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Headless Woman Holding 202604231807

जंगल की रात में सिर कटी चुड़ैल ने किया दोस्त का खून || Headless Woman || Horror Night

Posted on April 23, 2026 by Kahani Ki Duniya

एक रात मैं मेरे दो दोस्तों के साथ बाइक
से तेल गांव के जंगलों से गुजर रहा था।

मैं बाइक चला रहा था। सुरेश और अजय मेरे
पीछे बैठे हुए थे। पूर्णिमा की रात थी और

चांद निकल आया था। इसलिए रास्ते पर थोड़ा
बहुत उजाला फैला हुआ था। जंगल का रास्ता

सुनसान था। रास्ते पर सिर्फ हमारी ही बाइक
थी।

अरे भाई बाजू में बाइक लगा। अपुन को बहुत
जोर से सुसु आयला है यार। मुझे भी टंकी

खाली करनी थी इसलिए मैंने बाइक रास्ते के
किनारे लगाई। मैं और सुरेश रास्ते के

किनारे चले गए और अजय दूसरे किनारे टॉयलेट
करने के लिए चला गया। जब मैंने और सुरेश

ने अपना काम कर लिया तो हम बाइक की तरफ
गए। लेकिन हमने देखा कि अजय वहां पर नहीं

है। हमने चारों ओर देखा लेकिन हमें अजय
कहीं पर भी दिखाई नहीं दिया।

अजय भाई कहां हो तुम?
सुरेश ने अजय को आवाज देते हुए कहा। लेकिन

अजय ने कोई भी जवाब नहीं दिया। मुझे लगा
कि वह वहीं कहीं छुपा हुआ है और हमारे साथ

मजाक कर रहा है। इसलिए मैंने कहा
देख भाई अगर तू मेरे पांच गिनने से पहले

यहां नहीं आया तो हम यहां से चले जाएंगे।
और मैंने गिनना शुरू कर दिया।

एक
दो

तीन
चार पांच।

तभी हमें जंगल से अजय की चीख सुनाई दी।
भाई बचाओ।

अरे मुझे लगता है कि वो हमें पोपट बना रहा
है। नहीं सुरेश वो सच में किसी मुसीबत में

