बहुत समय पहले की बात है, घने हरे-भरे वन में गजराज नाम का एक नन्हा हाथी रहता था। उसकी छोटी-छोटी आंखें हमेशा कुछ नया देखने के लिए उत्सुक रहती थीं और उसका मन प्रश्नों से भरा रहता था। सुबह से शाम तक वह जंगल के हर जानवर से कुछ न कुछ पूछता रहता। “आसमान नीला क्यों है?” “पेड़ इतने ऊंचे कैसे होते हैं?” “चिड़ियां उड़ कैसे सकती हैं?” – ऐसे असंख्य सवाल उसके मन में उमड़ते रहते थे।
गजराज के माता-पिता और जंगल के सभी बड़े जानवर उसकी जिज्ञासा से खुश थे, लेकिन कभी-कभी उसके अंतहीन प्रश्न उन्हें थका भी देते थे। फिर भी सब उसे प्यार से जवाब देते और उसकी सीखने की ललक को बढ़ावा देते थे।
एक सुनहरी सुबह, गजराज अपने दोस्त चिंकू बंदर के साथ खेल रहा था। तभी उसने चिंकू से पूछा, “मगरमच्छ कैसे दिखते हैं? मैंने तो कभी देखा नहीं।” चिंकू ने डरते हुए कहा, “मित्र, मगरमच्छ बहुत खतरनाक होते हैं। उनके बारे में मत पूछो।” लेकिन यह जवाब गजराज के लिए काफी नहीं था। उसकी जिज्ञासा और बढ़ गई।
दोपहर में जब सब जानवर आराम कर रहे थे, गजराज चुपचाप नदी की ओर चल पड़ा। नदी का पानी नीला और चमकीला था। किनारे पर पहुंचकर उसने चारों ओर देखा। तभी उसे एक बड़ा सा लकड़ी का लट्ठा दिखाई दिया जो पानी में तैर रहा था।
“नमस्ते!” गजराज ने आवाज लगाई। “क्या आप जानते हैं कि मगरमच्छ कैसे दिखते हैं?”
उस लट्ठे ने अचानक अपनी आंखें खोल दीं। वह कोई लट्ठा नहीं, बल्कि घातक नामक एक विशाल मगरमच्छ था! उसकी पीली आंखें चमक उठीं और उसने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ पास, मैं तुम्हें दिखाता हूं।”
गजराज भोलेपन से पानी के पास गया। अचानक घातक ने अपना विशाल मुंह खोला और गजराज की सूंड को जोर से पकड़ लिया। गजराज को बहुत दर्द हुआ और वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ! बचाओ! कोई मुझे बचाओ!”
उसकी चीख सुनकर चिंकू बंदर, शेरू शेर, और गुड्डी हिरणी सभी दौड़े-दौड़े आए। शेरू ने अपनी ताकत से मगरमच्छ की पूंछ पकड़ ली, चिंकू ने पत्थर फेंके, और गुड्डी ने अपने तेज खुरों से जमीन खोदकर धूल उड़ाई। सभी ने मिलकर घातक को छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
गजराज की सूंड खींचते-खींचते लंबी हो गई थी, लेकिन वह बच गया। वह रोते हुए अपनी मां के पास गया। मां ने उसे गले लगाया और कहा, “बेटा, जिज्ञासा अच्छी है, लेकिन बिना सोचे-समझे खतरे में नहीं जाना चाहिए।”
उस दिन के बाद गजराज और भी समझदार बन गया। वह अब भी सवाल पूछता था, लेकिन बड़ों की सलाह भी मानने लगा। उसकी लंबी सूंड अब उसकी जिज्ञासा और सीखी हुई सावधानी की निशानी बन गई।
जंगल के सभी जानवर गजराज की कहानी सुनाते और नन्हे बच्चों को सिखाते कि ज्ञान प्राप्त करना अच्छा है, पर सुरक्षा भी जरूरी है।
जिज्ञासु बनना अच्छी बात है, परंतु हर कदम सोच-समझकर उठाना चाहिए। ज्ञान के साथ सावधानी और बुजुर्गों की सलाह जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।

