एक गर्म गर्मी की रात थी। चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ था और केवल झींगुरों की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। एक छोटे से गांव में राम नाम का एक मेहनती किसान अपने घर की छत पर लेटा हुआ था। दिन भर की मेहनत के बाद वह आराम करना चाहता था।
अचानक उसके कान में एक पतली सी आवाज़ आई – “भिन्न… भिन्न…” यह आवाज़ एक छोटे से मच्छर की थी जो राम के चारों ओर मंडरा रहा था। यह मच्छर बहुत ही भूखा था और कई दिनों से उसे खाना नहीं मिला था।
मच्छर ने राम के पास आकर विनती की, “हे मनुष्य! मैं कई दिनों से भूखा हूं। कृपया मुझे अपना थोड़ा सा खून दे दो। मैं बहुत छोटा हूं और मुझे बस कुछ बूंदें ही चाहिए।”
राम एक दयालु व्यक्ति था। उसने मच्छर की बात सुनी और सोचा कि इस छोटे से जीव की मदद करने में कोई हर्ज नहीं है। उसने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हारी मदद करूंगा। लेकिन एक शर्त है – तुम केवल मेरी एड़ी से खून पी सकते हो। अगर तुमने मेरे शरीर के किसी और हिस्से को काटा, तो मैं तुम्हें मार दूंगा।”
मच्छर खुशी से फूला नहीं समाया। उसने तुरंत हामी भरी और कहा, “हां हां, मैं केवल आपकी एड़ी से ही खून पिऊंगा। आपका बहुत धन्यवाद!”
मच्छर तुरंत राम की एड़ी पर बैठ गया और काटने की कोशिश करने लगा। लेकिन एड़ी की चमड़ी बहुत कठोर और मोटी थी। मच्छर ने बहुत कोशिश की लेकिन उसका मुंह एड़ी की मोटी चमड़ी को भेद नहीं पा रहा था। वह थक गया और परेशान हो गया।
कुछ देर बाद मच्छर की नज़र राम की कोमल टखने पर पड़ी। टखने की चमड़ी बहुत नरम और पतली दिख रही थी। मच्छर के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, “यहां काटना कितना आसान होगा! एड़ी में तो इतनी मेहनत करनी पड़ रही है। और वैसे भी टखना एड़ी के बिल्कुल पास ही है।”
लालच में अंधा होकर मच्छर ने अपना वादा तोड़ दिया। उसने झट से राम की कोमल टखने पर अपनी सूंड गड़ा दी और खून पीने लगा। खून का स्वाद मिलते ही वह और भी लालची हो गया।
राम को तुरंत पता चल गया कि मच्छर ने उसे धोखा दिया है। वह गुस्से में आ गया। उसने अपना हाथ उठाया और ज़ोर से टखने पर मारा – “चपाट!”
मच्छर तुरंत मर गया। उसकी लालच ने उसकी जान ले ली।
लालच हमेशा मुसीबत लाती है। जो मिले उसी में संतुष्ट रहना चाहिए।