है क्योंकि उसकी चीख असली लग रही है।
तभी हमने अजय की एक और चीख सुनी।

मुझे छोड़ दो। मुझे छोड़ दो।
वो किसी से उसे छोड़ने की विनती कर रहा

था। हम दोनों उसकी आवाज की तरफ जंगल में
भागे। कुछ मीटर अंदर जाते ही हमें जमीन पर

पड़े पत्तों पर खून दिखाई दिया। वो देखकर
हम दोनों डर गए। अजय सच में किसी मुसीबत

में फंसा हुआ था। वहीं जमीन पर घिसटने के
निशान थे। हमने उन निशानों का पीछा किया।

तभी अजय के चीखने की आवाज आई। हमने उसकी
आवाज की ओर देखा तो हमें दिखाई दिया कि

दूर एक काली साड़ी पहनी हुई औरत अजय का
पैर पकड़ कर घसीटते हुए ले जा रही है।

हमने उस औरत का पीछा किया। लेकिन उसकी गति
बहुत ज्यादा थी। देखते ही देखते वह जंगल

में गायब हो गई। अजय दर्द से चीख रहा था।
हमें आवाज दे रहा था। हम दोनों ने जमीन पर

पड़े घसीटने के निशान का पीछा किया। वो
निशान हमें एक कोठी तक ले गए। जंगल के

बीचोंबीच वो लकड़ी की दो माले की कोठी बनी
हुई थी। वो बिल्कुल पुरानी और उसके ऊपर

पौधे और घास उगाए थे। तभी एक बार फिर से
उस कोठी से अजय के चीखने की आवाज आई और

बाद में एक गहरा सन्नाटा छा गया।
जल्दी चलो। हमें अजय को बचाना होगा। मैंने

सुरेश से कहा लेकिन सुरेश डरा हुआ था। वो
बस उस कोठी को घोरे जा रहा था।

क्या हुआ? अरे जल्दी चलो। नहीं हमें वहां
नहीं जाना चाहिए क्योंकि वो डायन है। क्या

तुमने देखा वो अजय को कैसे घसीटती हुई ले
गई? एक साधारण औरत ऐसा कुछ भी नहीं कर

सकती।
सुरेश घबराते हुए मुझसे बोला। अरे ऐसा कुछ

नहीं है। पहली बात तो यह कि वो औरत है
आदमी हम नहीं जानते क्योंकि हमने उसका

चेहरा देखा ही नहीं है। ऐसा भी तो हो सकता
है कि वो कोई आदमी हो जिसने साड़ी पहनी हो

और वो कोई पागल या साइको किलर हो। इसलिए
इससे पहले कि वो अजय की जान ले। हमें उसे

बचाना होगा। नहीं। मुझे नहीं लगता कि हम
अजय को बचा पाएंगे। हमें यहां से अपनी जान

बचाकर भाग जाना चाहिए। चुप हो जाओ। अरे
यार वो हमारा दोस्त है। हम उसे ऐसे मरने

के लिए नहीं छोड़ सकते। चुपचाप मेरे पीछे
आओ। हम उस व्यक्ति को सबक सिखाएंगे।

मैंने उसे कहा। हम दोनों ने वहां पर पड़ी
लकड़ियों की लाठियां उठाई और कोठी के पास

गए। मैंने जैसे ही दरवाजा अंदर धकेला अंदर
से चमगादड़ों का झुंड उड़ते हुए बाहर

निकला और सुरेश चिल्लाने लगा।
देखो मैंने कहा था ना वो डायन होगी। डायन

जहां पर रहती है वहां पर चमगादड़ होते ही
हैं।

और यह तुम्हें किसने बताया? मैंने मूवीज
में देखा है। चुप करो यार और मेरे पीछे

आओ। ऐसा कहकर मैं कोठी के अंदर घुस गया।
मैंने टॉर्च जलाई तो कोठी के अंदर चारों

ओर मकड़ियों के जाले थे। सब तरफ धूल और
मिट्टी थी। लकड़ी की कुर्सियां, टेबल सभी

कीड़ों ने खा कर मिट्टी में बदल दिए थे।
दीवार पर कुछ फोटो फ्रेमस लगी हुई थी।

जिसमें एक आदमी और एक औरत थी। उस पर भी
धूल जमी हुई थी। तभी अजय बहुत ही खौफनाक

आवाज में चीखा और अचानक से उसकी आवाज बंद
हो गई। वह आवाज दूसरे माले से आई थी।

जल्दी से मेरे पीछे आओ।
मैंने सुरेश से कहा लेकिन उसने मेरा हाथ

पकड़ लिया।
नहीं ऊपर मत जाओ वरना वो हमें भी मार

डालेगी।
घबराते हुए मुझसे बोला मैंने अपना हाथ

उसके हाथ से छुड़ा लिया और मैं दूसरे माले
पे जाने वाली सीढ़ियों की तरफ भागा और

मैंने देखा कि सीढ़ियों से खून बह रहा था
और वह दूसरे माले से आ रहा था। मैं घबरा

गया। लेकिन मुझे अजय की जान बचानी थी। खून
देखकर सुरेश मुझे वहां से भाग जाने के लिए

कह रहा था। लेकिन मैं अपने दोस्त को मरने
के लिए नहीं छोड़ सकता था। मैं भागते हुए

दूसरे माले पर गया और सामने का नजारा
देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। डर के मारे

