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हॉस्टल का वो कमरा जहाँ कोई नहीं जाता 😨 | Real Ghost Story | Sachchi Bhoot Kahani

Posted on February 27, 2026 by Kahani Ki Duniya

“माँ, माँ… मुझे मत छोड़ो। मैं घर पर रहकर पढ़ूँगी, मुझे यहाँ मत छोड़ो!” रागिनी की आवाज़ कंपकंपा रही थी।

“चुप रहो! सब देख रहे हैं। अब तुम स्कूल में नहीं, कॉलेज में हो।” पिता राकेश ने झिड़का।

माँ सुनीता और पिता राकेश उसे खींचते हुए कमरा नंबर 13 की तरफ ले जा रहे थे। बाकी सारी लड़कियाँ दरवाज़ों से झाँककर देख रही थीं।

“यह लड़की तो पागल लग रही है।”

“पर यार, एक बात नोटिस किया? इसे कमरा 13 में ले जा रहे हैं… कोई उस कमरे को नहीं लेता।”

“क्योंकि बाकी सब कमरे पहले से भर चुके हैं।”

माँ-बाप ने रागिनी को कमरे में धकेल दिया।

“यहीं रहना है। कोई बहाना नहीं चलेगा। चुपचाप पढ़ो।”

रागिनी कुछ बोल न सकी। माँ-बाप निकल गए। तभी गेट पर एक लड़की दौड़ती हुई आई —

“रुकिए! अपनी बेटी को कमरा 13 में मत रखिए। उस कमरे में कुछ गड़बड़ है।”

“बकवास बंद करो। हम अंधविश्वासी नहीं हैं। और वैसे भी कोई और कमरा बचा नहीं है।” राकेश ने झटककर कहा और दोनों चले गए।

रागिनी बिस्तर पर बैठकर रो रही थी। तभी दरवाज़े पर ज़ोर से दस्तक हुई।

“खोल दरवाज़ा, रोने वाली रानी! पहली रात है, रैगिंग तो बनती है!”

रागिनी ने दरवाज़ा खोला — सामने कोई नहीं था। पीछे से आवाज़ आई —

“नाचो ज़रा! पहली रात है तुम्हारी!”

“प्लीज़, मैं पहले से बहुत परेशान हूँ। मुझे अकेला छोड़ दो।”

आधी रात को जब सब शांत हो गया, रागिनी की आँख खुली — उसके रोने की आवाज़ के साथ किसी और के रोने की आवाज़ मिलती जा रही थी।

“कौन है? प्लीज़, चले जाओ…”

आवाज़ अचानक बढ़ गई, फिर अचानक बंद हो गई। रागिनी काँपते हुए किसी तरह सो गई।

अगली सुबह, कॉमन एरिया में क्लासमेट सपना उससे मिली।

“रागिनी! तुम यहाँ? मैं भी तुम्हारी क्लास में हूँ। पर वो कमरा नंबर 13… ठीक नहीं है।”

रागिनी ने टाल दिया। पर उसी रात —

“यह कमरा मेरा है। यहाँ से चली जाओ।”

अंधेरे में बिस्तर के नीचे से एक परछाईं निकली और दीवार पर तेज़ी से दौड़ने लगी। रागिनी चीखती हुई दरवाज़े की तरफ भागी, पर दरवाज़ा बंद था।

“खोलो! कोई है? बाहर कोई है?”

रागिनी बेहोश होकर गिर पड़ी।

सुबह जब उठी तो पिता को फोन किया —

“पापा, यहाँ कुछ है। प्लीज़ मुझे ले जाओ।”

“बस करो। पढ़ाई के लिए भेजा है — नाटक के लिए नहीं।”

फोन कट गया।

सपना वहाँ बैठी थी। अचानक उसने अपना सिर झुका लिया, सारे बाल मुँह पर आ गए।

“सपना, ठीक हो?”

तभी रागिनी के फोन पर स्क्रीन पर लिखा आया — ‘सपना calling’

काँपते हाथों से उठाया — “चलो रागिनी, खाना खाने चलते हैं।”

रागिनी ने सामने बैठी लड़की के कंधे पर हाथ रखा — वह सपना नहीं थी।

“मुझे जाने दो! मुझे जाने दो! मुझे इंसाफ़ चाहिए। मुझे जलाया गया था।”

“मैं… मैं क्या कर सकती हूँ?”

“जो मेरे साथ हुआ, उनसे बदला लेना है — जो आज इस कॉलेज में टीचर हैं।”

“मैं यह नहीं कर सकती!”

“तो मौत से भी बुरी सज़ा के लिए तैयार हो जाओ।”

चुड़ैल की आँखें लाल हो गईं —

“बचाओ! कोई है बाहर? दरवाज़ा खोलो!”

धड़ाम से दरवाज़ा खुला। बाहर सीनियर लड़कियाँ खड़ी थीं।

“क्या हुआ? इतना चिल्ला क्यों रही हो? अगर फिर ड्रामा किया तो…”

रागिनी बाहर निकली और सीधे सपना के पास गई। सपना ने रागिनी की माँ को फोन किया, पर उन्होंने नहीं सुना।

“कुछ दिन मेरे कमरे में रहो।”

जब रागिनी अपना मोबाइल लेने कमरे में गई — चुड़ैल वहाँ खड़ी थी। सपना भी पीछे आ गई। दरवाज़ा बंद हो गया।

“हम इस कमरे में नहीं आएँगे। हमें जाने दो।”

चुड़ैल ने एक झटके में सपना का… रागिनी चीख पड़ी।

“तूने सीनियर्स से बदला लेना था — मेरी दोस्त को क्यों मारा?”

“मैं सबको मारूँगी। किसी ने मेरी मदद नहीं की।”

रागिनी ने खिड़की देखी — थोड़ी खुली थी। वो कूद गई।

होश आया तो ऑपरेशन थिएटर के बाहर थी — नंबर था 13।

आँखें बंद हुईं। जब खुलीं — वापस कमरा नंबर 13।

“नहीं! यह कैसे हो सकता है?”

सपना की लाश वहीं पड़ी थी। एक हफ्ते बाद दरवाज़ा खुला — काजल, पूनम और गार्ड बाहर खड़े थे।

“क्या कर दिया तूने? सपना को मारा?”

चुड़ैल फिर आई। पूनम का गला घोंट दिया। गार्ड को दीवार पर पटका। काजल की आँखों में उँगलियाँ डाल दीं।

जब सब मर गए, चुड़ैल रागिनी की तरफ मुड़ी —

“तुम मेरी हो। पर जीवित रहोगी — क्योंकि तुम्हें मेरी कहानी आगे ले जानी है।”

कहते हैं आज भी रागिनी कमरा नंबर 13 में बाल खींचते हुए हँसती रहती है।

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Category: Stories

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