सुंदरपुर राज्य के एक छोटे गांव में अर्जुन नाम का चरवाहा रहता था। वह प्रतिदिन अपने पशुओं को जंगल ले जाकर बांसुरी बजाया करता था। उसकी बांसुरी की मधुर धुन सुनकर जानवर भी मंत्रमुग्ध हो जाते थे।
एक दिन एक साथी चरवाहे ने कहा, “अर्जुन, तुम्हारी प्रतिभा अद्भुत है। क्यों न महाराज देवेंद्र के दरबार में अपना हुनर दिखाओ?” अर्जुन मुस्कुराया, “मित्र, जो काम मुझे पसंद है, उसके लिए मैं धन नहीं लेता। मैं और मेरी पत्नी सीता खुश हैं।”
उसी समय राज्य के सैनिक ने घोषणा की कि महाराज देवेंद्र का पालतू सिंह किसी वीर से युद्ध करेगा। विजेता को भारी इनाम मिलेगा। अर्जुन तुरंत तैयार हो गया। जंगल में पहुंचकर उसने एक ही मुक्के में सिंह को धराशायी कर दिया और महाराज की जान बचाई। महाराज ने इनाम देना चाहा, पर अर्जुन ने विनम्रता से मना कर दिया।
कुछ समय बाद राज्य में भयानक संकट आया। महाराज देवेंद्र के विश्वासघाती सेनापति दुर्योधन ने राक्षस से शक्तियां प्राप्त कीं और महाराज पर जादुई तलवार से वार किया। महाराज घायल होकर जंगल में गिर पड़े। दुर्योधन ने स्वयं को राजा घोषित कर प्रजा पर अत्याचार शुरू कर दिए।
एक दिन अर्जुन को तालाब किनारे एक घायल काला हंस मिला, जो मनुष्य की आवाज में बोलता था। अर्जुन ने उसे घर लाकर उसकी सेवा की। धीरे-धीरे हंस स्वस्थ हो गया।
जब प्रजा पर अत्याचार बढ़ने लगे, तो काले हंस ने अर्जुन को बताया कि दुर्योधन को केवल काली गुफा की दैवीय तलवार से ही मारा जा सकता है। वह तलवार सिर्फ वही व्यक्ति प्राप्त कर सकता है जो निर्लोभी, वीर और संतुष्ट हो।
अर्जुन साहस के साथ काली गुफा में गया। वहां एक जादुई आवाज ने उससे सवाल पूछे – क्या उसने शेर को मारा है? क्या उसने धन ठुकराया है? अर्जुन के सच्चे उत्तरों से प्रसन्न होकर दैवीय तलवार प्रकट हो गई।
अर्जुन तलवार लेकर राजमहल पहुंचा और दुर्योधन को युद्ध के लिए ललकारा। भयंकर युद्ध हुआ। अर्जुन ने दैवीय तलवार से प्रहार किया और दुर्योधन राख हो गया। तलवार गायब हो गई।
अचानक काला हंस रोशनी में बदलकर महाराज देवेंद्र बन गया। एक साधु प्रकट हुए और रहस्य खोला – घायल महाराज को बचाने के लिए साधु ने उन्हें काले हंस में बदल दिया था। वे जानते थे कि अर्जुन जैसा निर्लोभी वीर ही दुर्योधन का अंत कर सकता है।
महाराज ने अर्जुन को इनाम देना चाहा, पर अर्जुन ने फिर मना किया। तब महाराज ने कहा, “यह इनाम मैं अपनी बहन सीता को दे रहा हूं।” अर्जुन मुस्कुराकर इनाम ले आया।
इस प्रकार अर्जुन की वीरता और निर्लोभता से राज्य में फिर शांति स्थापित हुई। उसकी सादगी सबके दिलों में बस गई।
असली शक्ति धन में नहीं, बल्कि सच्चाई, संतोष और निर्लोभता में होती है। जो व्यक्ति लालच से मुक्त रहता है, वही सच्चा वीर होता है।