मैं कांपने लगा। सुरेश तो वो भयानक मंजर
देखकर चीख उठा क्योंकि कॉरिडोर में छत से

अजय की लाश लटक रही थी। उसके दोनों पैर एक
काली रस्सी में बंधे हुए थे जो छत से

बांधी गई थी और उसके हाथ जमीन की तरफ लटक
रहे थे। लेकिन वहां से उसका सिर गायब था।

तभी हमें अजय की आवाज सुनाई दी।
भाई मुझे बचाओ।

लेकिन यह कैसे मुमकिन है? अजय तो मर चुका
है। शायद नहीं। क्योंकि इस लाश का सर नहीं

है और इसके शरीर पर कोई कपड़े भी नहीं है।
इसलिए हम नहीं कह सकते कि वो मर चुका है।

अजय की आवाज एक कमरे से आ रही थी। हम लोग
हाथ में लाठियां लेकर उस कमरे में गए।

कमरे में अंधेरा था। हमने मोबाइल की टॉर्च
से कोने में देखा तो कोने में वही औरत

बैठी थी। उस औरत ने सिर पर पल्लू ओढ़ा हुआ
था और उसकी पीठ हमारी तरफ थी। लेकिन वो

औरत अजय की आवाज में रो रही थी। हमें कुछ
भी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा

है।
कौन हो तुम? और अजय कहां है?

मैंने उस औरत से पूछा। तभी कोने में बैठे
उस औरत ने मुड़कर हमारी तरफ देखा और सामने

का मंजर देखकर हमारे रोंगटे खड़े हो गए।
क्योंकि उस औरत का सर नहीं था। उसके हाथ

में अजय का कटा सिर था।
दोस्तों, मैं यहां हूं।

अजय का सिर हमसे बोला। हम जान चुके थे कि
उस सिर कटी औरत ने ही अजय का खून किया है

और बाहर कॉरिडोर में जो लाश लटक रही थी,
वह अजय की ही है। वह औरत चुड़ैल या डायन

थी या रूह या फिर आत्मा। यह तो हम नहीं
जानते थे। लेकिन हम यह जानते थे कि वो

इंसान नहीं है और हमारे खून की प्यासी है।
हम दोनों बहुत ज्यादा डर गए थे। हम आंख

फाड़ कर उसकी ओर देख रहे थे। तभी उस औरत
ने अजय का सिर अपने गले पर लगाया। उसने

अपने गले को कुछ झटके दिए और अजय का सिर
अब उसका हो गया। उसके बाद वो मुस्कुराई और

हाथ हमारी तरफ करते हुए बोली।
“मुझे मेरा सिर ला दो।

मुझे मेरा सिर ला दो। वरना मैं तुम्हारा
सिर ले लूंगी।

यह सुनकर मैं और सुरेश वहां से उस घर से
भागे। मैं जंगल में भाग रहा था। लेकिन कुछ

दूर जाते ही मैं समझ गया कि मैं अकेला भाग
रहा हूं और मेरे पीछे सुरेश कहीं भी नहीं

है। मैं कुछ मीटर पीछे चला गया। मैंने
देखा कि सुरेश उस भूतिया कोठी की तरफ जा

रहा है। मैं भागते हुए उसके पीछे गया।
सुरेश तू कोठी की तरफ क्यों जा रहा है?

भाग यहां से वरना वो तुम्हें भी मार
डालेगी।

लेकिन सुरेश रुका नहीं। वो कोठी के बाहर
तक जा पहुंचा। तभी मेरी नजर दूसरी मंजिल

की खिड़की की तरफ गई। तो खिड़की में वह
सिर कटी औरत थी जिसने अजय का सिर पहन लिया

था और वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी।
मैं जान चुका था कि उस औरत ने सुरेश को

सम्मोहित कर लिया है और इसलिए वह कोठी के
अंदर जा रहा है। वो अपने होश में नहीं था

तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे वहां
से दूर खींच कर ले गया। लेकिन सुरेश ने

