बहुत समय पहले की बात है, एक घने और हरे-भरे जंगल में राजा नामक एक शक्तिशाली शेर रहता था। राजा अपने विशाल शरीर, सुनहरे रंग की अयाल और गर्जना से पूरे जंगल में प्रसिद्ध था। वह जंगल का राजा था और सभी जानवर उससे डरते थे।
उसी जंगल में टिंकू नामक एक छोटा और चंचल चूहा भी रहता था। टिंकू बहुत ही शरारती और जिज्ञासु था। वह हमेशा जंगल में इधर-उधर घूमता रहता और नई-नई जगहों की खोज करता रहता था। उसके छोटे-छोटे पैर, नुकीली नाक और लंबी पूंछ थी जो उसे बेहद प्यारा बनाती थी।
एक दिन दोपहर का समय था। गर्मी के कारण पूरा जंगल शांत था और सभी जानवर अपने-अपने घरों में आराम कर रहे थे। राजा शेर भी एक बड़े पेड़ के नीचे गहरी नींद में सोया हुआ था। उसकी गुफा पास में ही थी, जहां ठंडी और सुखद हवा आती थी। राजा की गर्जना इतनी तेज थी कि उसकी नींद में भी हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं।
इसी बीच, टिंकू चूहा खेलते-खेलते उस रास्ते से गुजरा जहां राजा शेर सो रहा था। टिंकू ने सोचा कि शेर तो गहरी नींद में है, इसलिए उसे कैसे पता चलेगा कि मैं यहां हूं। उसने मन ही मन कहा, “अरे वाह! यह तो मेरे खेलने के लिए एकदम सही जगह है। इतना बड़ा और नरम शेर, मैं इस पर कूद-फांद सकता हूं।”
टिंकू धीरे-धीरे राजा के पास गया और उसके विशाल शरीर पर चढ़ने लगा। वह उसकी अयाल पर कूदा, फिर उसकी पीठ पर दौड़ा और उसकी पूंछ से खेलने लगा। टिंकू इतने मजे में था कि उसे यह भी नहीं पता चला कि वह कितना शोर कर रहा है।
अचानक, राजा शेर की नींद खुल गई। उसे अपने शरीर पर कुछ चलता हुआ महसूस हुआ। गुस्से में आकर उसने तेजी से अपना विशाल पंजा उठाया और एक ही झटके में टिंकू को पकड़ लिया। टिंकू बुरी तरह से डर गया। वह राजा के पंजे में फंस गया था और बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन शेर की पकड़ बहुत मजबूत थी।
राजा ने गुस्से से कहा, “तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने मेरी नींद में खलल डाला! तुम्हें नहीं पता कि मैं कौन हूं? मैं जंगल का राजा हूं और तुमने मुझे परेशान किया है। अब तुम्हें इसकी सजा मिलेगी।”
टिंकू घबराहट में कांपने लगा। उसकी आंखों में आंसू आ गए और उसने विनम्रता से कहा, “महाराज, कृपया मुझे माफ कर दीजिए। मैं बहुत छोटा और मूर्ख हूं। मुझे नहीं पता था कि मैं आपको परेशान कर रहा हूं। कृपया मेरी जान बख्श दीजिए। मैं आपसे वादा करता हूं कि एक दिन मैं आपकी मदद करूंगा और आपका यह एहसान चुका दूंगा।”
यह सुनकर राजा शेर जोर-जोर से हंसने लगा। उसने कहा, “तुम इतने छोटे हो और मैं इतना बड़ा। तुम मेरी मदद कैसे कर सकते हो? यह तो मजाक लग रहा है। लेकिन ठीक है, आज मेरा मन अच्छा है, इसलिए मैं तुम्हें जाने दे रहा हूं। लेकिन दोबारा मुझे परेशान मत करना।”
राजा ने अपना पंजा खोल दिया और टिंकू तेजी से भागकर अपने बिल में छिप गया। उसने राहत की सांस ली और मन ही मन राजा का धन्यवाद किया।
कुछ दिन बीत गए। एक दिन दो खतरनाक शिकारी जंगल में आए। उनके पास बड़े-बड़े जाल और रस्सियां थीं। वे जंगल के राजा यानी राजा शेर को पकड़ना चाहते थे। उन्होंने जंगल में कई जगह जाल बिछा दिए और राजा के आने का इंतजार करने लगे।
उस रात जब राजा शेर अपनी गुफा में वापस लौट रहा था, तो वह शिकारियों के जाल में फंस गया। मजबूत रस्सियों ने उसे चारों तरफ से जकड़ लिया था। राजा ने जोर-जोर से गर्जना की और जाल से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं निकल सका। रस्सियां बहुत मजबूत थीं और वह पूरी तरह से फंस चुका था।
राजा की गर्जना पूरे जंगल में गूंजी। टिंकू चूहा अपने बिल में था और उसने यह आवाज सुनी। वह तुरंत समझ गया कि राजा मुसीबत में है। उसे वह दिन याद आ गया जब राजा ने उसकी जान बख्शी थी। टिंकू ने सोचा, “अब मेरे वादे को निभाने का समय आ गया है।”
टिंकू तेजी से उस जगह की ओर दौड़ा जहां से आवाज आ रही थी। जब वह वहां पहुंचा, तो उसने देखा कि राजा शेर रस्सियों में बुरी तरह फंसा हुआ है। राजा ने जब टिंकू को देखा तो उसे थोड़ी उम्मीद हुई।
टिंकू ने कहा, “महाराज, याद है मैंने कहा था कि मैं एक दिन आपकी मदद करूंगा? आज वह दिन आ गया है।”
यह कहकर टिंकू ने अपने तेज दांतों से रस्सियों को काटना शुरू कर दिया। वह बिना रुके लगातार रस्सियों को काटता रहा। उसके छोटे-छोटे दांत बहुत तेज और नुकीले थे। कुछ ही देर में उसने सभी रस्सियों को काट दिया और राजा शेर आजाद हो गया।
राजा शेर बहुत खुश हुआ और उसकी आंखों में कृतज्ञता के आंसू आ गए। उसने कहा, “टिंकू, मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूं। आज तुमने मेरी जान बचाई है। मैंने तुम्हें हल्के में लिया था, लेकिन आज मुझे एहसास हुआ कि आकार से कोई फर्क नहीं पड़ता। दया और मदद कभी बेकार नहीं जाती।”
टिंकू ने मुस्कुराते हुए कहा, “महाराज, यह तो मेरा फर्ज था। आपने मुझे माफ किया था, इसलिए मैं आपकी मदद करना चाहता था।”
उस दिन के बाद राजा शेर और टिंकू चूहा बहुत अच्छे दोस्त बन गए। वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे और साथ में खुशी-खुशी रहते थे। पूरे जंगल में उनकी दोस्ती की कहानी प्रसिद्ध हो गई और सभी जानवरों ने सीखा कि दया और मदद का फल हमेशा मीठा होता है।
दया कभी बेकार नहीं जाती। छोटे से छोटा प्राणी भी कभी बड़े से बड़े प्राणी की मदद कर सकता है। हमें कभी भी किसी को उसके आकार से नहीं आंकना चाहिए।

