अर्जुन दिल्ली से उत्तराखंड के अपने गांव लौट रहा था। उसका दोस्त विक्रम भी साथ था, जो पहाड़ी खूबसूरती देखने आया था।
“विक्रम, ध्यान रखना यार। यहां शाम सात बजे के बाद बाहर मत निकलना।” अर्जुन ने गंभीरता से कहा।
विक्रम हंसा, “अरे यार, तुम भी डरा रहे हो। मसूरी, शिमला में तो रात को भी घूमते हैं लोग। क्या फर्क है यहां?”
“बहुत फर्क है दोस्त। यह पर्यटक स्थल नहीं, असली पहाड़ी गांव है। अंधेरे के बाद यहां अजीब चीजें होती हैं।”
शाम साढ़े छह बजे वे गांव पहुंचे। अर्जुन की मां दरवाजे पर आरती की थाली लिए खड़ी थीं।
“मां, यह क्या? शहर से आया हूं, आरती की क्या जरूरत?” अर्जुन ने हैरानी से पूछा।
“चुप रह। सात बजने वाले हैं। कोई भी शक्ति पीछे आ सकती है। अग्नि उसे दूर करता है,” मां ने समझाया।
विक्रम बोला, “आंटी, यह तो अंधविश्वास है। हम शहर में रात बारह बजे भी घूमते हैं।”
“बेटा, बड़ों की बात मानो। यहां के नियम अलग हैं। जल्दी अंदर आओ।”
रात को खाना खाकर सब सो गए। अर्जुन का छोटा भाई आदित्य विक्रम के साथ वाले कमरे में था।
“आदित्य, यह सात बजे वाली बात कितनी सच है?” विक्रम ने पूछा।
“बिल्कुल सच भैया। यहां भूतों की बारात निकलती है। जिसे देख लें, उसे साथ ले जाते हैं। कई लोग गायब हो चुके हैं।”
“भूतों की बारात? हद है यार। खैर, मुझे नींद आ रही है।” विक्रम ने बात टाल दी।
आधी रात को विक्रम वाशरूम के लिए बाहर गया। तभी उसे तेज पानी बहने की आवाज सुनाई दी।
“यह आवाज कहां से आ रही है? यहां तो कोई नदी नहीं है।” वह सोचने लगा।
“अरे, यह लोग डरा रहे थे कि सात बजे के बाद बाहर मत निकलो। देखो, मैं तो बाहर खड़ा हूं। कुछ नहीं हुआ। इसका वीडियो बनाता हूं।”
उसने रिकॉर्डिंग शुरू की और आगे बढ़ गया। तभी उसे अजीब फुसफुसाहट सुनाई दी। कान फटने जैसी आवाज थी।
“यह क्या है?” उसने इधर-उधर देखा, पर कुछ नहीं था।
आगे बढ़ने पर उसे एक कुत्ता दिखा। वह जानवरों से प्यार करता था, इसलिए पास गया। लेकिन कुत्ता अचानक गायब हो गया।
“क्या! यह कैसे संभव है?” विक्रम के पसीने छूट गए।
तभी पीछे से भौंकने की आवाज आई। वही कुत्ता दूर खड़ा था और फिर गायब हो गया।
“भगवान बचाओ!” डरकर वह घर की ओर भागा।
तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वह सहम गया।
एक बुजुर्ग सामने आया। “तुम्हें पता नहीं? सात बजे के बाद बाहर निकलना मना है। भूतों की बारात आने वाली है।”
“आप भी तो यहां घूम रहे हैं। डर नहीं लगता?” विक्रम ने पूछा।
“लगता था। पर एक रात सब बदल गया,” बुजुर्ग भयानक तरीके से मुस्कुराया।
अचानक उसका चेहरा मुर्दे जैसा हो गया। मांस पिघलने लगा, आंखें सफेद हो गईं। वह हड्डियां मरोड़ने लगा।
विक्रम चीखा और भागा। पर वह आदमी तेजी से उसके आगे दौड़ रहा था। डर से विक्रम झाड़ियों में गिर गया।
वह आदमी गायब हो गया। विक्रम कांप रहा था।
“क्या कर दिया मैंने? घर से क्यों निकला?”
तभी भयानक हंसी सुनाई दी। वही आदमी बगल में बैठा था।
“अब तुम नहीं बचोगे। खुद मौत को बुलाया है।” कहकर वह फिर गायब हो गया।
विक्रम झाड़ियों में छुपा था। तभी बैंड-बाजे की आवाज आई। एक बारात आ रही थी।
“शायद यह लोग मदद करें,” वह सोचने लगा।
फिर आदित्य की बात याद आई – भूतों की बारात। वह झाड़ियों में दुबक गया।
बारात नजदीक आई। ढोल-नगाड़े की आवाज कानों में गूंजने लगी। उसके कानों से खून बहने लगा।
उसने देखा – बारातियों के चेहरे का मांस फटा हुआ था, आंखें बाहर निकली थीं, पैर उल्टे मुड़े थे। सब शैतानी हंसी हंस रहे थे।
एक का ध्यान विक्रम पर पड़ गया। वह भयानक तरीके से मुस्कुराया।
विक्रम चीखा और बेहोश हो गया।
अगली सुबह जब लोगों ने विक्रम को ढूंढा, तो झाड़ियों के पास एक पेड़ पर उसका शव लटका मिला। आंखों की पुतलियां गायब थीं, जीभ बाहर निकली थी, हाथ-पैर उल्टे मुड़े थे।
अर्जुन रोते हुए बोला, “मना किया था मैंने। काश तूने मेरी बात मानी होती।”
विक्रम की जेब में फोन मिला जिसमें रात की रिकॉर्डिंग थी।
अपनी जिद की कीमत विक्रम ने जान देकर चुकाई। आज भी उस गांव में सात बजे के बाद कोई बाहर नहीं निकलता। नियम तोड़ने की कीमत – मौत।