मुझे धक्का मारा और मैं पेड़ से जा
टकराया। मेरा सिर जख्मी हो गया और आंख के

सामने सब कुछ धुंधला धुंधला दिखाई देने
लगा। लेकिन मैंने देखा कि सुरेश उस कोठी

के अंदर चला गया है। कुछ देर बाद मेरी
आंखों की रोशनी ठीक हो गई और मैं सुरेश को

आवाज लगाते हुए कोठी के उसी कमरे में चला
गया जिसमें मैंने उस औरत को देखा था।

मैंने देखा कि कमरे में सुरेश अपनी गर्दन
पर एक हाथ से छुरी लगाए हुए खड़ा था और

दूसरे हाथ से उसने अपने सिर के बाल को
पकड़े हुए था।

मेरा सिर ला दो। मुझे मेरा सिर ला दो।
सुरेश अजीब तरीके से बड़बड़ाता गया और

उसने अपने ही हाथ से छुरी से अपना सिर काट
लिया और दाएं हाथ में पकड़ लिया। उसके धड़

से खून की पिचकारियां निकलने लगी और वह
जमीन पर गिर गया। यह देखकर मेरे पैरों तले

जमीन फिसल गई।
क्या हुआ? डर गए।

मेरे पीछे से अजय की आवाज आई। मैंने
मुड़कर देखा तो खिड़की में वही सर कटी औरत

बैठी थी जिसने अजय का सर पहना था। मैं
वहां से भागा और दरवाजे तक पहुंचा। लेकिन

उससे पहले ही वह दरवाजे तक पहुंच गई थी और
दरवाजे के बिल्कुल सामने खड़ी थी। मैं

वहां से बाहर नहीं जा सकता था। क्या चाहिए
तुम्हें? क्या चाहिए?

मेरा सिर मुझे मेरा सिर ढूंढ कर ला दो। और
अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो मैं तुम्हारा

सिर ले लूंगी।
मैं समझ गया कि जरूर इसका किसी ने सिर काट

कर खून कर दिया था। और उसकी आत्मा अब उसका
सिर ढूंढ रही है। अब मेरे सामने उसका सिर

ढूंढने के अलावा कोई और चारा नहीं था।
लेकिन लेकिन मैं आपके बारे में कुछ नहीं

जानता कि आपके साथ क्या हुआ था। आपका सिर
ढूंढने के लिए आपको मुझे सब बताना होगा जो

आपके खून के दिन हुआ था। मैं मेरे पति के
साथ समर वेकेशन पर यहां आई थी। हमने यह

कोठी छुट्टियां गुजारने के लिए ली थी। उस
दिन मेरे पति कोठी के पीछे वाले तालाब पर

मछलियां पकड़ने गए थे। मैं कोठी में अकेली
थी। तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने

