एक विशाल रेगिस्तान के बीचोंबीच एक छोटा सा नखलिस्तान था। इस नखलिस्तान में तरह-तरह के पेड़-पौधे उगे हुए थे। इन सभी पौधों में सबसे खूबसूरत एक गुलाब का पौधा था और सबसे साधारण दिखने वाला एक नागफनी का पौधा था। गुलाब का पौधा अपनी सुंदरता पर बहुत गर्व करता था। उसके लाल रंग के मखमली फूल देखने में इतने आकर्षक थे कि कोई भी उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता था। उसकी पंखुड़ियां मानो रेशम से बनी हुई हों और उसकी खुशबू इतनी मनमोहक थी कि दूर-दूर तक इसकी सुगंध फैलती रहती थी।
दूसरी ओर, नागफनी का पौधा देखने में बिल्कुल भी आकर्षक नहीं था। उसका पूरा शरीर कांटों से भरा हुआ था। उसका रंग हरा-भूरा था और वह काफी मोटा और भद्दा दिखता था। उसमें कोई फूल नहीं खिलते थे और न ही कोई सुगंध आती थी। लेकिन इन सब कमियों के बावजूद भी नागफनी एक दयालु और मिलनसार स्वभाव का पौधा था।
गुलाब को अपनी सुंदरता पर इतना घमंड था कि वह हमेशा नागफनी का मजाक उड़ाता रहता था। सुबह जब सूरज की पहली किरण पड़ती, तो गुलाब अपनी पंखुड़ियों को फैलाकर कहता, “देखो मुझे! कितना सुंदर हूं मैं! मेरे जैसा खूबसूरत पौधा इस पूरे रेगिस्तान में कोई नहीं है। और तुम नागफनी, तुम कितने बदसूरत हो! तुम्हारे पास न तो कोई फूल हैं, न कोई खुशबू है। तुम्हारा पूरा शरीर कांटों से भरा हुआ है। तुम इस खूबसूरत बगीचे की शोभा बिगाड़ रहे हो।”
नागफनी इन सब बातों को चुपचाप सुनता रहता और कभी कोई जवाब नहीं देता था। वह जानता था कि गुलाब अपने अहंकार में अंधा हो गया है और उसे समझाना व्यर्थ है।
बगीचे के अन्य पौधे भी गुलाब की इस हरकत से परेशान थे। एक दिन आम के पेड़ ने गुलाब से कहा, “गुलाब भाई, तुम नागफनी के साथ इतना बुरा व्यवहार क्यों करते हो? वह तुम्हारा कुछ बिगाड़ता तो नहीं है। फिर तुम उसे इतना परेशान क्यों करते हो?”
गुलाब ने अकड़ते हुए जवाब दिया, “आम भाई, तुम नहीं समझोगे। सुंदरता का क्या मतलब है, यह केवल मैं ही जानता हूं। इस नागफनी जैसे बदसूरत पौधे को यहां नहीं होना चाहिए। यह हम सबकी इज्जत में दाग है।”
तुलसी का पौधा भी बोला, “गुलाब, तुम्हारी सोच गलत है। भगवान ने हर चीज़ को किसी न किसी उद्देश्य से बनाया है। हो सकता है नागफनी में कोई ऐसी खूबी हो जो हम नहीं जानते।”
लेकिन गुलाब किसी की नहीं सुनता था। वह अपने अहंकार में इतना डूबा हुआ था कि उसे लगता था कि वह इस संसार की सबसे अच्छी चीज़ है।
दिन बीतते गए और गुलाब का व्यवहार और भी बुरा होता गया। वह नागफनी को देखकर नाक-भौं सिकोड़ता और कहता, “छि: छि:! यह कितना गंदा और बदसूरत है। इसे देखकर ही मेरा मूड खराब हो जाता है।”
नागफनी फिर भी चुप रहता। वह सोचता था कि शायद एक दिन गुलाब को अपनी गलती का एहसास हो जाएगा।
गर्मियों का मौसम आया। इस साल गर्मी बहुत ज्यादा पड़ रही थी। कई दिनों से बारिश नहीं हुई थी। धीरे-धीरे पानी की कमी होने लगी। नखलिस्तान में जो छोटा सा तालाब था, वह भी सूखने लगा। सभी पौधे पानी के लिए तरसने लगे।
गुलाब की हालत सबसे खराब थी। उसकी नाजुक पंखुड़ियां पानी की कमी से मुरझाने लगीं। उसका चमकदार लाल रंग फीका पड़ने लगा। उसकी खुशबू भी कम होने लगी। दिन-ब-दिन उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी।
“हाय! मैं क्या करूं?” गुलाब रोते हुए कहता, “अगर मुझे पानी नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगा। मेरी यह खूबसूरती सब खत्म हो जाएगी।”
दूसरी ओर, नागफनी की हालत बाकी पौधों से बेहतर थी। रेगिस्तान में रहने वाले पौधों में पानी को संचय करने की अद्भुत क्षमता होती है। नागफनी ने अपने अंदर पानी इकट्ठा कर रखा था। उसके मोटे तने में बहुत सारा पानी जमा था।
एक दिन की बात है, कुछ छोटी चिड़िया प्यास से बेहाल होकर इधर-उधर पानी की तलाश में भटक रही थीं। वे नागफनी के पास आईं और पानी मांगने लगीं।
नागफनी ने तुरंत अपने कांटों को थोड़ा हटाया और अपने तने से थोड़ा पानी निकालकर चिड़ियों को दिया। चिड़ियों ने खुशी से पानी पिया और नागफनी को धन्यवाद देकर चली गईं।
यह देखकर बाकी पौधे हैरान रह गए। आम के पेड़ ने कहा, “वाह नागफनी! तुमने इतने दिनों तक अपने अंदर पानी कैसे बचाकर रखा? और तुमने इन चिड़ियों की मदद भी की। तुम वाकई महान हो।”
नागफनी ने विनम्रता से कहा, “आम भाई, भगवान ने मुझे यह क्षमता दी है कि मैं कम पानी में भी जीवित रह सकूं। और जब किसी की मदद करने का मौका मिले तो क्यों न करूं?”
