बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में राजू नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत गरीब था लेकिन पढ़ाई में बहुत तेज़ था। उसके माता-पिता मजदूरी करके किसी तरह घर चलाते थे। राजू अपनी शिक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करता था। वह सुबह अखबार बेचता, स्कूल जाता, और शाम को छोटे-मोटे काम करके पैसे कमाता था।
एक दिन राजू को सुबह से कुछ खाने को नहीं मिला था। स्कूल में भी उसका टिफिन नहीं था। दिन भर भूखा रहने के कारण शाम को वह बहुत कमजोर हो गया था। घर वापस जाते समय रास्ते में उसे इतनी तेज़ भूख लगी कि वह चल नहीं पा रहा था। उसके पास पैसे नहीं थे कि कुछ खरीद सके।
अंत में उसने सोचा कि किसी घर से एक गिलास पानी मांग लेता है, शायद भूख थोड़ी कम हो जाए। वह एक सुंदर से घर के सामने गया और दरवाजे पर आवाज़ लगाई। दरवाजा खुला तो सामने एक खूबसूरत लड़की खड़ी थी जो उसकी ही उम्र की थी।
“बहनजी, क्या आप मुझे एक गिलास पानी दे सकती हैं? मुझे बहुत प्यास लगी है,” राजू ने हिचकिचाते हुए कहा।
लड़की ने राजू को ध्यान से देखा। उसके चेहरे पर थकान और कमजोरी साफ नज़र आ रही थी। उसके कपड़े साफ थे पर पुराने थे। लड़की समझ गई कि यह लड़का गरीब है और भूखा भी है। उसका दिल राजू के लिए दया से भर गया।
“पानी क्यों? आप यहाँ बैठिए, मैं आपके लिए दूध लेकर आती हूँ,” लड़की ने प्रेम से कहा।
राजू ने मना करने की कोशिश की, “नहीं बहनजी, मुझे सिर्फ पानी चाहिए। मैं दूध नहीं ले सकता।”
लेकिन लड़की नहीं मानी। वह तुरंत अंदर गई और एक बड़ा गिलास दूध लेकर आई। साथ में कुछ बिस्कुट भी थे। “लीजिए, इसे पिएं। आप बहुत थके हुए लग रहे हैं,” उसने कहा।
राजू को बहुत शर्म आ रही थी। वह जानता था कि उसके पास दूध के पैसे नहीं हैं। उसने डरते-डरते पूछा, “बहनजी, इसके कितने पैसे हैं?”
लड़की मुस्कराई और बोली, “भाई, दया और प्रेम के पैसे नहीं लिए जाते। आप चिंता न करें और शांति से इसे पी लें।”
राजू की आंखों में आंसू आ गए। उसने कभी सोचा नहीं था कि कोई अजनबी उसके साथ इतनी दया कर सकता है। उसने धीरे-धीरे सारा दूध पिया और बिस्कुट खाए। खाने के बाद उसे बहुत आराम मिला।
“आपका नाम क्या है?” राजू ने पूछा।
“मेरा नाम सीमा है। और आपका?” लड़की ने जवाब दिया।
“मैं राजू हूँ। बहनजी, आज आपने मेरे साथ जो दया की है, मैं इसे जीवन भर नहीं भूलूँगा। एक दिन मैं ज़रूर इसका बदला चुकाऊंगा,” राजू ने कृतज्ञता से कहा।
सीमा ने हंसते हुए कहा, “भाई, नेकी का बदला नहीं मांगा जाता। आप अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और आगे बढ़ें।”
उस दिन के बाद राजू का जीवन बदल गया। सीमा की दया ने उसके दिल में नई उमंग भर दी। वह पहले से भी ज्यादा मेहनत करने लगा। उसने मन में ठान लिया कि वह डॉक्टर बनेगा और लोगों की सेवा करेगा।
राजू दिन-रात मेहनत करता रहा। वह काम करके पैसे कमाता और पढ़ाई भी करता। उसकी लगन देखकर उसके शिक्षकों ने भी उसकी मदद की। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे कॉलेज में स्कॉलरशिप मिली क्योंकि वह बहुत मेधावी था।
राजू ने मेडिकल की तैयारी के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की। उसे अक्सर सीमा की याद आती थी। वह सोचता था कि अगर उस दिन सीमा ने उसे दूध नहीं दिया होता तो शायद वह इतनी हिम्मत नहीं कर पाता। उस एक गिलास दूध ने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी थी।
