एक गर्मी की दोपहर में, चुंदू चूहा अपने बिल से बाहर निकला। वह इधर-उधर भोजन की तलाश में घूम रहा था। अचानक उसकी नज़र एक विशाल पीपल के पेड़ के नीचे सो रहे रामू बैल पर पड़ी। रामू बहुत गहरी नींद में था और जोर-जोर से खर्राटे ले रहा था।
चुंदू को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने कभी इतना बड़ा जानवर नहीं देखा था। रामू के विशाल शरीर को देखकर वह हैरान रह गया। “अरे वाह! कितना बड़ा है यह,” चुंदू ने मन में सोचा। उसकी उत्सुकता बढ़ती गई और वह धीरे-धीरे रामू के पास पहुंचा।
रामू के खर्राटों की आवाज से चुंदू और भी उत्सुक हो गया। वह रामू के बड़े-बड़े नथुनों को देखकर आश्चर्यचकित हो गया। “वाह! कितने बड़े नथुने हैं इसके,” चुंदू ने खुशी से कहा। उसके मन में शरारत सूझी और उसने सोचा कि क्यों न मज़ाक के लिए इन नथुनों के अंदर जाकर देखा जाए।
चुंदू ने हिम्मत जुटाई और रामू के एक नथुने में घुस गया। अंदर का दृश्य देखकर वह हैरान रह गया। फिर वह मज़े से बाहर आ गया और दूसरे नथुने में घुस गया। यह सब उसे बहुत मजेदार लग रहा था।
अचानक रामू की नींद टूट गई। नथुने में खुजली और परेशानी महसूस होने से वह दर्द से चिल्लाया। “अरे! क्या हो रहा है? कौन है यहां?” रामू ने गुस्से से कहा।
चुंदू यह देखकर डर गया और तुरंत बाहर निकलकर भागना शुरू कर दिया। उसका छोटा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। रामू ने जब चुंदू को भागते देखा तो समझ गया कि यही है वह शरारती जो उसकी नींद खराब की है।
रामू गुस्से से लाल-पीला हो गया और चुंदू का पीछा करने लगा। उसके भारी पैरों की आवाज से धरती कांप रही थी। “रुक जा, शरारती चूहे! मैं तुझे सबक सिखाऊंगा,” रामू चिल्लाया।
चुंदू जल्दी से अपने बिल में घुस गया। रामू भी वहां पहुंचा लेकिन बिल बहुत छोटा था और वह अंदर नहीं जा सकता था। वह और भी गुस्साया।
“निकल बाहर, कायर चूहे! तूने मेरे साथ शरारत की है,” रामू गरजा।
“माफ करो, रामू भैया! मैंने तो सिर्फ मज़ाक के लिए ऐसा किया था,” चुंदू ने डरते हुए कहा।
लेकिन रामू का गुस्सा कम नहीं हुआ। उसने सोचा कि वह दीवार तोड़कर चुंदू को पकड़ लेगा। उसने अपना सिर दीवार पर जोर-जोर से मारना शुरू कर दिया। “धम्म! धम्म!” की आवाज आने लगी।
रामू लगातार सिर मारता रहा लेकिन दीवार में कोई खरोंच तक नहीं आई। उसका सिर दर्द करने लगा और वह थक गया। फिर भी वह हार नहीं मान रहा था।
चुंदू यह सब देखकर बोला, “अरे मूर्ख रामू! सिर्फ इसलिए कि तुम बड़े और मजबूत हो, इसका मतलब यह नहीं कि तुम सब कुछ कर सकते हो। अपना सिर फोड़ना बंद करो और यहां से चले जाओ।”
रामू को अचानक अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे समझ आ गया कि केवल ताकत से सब कुछ नहीं होता। कभी-कभी छोटे से दिखने वाले काम भी बड़ी समस्या बन जाते हैं और बुद्धि का उपयोग करना जरूरी होता है। वह शर्म से सिर झुकाकर चुपचाप वहां से चला गया।
शक्ति हमेशा सही नहीं होती। बुद्धि और धैर्य, शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