दरवाजा खोला तो दरवाजे पर कुछ 19-20 साल
के तीन लड़के खड़े थे। उनके पीठ पर

कैंपिंग बैग्स थी। दरवाजा खोलते ही वो
तीनों मेरी तरफ देखने लगे। उनमें से एक

लड़का मेरे हाथ में पानी की बोतल थमाते
हुए बोला,

“आंटी, हम लोग जंगल में कैंपिंग के लिए आए
हैं। लेकिन हमारा पानी खत्म हो गया है।

क्या हमें पीने के लिए पानी मिल सकता है?
वो लड़का शराब पिया हुआ था। लेकिन

इंसानियत के खातिर मैंने उन्हें पानी देने
का तय किया। और दरवाजा आगे धकेल के किचन

में पानी लेने चली गई। मैंने फ्रिज में से
बोतल निकाली। तभी पीछे से किसी ने मेरा

मुंह बंद कर दिया। मैं चिल्ला नहीं सकी।
तभी मेरे सामने दो लड़के आए। वो तीनों

लड़के मेरे घर में घुस गए थे। उनके इरादे
नेक नहीं थे।

लेकिन तभी मेरे पति फिशिंग करके घर लौटे।
उन लड़कों को मुझे पकड़ा हुआ देख उन्होंने

उनके हाथ से पकड़ी मछली फेंक दी। और उन
लड़कों पर टूट पड़े।

लेकिन उनमें से एक लड़के ने कैंपिंग नाइफ
से उन्हें घोंप दिया। उन्होंने वहीं

तड़पते हुए अपनी जान दे दी। मैंने उस
लड़के के हाथ को दांतों से काटा। ये देख

वो गुस्सा हो गया। और उसने मुझ में चाकू
से घोंप दिया। मैं फर्श पर गिर गई। वो

लड़का शराब के नशे में पागल हो गया था।
उसने मेरा सिर चाकू से काट डाला और मेरा

कटा सिर हाथ में लिया। मैंने खुद का सिर
कटा शरीर देखा और कुछ ही देर में मेरे

आंखों के सामने अंधेरा छा गया।
जब मेरी रूह जागी वो अधूरी नहीं थी। मेरा

शरीर बरगद के पेड़ के नीचे दफनाया गया था।
लेकिन वहां पर मेरा सिर नहीं था। मेरी रूह

अधूरी थी। इसलिए अधूरी रूह पूरी करने के
लिए मुझे मेरा सिर चाहिए। उसके बाद

तुम्हें मेरे शरीर की हड्डियों को सिर के
साथ जलाना पड़ेगा। तभी मुझे मुक्ति मिलेगी

और उसके बाद अपने आप तुम मेरे चंगुल से
छूट जाओगे। यह सुनकर मैं थोड़ा हैरान रह

गया क्योंकि उसकी बताई हुई बातें उसका सिर
ढूंढने में मेरी मदद नहीं कर सकती थी।

उसके बाद क्या हुआ? जब आपकी जान चली गई तब
आखिरी बार आपने क्या सुना?

वो मछली को फ्राई करके खाने की बात कर रहे
थे।

मैं कुछ देर सोचने लगा।
आपने बताया कि आपके पति ने मछली फेंकी और

लड़कों पे टूट पड़े। इसका मतलब कि
उन्होंने केवल एक ही मछली पकड़ी थी।

हां। सिर्फ एक ही मछली थी। वो एक मछली
खाने के लिए उन्हें काफी नहीं होगी। इसलिए

वह जरूर फिशिंग र लेकर मछली पकड़ने तालाब
की ओर गए होंगे। और मुझे लगता है उनमें से

एक लड़का आपका सिर हाथ में पकड़े तालाब की
ओर ले गया होगा और उसी ने आपका सिर तालाब

में फेंक दिया।
मैंने अनुमान लगाया। उस वक्त मेरे दिमाग

में जो कुछ भी आया मैंने उसे वही बताया।
तो जाके मेरा सिर तालाब में ढूंढो।

मेरे पास दूसरा कोई चारा नहीं था। एक नया
इंसान तालाब पे किस रास्ते से जा सकता है?

यह सोचकर मैं कोठी के पीछे वाले तालाब पर
गया क्योंकि वो लड़के भी उस तालाब पर मेरी

तरह ही गए होंगे। मैं किनारे पर खड़ा हुआ।
शायद उस लड़के ने इसी जगह से उसका सिर

पानी में फेंका था।
मैंने किनारे पर एक जगह खड़े होकर बोला।

मैंने आजू-बाजू देखा। वहां पर कुछ खाली
नारियल पड़े थे। मैंने उनमें से एक सिर के

बराबर नारियल उठाया और पानी में फेंका।
उसके बाद मैंने उसके 5 मीटर के रेडियस में

तालाब में डुबकी लगाई। डेढ़ दो घंटे
ढूंढने के बाद तालाब के निचली सतह में

मुझे उसका सिर कीचड़ में फंसा हुआ मिला।
उसका पूरा मांस मछलियों ने खा लिया था।

मैं वह सिर जमीन पर ले आया। उसके बाद
मैंने उस औरत की कब्र खो दी और उसके शरीर

को उस सिर के साथ जला दिया। तभी उसकी
आत्मा आसमान की ओर चली गई। उसके बाद मैं

वहां से भागा और अपनी जिंदगी में उस
खौफनाक जंगल की तरफ कभी नहीं गया।

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