मनसुख एक दूधवाला था जो गाँव में हर घर में दूध बेचता था। लोग उसे बहुत ईमानदार और गरीब समझते थे। वह रोज़ाना साइकिल पर दूध लेकर घर-घर जाता था।
एक दिन मनसुख सुनीता आंटी के घर गया। “आंटी, आपका दूध ले आइए,” उसने आवाज़ लगाई।
“हाँ हाँ, आज आधा लीटर ज्यादा दे दो। बेटी को खीर बनानी है,” सुनीता ने कहा।
“बिल्कुल आंटी, लीजिए। बेटी के लिए स्वादिष्ट खीर बनाइएगा,” मनसुख मुस्कराते हुए बोला।
महीना खत्म होने पर सुनीता ने पैसे दिए। “मनसुख भैया, आप गाँव में सबसे सस्ता दूध बेचते हैं और रोज़ समय पर आते हैं। इसलिए हमारा फर्ज़ है कि हम भी समय पर पैसे दें।”
“धन्यवाद बहनजी,” मनसुख ने पैसे लेते हुए कहा।
घर पहुँचकर मनसुख ने पत्नी मीना से कहा, “आज साइकिल का टायर पंचर हो गया था। इसीलिए देर हुई।”
“मोटरसाइकिल क्यों नहीं खरीद लेते?” मीना ने सुझाव दिया।
मनसुख हँसा, “अगर मैं मोटरसाइकिल चलाऊंगा तो गाँववाले सोचेंगे कि इस गरीब दूधवाले के पास इतने पैसे कहाँ से आए?”
रात में मनसुख ताज़े दूध में स्टार्च मिलाने लगा। मीना ने पूछा, “ये क्या कर रहे हो?”
“अरे पागल औरत! कितनी बार कहा है हमारा दूध अलग रखना। ये तो बेचने के लिए नकली दूध है,” मनसुख ने गुस्से से कहा।
दरअसल, मनसुख लोगों को नकली दूध बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा था। बाहर से वह गरीब और ईमानदार दिखता था, लेकिन अंदर से बहुत लालची था।
एक दिन साइकिल फिर पंचर हो गई। मरम्मत के दौरान पास की भजिया की दुकान पर बैठकर इंतज़ार कर रहा था। तभी दो शहरी आदमी आए जो गुंडे लग रहे थे।
अचानक एक आदमी को खाँसी आने लगी। मनसुख ने तुरंत अपने डिब्बे से दूध दिया। दूध पीते ही उसकी खाँसी रुक गई।
“तुम्हारा दूध बहुत साफ है। इसमें क्या मिलाया है?” उस आदमी ने पूछा।
मनसुख घबरा गया। “क्या मतलब भाई?”
“ये दूध बिल्कुल नकली है। स्वाद से ही पता चल जाता है,” आदमी ने कहा।
“देखो भाई, किसी को मत बताना। चाहो तो पैसे ले लो,” मनसुख ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
“हम तुम्हारा धंधा बर्बाद नहीं करेंगे। बल्कि और बढ़ाने में मदद करेंगे। ये पाउडर मिला दो दूध में। ₹1000 में मिलेगा,” आदमी ने एक पैकेट दिया।
लालच में आकर मनसुख ने पाउडर खरीद लिया।
अगले हफ्ते दूध की मांग बढ़ गई। लोग मनसुख का दूध बहुत पसंद करने लगे। मनसुख ने और पाउडर मंगवाया।
एक दिन सुनीता के घर एक युवक मिला। “मैं पुलिस अफ़सर हूँ, चाची का भतीजा,” उसने अपना परिचय दिया।
‘पुलिस’ सुनते ही मनसुख घबरा गया और दूध का डिब्बा गिर गया।
कुछ दिन बाद वह युवक मनोज फिर आया। मनसुख डर के मारे साफ दूध दिया।
“बहुत स्वादिष्ट दूध है। कल जब मैंने पिया था तो कुछ अजीब लगा था,” मनोज ने कहा।
मनसुख की समझ में आ गया कि मीना ने गलती से नशीला पाउडर ज्यादा मिला दिया था।
अंततः मनोज ने मनसुख को पकड़ लिया और पुलिस स्टेशन ले गया। पूरे गाँव को पता चल गया कि मनसुख धोखेबाज़ था।
लालच का अंत हमेशा बुरा होता है। ईमानदारी ही सबसे बड़ी दौलत है।

