन्न को शांत रखने के लिए। पर जिन्न ताकतवर है। कब क्या कर दे, कोई नहीं जानता।
अनन्या आज स्वस्थ है। राहुल का प्यार, परिवार की देखभाल ने उसे संभाला। पर मन में डर बैठा है। वह अनुभव भुलाया नहीं जा सकता।
सावित्री अब हर नई बहू को चेतावनी देती हैं। “सुनसान जगहों से बचना। धागा हमेशा पहनना। बाबा की बात मानना।” यह परंपरा अब जरूरी है।
गांव की हर महिला सावधान रहती है। खासकर नवविवाहिता। जिन्न युवा औरतों को पसंद करता है। इसलिए सुरक्षा पहली प्राथमिकता है।
चौसर हवेली का झूला आज भी हिलता है। हवा में, या जिन्न की शक्ति से – कौन जाने। पर वह हिलता है, लगातार।
रात के सन्नाटे में कभी-कभी हंसी सुनाई देती है। एक औरत की, फिर एक मर्द की। एक साथ। भयानक। सब जानते हैं यह जिन्न है।
अनन्या की कहानी याद दिलाती है – अलौकिक शक्तियां हैं। उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। सावधानी जरूरी है।
आज भी जब कोई गांव आता है तो पहला सवाल – “चौसर हवेली कहां है?” फिर कहते हैं, “वहां मत जाना। खतरनाक है।”
बाबा अब बूढ़े हो रहे हैं। पर उनकी शक्ति कम नहीं हुई। वह अभी भी रक्षा करते हैं। गांव को, महिलाओं को, सबको।
अनन्या उनकी आभारी है। हर महीने बाबा के चरण छूने जाती है। आशीर्वाद लेती है। राहुल भी साथ जाता है।
यह कहानी खत्म होती है पर सबक नहीं। सावधान रहें। अज्ञात का सम्मान करें। और सबसे जरूरी – जिज्ञासा में अपनी जान न डालें।
चौसर हवेली आज भी खड़ी है। अंधेरे में। सुनसान में। और जिन्न इंतजार कर रहा है। अगले शिकार का।