कई साल बाद राजू एक सफल डॉक्टर बन गया। वह न केवल कुशल था बल्कि दयालु भी था। गरीब मरीजों से वह कोई फीस नहीं लेता था। कई बार तो वह अपनी जेब से दवाइयों के पैसे भी देता था। उसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली और वह एक बड़े अस्पताल में सीनियर डॉक्टर बन गया।
वर्षों बाद एक दिन अस्पताल में एक महिला मरीज़ लाई गई। उसकी हालत बहुत गंभीर थी। डॉक्टर राजू को इस मामले को देखने के लिए कहा गया। महिला को एक दुर्लभ बीमारी थी जिसका इलाज बहुत महंगा था। डॉक्टर राजू ने दिन-रात मेहनत करके उसका इलाज किया।
महिला के परिवार वाले बहुत परेशान थे क्योंकि उनके पास इतने पैसे नहीं थे। लेकिन राजू ने कहा कि वे चिंता न करें, पहले मरीज़ को ठीक करना जरूरी है। कई हफ्तों के इलाज के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ।
जब महिला होश में आई तो राजू ने उससे बात की। बातचीत के दौरान पता चला कि उसका नाम सीमा था। राजू का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने पूछा, “क्या आप उसी शहर से हैं जहाँ आपने एक बार एक गरीब लड़के को दूध दिया था?”
सीमा ने हैरान होकर कहा, “हाँ, मुझे याद है। वह एक अच्छा लड़का था। उसने कहा था कि वह एक दिन मेरी मदद का बदला चुकाएगा। लेकिन आप यह कैसे जानते हैं?”
राजू की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा, “क्योंकि मैं वही राजू हूँ जिसे आपने वर्षों पहले दूध दिया था। आज मुझे आपकी उस दया का बदला चुकाने का मौका मिला है।”
सीमा को विश्वास नहीं हो रहा था। वह छोटा सा भूखा लड़का आज एक बड़ा डॉक्टर बन गया था। दोनों की आंखों में खुशी के आंसू थे।
राजू ने सीमा के इलाज का पूरा खर्च माफ कर दिया। जब सीमा के पति ने अस्पताल से बिल के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि बिल पहले से ही चुकाया जा चुका है। बिल पर एक नोट लिखा था: “एक गिलास दूध के साथ पूरा भुगतान – डॉक्टर राजू”।
जब सीमा ने यह नोट पढ़ा तो वह रो पड़ी। उसे एहसास हुआ कि वर्षों पहले उसके द्वारा दिखाई गई छोटी सी दया आज उसके जीवन को बचाने का कारण बनी थी। वह समझ गई कि अच्छे काम का फल हमेशा मिलता है, चाहे कितना भी समय लग जाए।
राजू और सीमा की दोस्ती और भी गहरी हो गई। राजू अक्सर सीमा के घर जाता और उसके परिवार का हाल-चाल पूछता। उसने सीमा के बच्चों की पढ़ाई में भी मदद की।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दया और नेकी कभी व्यर्थ नहीं जाती। जब हम बिना किसी स्वार्थ के किसी की मदद करते हैं, तो वह किसी न किसी रूप में हमारे पास वापस आती है। सीमा के एक गिलास दूध ने न केवल राजू की भूख मिटाई बल्कि उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दी।
यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि मेहनत और लगन से कोई भी व्यक्ति अपनी मंजिल पा सकता है। राजू ने अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनाया बल्कि उसे अपनी ताकत बनाया। आज वह एक सफल डॉक्टर था और लोगों की सेवा कर रहा था।
सबसे बड़ी बात यह है कि हमें हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए। पता नहीं हमारा छोटा सा अच्छा काम किसी के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला दे। और जब हम सच्चे दिल से नेकी करते हैं, तो ईश्वर हमारा भी ख्याल रखता है।

