श्यामपुर नामक गांव में शिव नाम का एक युवक अपनी मां के साथ रहता था। वह अपने आम के बगीचे से आम बेचकर जीवन यापन करता था। शिव अपने पेड़ों की अच्छी देखभाल करता था, लेकिन उसके आम कभी कच्चे होते और कभी खराब हो जाते थे। बाजार में व्यापारी उसके आम देखकर कहते, “ये आम इतने खराब हैं कि कबाड़ी भी नहीं लेगा। कौन खरीदेगा इन्हें?”
शिव रोज निराश होकर घर लौटता। उसके सारे आम सड़ जाते और कर्ज बढ़ता जाता। गांव के साहूकार भुवन का एक बड़ा आम का बगीचा था। उसके आम शहर में महंगे दामों पर बिकते थे। भुवन लालची और स्वार्थी था।
एक दिन भुवन शिव के घर आया, “अरे शिव, तेरे कर्ज बढ़ते जा रहे हैं। मेरे यहां काम कर ले। कम से कम रोटी-कपड़ा मिल जाएगा।”
शिव ने साफ मना कर दिया, “सेठ जी, मैं अपना काम संभाल लूंगा। सड़क पर रहूंगा लेकिन आपके यहां काम नहीं करूंगा।”
यह सुनकर भुवन गुस्से में चिल्लाया, “देखो इस भिखारी को! दो हफ्ते में मेरा कर्ज चुकता करो, नहीं तो घर-बगीचा सब ले लूंगा।”
शिव की मां रमा ने उसे हिम्मत दी, “बेटा, हार मत मानो। शहर जाकर कोशिश करो, कुछ अच्छा हो सकता है।”
अगले दिन शिव शहर गया लेकिन कोई मदद नहीं मिली। निराश होकर जंगल के रास्ते घर लौटते समय उसने एक साधु को बेहोशी में पड़ा देखा। शिव ने उनके चेहरे पर पानी छिड़का। साधु जी उठे और पानी पीकर तबीयत संभाली।
“बाबा, अब कैसी तबीयत है?” शिव ने पूछा।
साधु ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “तुमने इस बूढ़े की मदद की। बताओ, तुम्हें क्या चाहिए?”
“बाबा, कुछ नहीं चाहिए। बस आशीर्वाद दें कि कर्ज चुका सकूं।”
साधु ने अपनी थैली से एक बीज निकालकर दिया, “बेटा, इसे अपने बगीचे में लगाओ। रोपते समय जिस फल का नाम लोगे, वही फल लगेगा और तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी।”
शिव ने बीज लेकर साधु को धन्यवाद दिया। घर पहुंचकर अगली सुबह उसने बीज को आम के पेड़ का नाम लेकर लगाया। दो दिन में छोटा पौधा निकला। आठवें दिन तक वह पूरा पेड़ बन गया।
जब शिव ने देखा तो हैरान रह गया – पेड़ पर सोने के आम लगे थे! उसने पांच आम तोड़े और बाजार में बेचे। उस पैसे से भुवन का कर्ज चुकता कर दिया।
शिव की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उसने सारे कर्ज चुकता किए, बड़ा घर खरीदा, गाड़ी-जमीन ली। लेकिन भुवन को जलन हुई।
एक रात भुवन चुपके से आम चुराने आया। जैसे ही उसने हाथ बढ़ाया, एक गहरे गड्ढे में गिर गया। शोर सुनकर लोग दौड़े आए।
शिव ने कहा, “सेठ जी, मुझे पता था आप चोरी करने आएंगे। इसीलिए गड्ढा खोदा था।”
भुवन घबराकर बोला, “शिव, मैं सिर्फ देखने आया था, चोरी नहीं करने।”
“अब पुलिस ही आपकी मदद करेगी। आपने कितने गरीबों को लूटा है। आज सजा भुगतिए।”
शिव ने पुलिस को बुलाया। भुवन को चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। गांव वाले खुश थे क्योंकि भुवन ने कई लोगों को लूटा था।
शिव अमीर बन गया लेकिन गरीबों की मदद करता रहा। जरूरतमंद युवकों को कर्ज देता ताकि वे भी तरक्की कर सकें। वह और उसकी मां खुशी से रहने लगे।
यह कहानी हमें सिखाती है कि हमेशा सच्चाई का साथ दो। जिंदगी कितनी भी कठिन हो, हिम्मत से मुकाबला करो। दयालुता और ईमानदारी का फल मिलता है, जबकि लालच और बेईमानी का अंत बुरा होता है।

