Skip to content
Kahani Ki Duniya
Menu
  • Home
  • Stories
    • Bedtime Stories
    • Fairy Tales
    • Inspirational Stories
    • Magic & Fantasy
    • Moral Stories
  • Folk Tales
  • YouTube Channel
  • About
  • Contact
    • गोपनीयता नीति (Privacy Policy)
    • Disclaimer Page (डिस्क्लेमर पेज)
    • Terms of Use / Terms and Conditions Page (उपयोग की शर्तें)
Menu
Untitled 1

भूतिया चाय की दुकान 😱 | Haunted Tea Shop Horror Story | Rainy Night Ghost Story in Hindi | Bhootiya Kahani

Posted on February 2, 2026 by Kahani Ki Duniya

साइकिल चलाते हुए आकाश ने एक बार आसमान की ओर देखा। उसने देखा कि धूसर रंग का आसमान काले बादलों से घिर रहा था। चारों ओर की हवा जैसे थम गई हो। उसे तुरंत समझ में आ गया कि भयंकर तूफान आने वाला है। लेकिन रामपुर गांव पहुंचना अभी भी बहुत दूर था। आकाश ने पैडल पर जोर से दबाव डाला, लेकिन वह ज्यादा दूर तक नहीं जा पाया। अचानक जोर का तूफान शुरू हो गया। साथ ही लगातार तेज बिजली कड़कने लगी और थोड़ी ही देर में मूसलधार बारिश शुरू हो गई। सामने का रास्ता बारिश की धुंध में छिप गया। आकाश ने कोई और उपाय न देखकर एक घने पेड़ के नीचे शरण ली। लेकिन फिर भी वह बारिश की मार से बच नहीं सका।

“हे भगवान, इस तूफान को रोको। मेरी रक्षा करो।”

शायद भगवान ने उसकी प्रार्थना सुन ली। थोड़ी ही देर में तूफान और बारिश थम गई। लेकिन सड़क की जो हालत थी, उसमें अब साइकिल चलाकर आगे बढ़ना संभव नहीं था। मजबूरी में आकाश साइकिल को घसीटते हुए आगे बढ़ने लगा। लेकिन थोड़ी दूर जाकर उसे समझ में आया कि वह रास्ता भटक गया है। वह सोच में पड़ गया कि अब क्या करें। तभी उसके कानों में एक आवाज आई।

“क्या आप रास्ता भटक गए हैं?” आकाश चौंककर चारों ओर देखने लगा।

उसने देखा कि धुंधले अंधेरे में एक छाया जैसी आकृति खड़ी है। आकाश ने पूछा, “कौन हो तुम?” एक खुरदरी आवाज आई, “मैं मोहन हूं बाबू। लगता है आप रास्ता भटक गए हैं। आप रामपुर जाना चाहते हैं ना? लेकिन नहीं जा पाएंगे। रामपुर जाने वाला रास्ता बंद है। रास्ते में पेड़ गिर गया है।” आकाश मुसीबत में फंस गया। वह पागलों की तरह सामने अंधेरे में डूबी सड़क की ओर देखने लगा।

“यहीं पास में मेरी चाय की दुकान है। चलिए, फिर से बारिश शुरू हो जाएगी,” मोहन ने कहा।

आकाश ने आसमान की ओर देखा और हल्के से सिर हिलाकर हामी भर दी। जैसे-जैसे वह मोहन के पीछे आगे बढ़ता गया, उसे कुछ अजीब महसूस होने लगा। जिस वक्त से वह आदमी उसके पास आया था, तभी से आकाश को भीगी हवा में किसी जली हुई चीज की गंध आ रही थी। थोड़ी दूर जाते ही उसने एक गूलर का पेड़ देखा। पास ही एक झोपड़ीनुमा घर था। वहां एक मिट्टी के दीये की लौ जल रही थी। मोहन ने फिर से आवाज दी, “आइए बाबू, यही मेरी चाय की दुकान है।”

आकाश ने साइकिल को गूलर के पेड़ से टिका दिया और झोपड़ी की चौखट पर आकर खड़ा हो गया। उसने देखा कि एक तरफ चूल्हा है और उसके चारों ओर चाय बनाने का सामान रखा है। आकाश हैरान हो गया यह सोचकर कि इतनी सुनसान जगह पर इस चाय की दुकान में आखिर चाय पीने कौन आता होगा। मोहन एक मोढ़ा ले आया और बोला, “बैठिए बाबूजी, मैं चाय लाता हूं।” आकाश अपनी गोद में रखे पैसों के थैले को कसकर पकड़कर बैठ गया। बाहर फिर से तूफान शुरू हो रहा था।