इधर गुलाब की हालत और भी खराब हो गई थी। उसकी पंखुड़ियां बिल्कुल सूख गई थीं और वह लगभग मरने की हालत में पहुंच गया था। उसे एहसास हुआ कि अगर उसे जल्दी पानी नहीं मिला तो वह मर जाएगा।
आखिरकार, अपने अहंकार को ताक पर रखकर गुलाब ने नागफनी से मदद मांगने का फैसला किया। वह लड़खड़ाते हुए नागफनी के पास गया और कांपती आवाज़ में बोला, “नागफनी भाई, मैं जानता हूं कि मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया है। मैंने तुम्हारा अपमान किया है और तुम्हें बुरा-भला कहा है। लेकिन अब मैं मरने वाला हूं। अगर तुम मुझे थोड़ा सा पानी दे दो तो शायद मैं बच जाऊं। मैं जानता हूं कि तुम्हारे पास पानी है।”
नागफनी ने गुलाब की बात सुनी। उसके मन में गुलाब के लिए कोई बुरी भावना नहीं थी। वह तुरंत बोला, “गुलाब भाई, तुमने मेरे साथ जो भी किया है, मैं उसे भूल गया हूं। हम सब एक ही बगीचे के सदस्य हैं और एक-दूसरे की मदद करना हमारा फर्ज है।”
यह कहकर नागफनी ने अपने तने से पानी निकाला और गुलाब को दिया। गुलाब ने बड़ी तेज़ी से पानी पिया। थोड़ी देर में ही उसमें जान आ गई। उसकी पंखुड़ियों में फिर से चमक आने लगी।
गुलाब की आंखों में आंसू आ गए। वह शर्म से सिर झुकाकर बोला, “नागफनी भाई, मैं तुमसे माफी मांगता हूं। मैं कितना मूर्ख था जो तुम्हारे बाहरी रूप को देखकर तुम्हें बुरा समझता था। आज मुझे एहसास हुआ है कि असली सुंदरता बाहरी रूप में नहीं बल्कि अच्छे दिल में होती है। तुमने मेरी सारी बुराइयों को भुलाकर मेरी जान बचाई है। तुम मुझसे कहीं ज्यादा सुंदर हो।”
नागफनी ने मुस्कराते हुए कहा, “गुलाब भाई, हम सब भगवान की संतान हैं। उसने हम सबको अलग-अलग गुण दिए हैं। तुममें सुंदरता है और सुगंध है, मुझमें धैर्य है और कम पानी में जीने की क्षमता है। हम सबकी अपनी-अपनी खूबियां हैं।”
इस घटना के बाद गुलाब बिल्कुल बदल गया। उसका अहंकार पूरी तरह से खत्म हो गया था। वह समझ गया था कि किसी को भी उसके बाहरी रूप से नहीं आंकना चाहिए। अब वह नागफनी से दोस्ती करने लगा और अपनी गलती के लिए हमेशा पछताता रहता था।
बगीचे के बाकी पौधे भी इस घटना से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने देखा कि कैसे नागफनी ने अपने दुश्मन की भी जान बचाई। इससे उन्हें जीवन की एक महत्वपूर्ण सीख मिली।
आम के पेड़ ने कहा, “यह घटना हम सभी के लिए एक सबक है। हमें कभी भी किसी को उसके बाहरी रूप से नहीं आंकना चाहिए।”
तुलसी ने कहा, “सच कहा आम भाई। असली सुंदरता तो दिल की होती है, चेहरे की नहीं।”
इस तरह उस छोटे से नखलिस्तान में सभी पौधों ने एक अनमोल सबक सीखा। वे समझ गए कि भेदभाव करना गलत है और हर किसी में कुछ न कुछ अच्छाई होती है।
गुलाब और नागफनी की दोस्ती दिन-ब-दिन गहरी होती गई। गुलाब अब अपनी खुशबू से पूरे बगीचे को महकाता था और नागफनी अपनी दयालुता से सबका दिल जीतता था। दोनों मिलकर बगीचे को स्वर्ग बना देते थे।
कभी भी किसी व्यक्ति को उसके बाहरी रूप से मत आंकिए। असली सुंदरता व्यक्ति के चरित्र और दिल की अच्छाई में होती है।

