बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में रामू नाम का एक किसान रहता था। रामू एक सीधा-सादा आदमी था जो अपनी मेहनत से अपना गुजारा करता था। उसके पास एक बहुत ही प्यारी और सुंदर बकरी थी जिसका नाम चांदनी था। चांदनी का रंग बर्फ की तरह सफेद था और उसकी आंखें काली मोतियों की तरह चमकती थीं।
हर सुबह जब सूरज की पहली किरण गांव में पहुंचती, चांदनी अपने मालिक रामू के लिए एक बड़ी बाल्टी भरकर मीठा और पौष्टिक दूध देती थी। रामू इस दूध को बाजार में बेचकर अपनी आजीविका चलाता था। चांदनी का दूध इतना स्वादिष्ट और शुद्ध था कि पूरे गांव में इसकी मांग रहती थी। रामू हर दिन खुशी से नाचता और चांदनी को प्यार से सहलाता।
महीनों तक यह सिलसिला चलता रहा। रामू की आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी थी। वह चांदनी को अच्छा चारा खिलाता, उसकी अच्छी देखभाल करता और उसे अपनी संतान की तरह प्यार करता था। चांदनी भी अपने मालिक से बहुत प्रेम करती थी।
लेकिन एक दिन अचानक मौसम बदलने के कारण चांदनी बीमार पड़ गई। उसे तेज बुखार आ गया और वह बहुत कमजोर हो गई। उस दिन चांदनी ने एक बूंद भी दूध नहीं दिया। रामू को लगा कि उसकी आमदनी रुक गई है। गुस्से और निराशा में आकर रामू ने चांदनी को डांटा और कहा, “तू बेकार हो गई है! अब तू मेरे किस काम की है?”
अपनी गलती का एहसास किए बिना, रामू ने गुस्से में आकर चांदनी को अपने घर से भगा दिया। बेचारी चांदनी बहुत उदास और दुखी होकर घर से निकल गई। वह अकेली गांव की संकरी गलियों में इधर-उधर भटकने लगी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे और वह समझ नहीं पा रही थी कि कहां जाए।
भटकते-भटकते चांदनी को रास्ते में एक दयालु गाय मिली। गाय का नाम सुमित्रा था और वह बहुत ही करुणामयी और समझदार थी। सुमित्रा ने चांदनी की हालत देखी तो उसे बहुत दया आई। उसने चांदनी से पूरी कहानी सुनी और समझा कि वह बीमार है।
सुमित्रा चांदनी को अपने घर ले गई। वहां उसने चांदनी की अच्छी देखभाल की और उसे एक जादुई दवा पिलाई जो उसके पास थी। यह दवा प्राचीन जड़ी-बूटियों से बनी थी और इसमें अद्भुत शक्ति थी।
जैसे ही चांदनी ने वह जादुई दवा पी, कुछ ही घंटों में उसका बुखार उतर गया। वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई और पहले से भी ज्यादा तंदुरुस्त हो गई। अब चांदनी रोज दो बाल्टी भरकर मीठा दूध देने लगी।
इधर रामू को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह समझ गया कि उसने अपनी प्यारी चांदनी के साथ कितना बुरा व्यवहार किया था। वह चांदनी को ढूंढने निकला और माफी मांगी। चांदनी ने अपने मालिक को माफ कर दिया और दोनों फिर से खुशी से रहने लगे।
कठिन समय में धैर्य रखना चाहिए और अपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। दया और करुणा की शक्ति अद्भुत होती है।