“ये लीजिए चाय। आप बहुत भीग गए हैं। ये पीजिए, अच्छा लगेगा,” मोहन ने कहा।

इतनी जल्दी चाय बनाकर ले भी आया, यह हैरानी की बात थी। हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गई। आकाश चाय की चुस्की लेते हुए पूछ बैठा, “यहां चाय पीने कौन आता है? मतलब इतनी सुनसान जगह में।” मोहन ने जवाब दिया, “पहले कुछ दूरी पर एक बस स्टैंड था, तब लोग आया करते थे। और अब… अब आप जैसे कोई-कोई आता है।” उस आदमी की बातों में कुछ अजीब सा था। आकाश का सीना एकदम से सिहर उठा। उसने असहजता के साथ चाय की एक और चुस्की ली।

“आज रात आप नहीं जा पाएंगे बाबूजी। रात को यहीं रुकना पड़ेगा,” मोहन ने कहा।

आकाश ने देखा कि बारिश की बूंदें अब और भी तेज हो गई थीं। तूफान की रफ्तार भी काफी बढ़ गई थी। बिजली लगातार गिर रही थी। लेकिन एक चीज देखकर उसे बहुत हैरानी हुई। इतनी तेज आंधी के बावजूद दीये की लौ जरा भी नहीं हिल रही थी। न जाने क्यों आकाश को लगने लगा कि उसके चारों ओर जो कुछ भी है वह सच नहीं है। जैसे कोई जाल है जो चुपचाप उसे अपने भीतर लपेट रहा हो। बैग में रखे हुए पैसों के कारण उसका सीना धड़कने लगा।

जब बारिश थमी तब तक रात काफी बीत चुकी थी। मोहन दहलीज पर आकाश के लिए बिस्तर लगाते हुए बोला, “कहां गई रानी? बाबू को पान नहीं दिया। आइए बाबू, यहां लेट जाइए। डरने की कोई बात नहीं है। मैं और रानी तो हैं ही।” आकाश ने हल्के से सिर तो हिलाया लेकिन उसके सीने में एक बार फिर से टीस उठी। जैसे ही नूपुर की झनझनाहट कानों में पड़ी, वह हल्के से चौंककर देखने लगा। रानी धीमे कदमों से आगे बढ़ रही थी। उसकी आंखों में जैसे कोई खास इशारा था जो उसने मोहन की ओर किया। यह बात आकाश की नजरों से छुपी नहीं रही।

“लीजिए बाबू, पान,” रानी ने कहा। “खाइए-खाइए, रानी के हाथ का पान खाकर आप जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे।”

आकाश कांपते हाथों से पान उठाने ही वाला था कि एक तीखी सड़ी सी गंध उसकी नाक में आ लगी। कुछ वैसी ही गंध जैसी कच्चे खून की होती है। अचानक आई एक तेज हवा के झोंके से रानी के सिर की ओढ़नी सरक गई और जो दृश्य आकाश ने देखा, उसे देखकर उसका खून जैसे जम ही गया। रानी के गले पर खून की एक लकीर थी। वहां से एक पतली धार बह रही थी। रानी ने तेजी से अपनी ओढ़नी ठीक की और पलक झपकते ही गायब हो गई। आकाश ने मशीन की तरह पान को मुंह में डाल लिया। मोहन दीये की लौ धीमी कर कमरे के अंदर चला गया। आकाश एक अजीब सी घबराहट लेकर लेट गया।

रात गहरी और शांत थी। केवल झींगुरों की आवाज उस सन्नाटे को तोड़ रही थी। पास की किसी झाड़ी से एक सियार चीख उठा। थकान की वजह से थोड़ी ही देर में आकाश सो गया। अचानक एक डरावनी चीख चारों ओर गूंज उठी। आकाश बिस्तर पर उछलकर बैठ गया। उसने पागलों की तरह इधर-उधर देखा। तभी उसके कानों में एक चरमराती सी आवाज पड़ी। आकाश ने उधर नजर घुमाई और देखा कि सिर्फ एक हाथ की दूरी पर कोई व्यक्ति गले में रस्सी डाले झूल रहा था।

“क्या हुआ बाबूजी? कोई बुरा सपना देख लिया क्या?” मोहन ने पूछा।

आकाश ने देखा कि झोपड़ी के सामने के आंगन में एक लगभग टूटे बांस के मचान पर मोहन बैठा था। आकाश ने फिर से उस ओर देखा जहां कुछ देर पहले कोई गले में रस्सी डालकर झूल रहा था। लेकिन वहां अब कुछ भी नहीं था। मोहन ने कहा, “क्या ढूंढ रहे हैं बाबूजी? कुछ नहीं है। वो सब बुरा सपना था। बहुत गर्मी है इसलिए बाहर की हवा लेने आया हूं। आप भी आइए ना।” आकाश समझ गया कि उसका शरीर पसीने से तर-बतर हो चुका था। वह बिस्तर छोड़कर मचान की ओर बढ़ गया और मोहन के पास जाकर बैठ गया।

“इतनी गर्मी है, अब नींद आएगी ही नहीं। ऊपर से सपने में आप क्या कुछ देख रहे हैं। इससे अच्छा मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं,” मोहन ने कहा।

“तीन साल पहले की बात है। ऐसी ही एक चाय की दुकान थी किसी आदमी की। सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन इंसान अकेले कब तक रह सकता है? उसने शादी कर ली किसी दूसरे गांव की एक लड़की से। उस लड़की को देखते ही नजर ठहर जाती थी। लोग कहते, ‘यह तो जैसे कोयले में हीरा।’ दुकान में भीड़ बढ़ने लगी और उसकी पत्नी ने भी हाथ बटाना शुरू कर दिया। राजू नाम का एक आदमी रोज चाय पीने आने लगा। वह एक कप चाय पीता था लेकिन घंटों बैठा रहता। उस दुकानदार को समझ आ रहा था कि राजू की नजर उसकी पत्नी पर है। लेकिन नई दुल्हन के बारे में ऐसा सोचने को उसका मन नहीं मान रहा था। ऐसे ही दिन कट रहे थे।”

“एक दिन दोपहर के बाद वो बाजार जाने के लिए निकला। उसने अपनी पत्नी से कहा, ‘मैं चलता हूं। आखिरी बस में लौटूंगा। शाम को दुकान खोलने की जरूरत नहीं है।’ बाजार में खरीदारी करते हुए उसने देखा कि तूफान आने वाला है। इसलिए जल्दी सामान लेकर वो पहली वाली बस पकड़ ली। जब बस ने उसे मोड़ पर उतारा, आसमान काला हो चुका था। वह तेजी से घर की तरफ चला। लेकिन आंगन में आते ही घर के अंदर से हंसी की आवाज आई। एक पल के लिए वह ठिठक गया। खिड़की से अंदर झांका और जो उसने देखा उससे उसके शरीर में बिजली दौड़ गई। बिस्तर पर राजू लेटा हुआ था और उसकी पत्नी उसके सीने पर आधी लेटी हंस रही थी।”

आकाश की सांसें रुक गईं। मोहन ने कहानी जारी रखी, “उस आदमी के हाथ से बैग गिर गया। पत्नी के लिए लाई चूड़ियां भी जमीन पर गिरकर टूट गईं। राजू दौड़ते हुए बाहर आया और दुकानदार को देखकर हक्का-बक्का रह गया। उस पागल आदमी ने तुरंत अपनी पत्नी की गर्दन पर वार कर दिया। खून निकल आया। पत्नी जमीन पर गिर पड़ी। फिर उसने राजू को घसीटकर रस्सी से फांसी पर लटका दिया। गुस्से में उस आदमी ने जलती लालटेन फेंककर अपनी पत्नी के शरीर पर फेंक दी। आग पूरे झोपड़े में फैल गई। वह आदमी भी जलने लगा।”

आकाश की रूह कांप गई। मोहन ने कहा, “जाइए बाबू, तैयार हो जाइए। थोड़ी देर में सुबह हो जाएगी। और हमें भी तो जाना होगा।” आकाश जल्दी-जल्दी तैयार हो गया और साइकिल लेकर बाहर निकल गया। लेकिन कुछ दूर जाते ही उसे याद आया कि वह पैसों का बैग भूल गया है। वह तुरंत साइकिल घुमाकर वापस लौटा। लेकिन ये क्या! झोपड़ी कहां गई? वहां तो अब सिर्फ एक जली हुई झोपड़ी का ढांचा पड़ा था।

“शायद आप यह ढूंढ रहे हैं?” एक आवाज आई। आकाश तेजी से पलटा। देखा उसका पैसों वाला बैग था। “कौन हो तुम?” उसने कांपते हुए पूछा। तेज हवा के झोंके से ओढ़नी हट गई। वही सड़ी सी तीखी गंध फिर से उसकी नाक में आ लगी। आकाश की आंखों के सामने प्रकट हुआ एक औरत का भयावह खून से सना चेहरा। आकाश होश खो बैठा और साइकिल समेत वहीं सड़क पर गिर पड़ा।

Post Views: 156
Category: Stories

Post navigation

← बुलाकी मसान से Hanuman Bhakt की जंग | Real Paranormal Experience
रहस्यमयी लड़की की कहानी | Mystery Horror Story Hindi | Suspense Thriller →

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • मोलक का श्राप | Aghoram Ka Kala Sach | Hindi Horror Story | गांव की बलि का रहस्य
  • बहू या Black Magic Queen? 😱 एक परिवार की डरावनी सच्चाई | Real Horror Story
  • 🔥 रात का रक्षक | Raat Ka Rakshak | Horror Story Hindi | Ghost Saves Man from Demons
  • Jogini Maai Ka Raaz | Real Ghost Wedding Story | गाँव की सच्ची भूतिया कहानी” | New horor story
  • उस बरगद के नीचे 7 पत्थर… और एक चेहराविहीन औरत | Kaali Parchhain Horror

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025

Categories

  • Bedtime Stories
  • Fairy Tales
  • Folk Tales
  • Inspirational Stories
  • Magic & Fantasy
  • Moral Stories
  • Stories
© 2026 Kahani Ki Duniya | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme