माधव एक छोटे से गांव में रहता था। एक दिन वह बाल कटाने के लिए गांव के एकमात्र नाई बिरजू के पास गया।
“भाई, मेरे बाल काट दो,” माधव ने कहा।
“बैठ जाओ, लेकिन ₹150 लूंगा,” बिरजू ने जवाब दिया।
माधव हैरान हो गया, “क्या? ₹150? तुम तो पहले ₹50 में काटते थे!”
“अब ₹150 लूंगा। कटाने हैं तो कटाओ, नहीं तो जाओ,” बिरजू ने घमंड से कहा।
माधव के पास कोई विकल्प नहीं था क्योंकि गांव में केवल यही एक सैलून था। मजबूरी में उसने ₹150 दे दिए। घर वापस जाकर उसने अपनी पत्नी रेखा से सारी बात बताई।
“₹150? यह तो बहुत ज्यादा है! अब क्या करेंगे?” रेखा चिंतित हुई।
“मैं खुद ही बाल काटना सीख जाऊंगा,” माधव ने फैसला किया।
अगले दिन से माधव रोज बिरजू के सैलून के बाहर खड़े होकर उसकी तकनीक देखने लगा। कुछ दिन बाद उसे लगा कि अब वह बाल काट सकता है।
एक दिन उसे एक शराबी आदमी मिला। माधव ने उससे कहा, “भाई, मैं तुम्हारे बाल मुफ्त में काट दूंगा।”
शराबी खुश हो गया और बैठ गया। माधव ने उसके सारे बाल काट दिए, उसे गंजा बना दिया। अगली सुबह जब शराबी का नशा उतरा तो वह गुस्से से माधव को ढूंढने लगा।
इधर माधव ने अपना सैलून खोल लिया। पहला ग्राहक आया और शाहरुख खान जैसे बाल कटाने को कहा। माधव ने अजीब तरीके से उसके बाल काटे। ग्राहक गुस्से में माधव को पीटकर चला गया।
दूसरा ग्राहक आया और अक्षय कुमार जैसे बाल मांगे। माधव ने फिर गलत तरीके से काटे और वह भी उसे पीटकर चला गया।
जल्द ही गांव में माधव के बुरे काम की खबर फैल गई। कोई भी उसके सैलून नहीं आने लगा। वह शराबी भी आया और माधव को पीटा।
निराश होकर माधव ने सैलून बंद करने का फैसला किया। जब वह बोर्ड उतार रहा था तो वही पहला ग्राहक आया।
“माधव भाई, आपका बहुत धन्यवाद!” उसने कहा।
“क्यों भाई?” माधव डरते हुए पूछा।
“आपकी कटिंग की वजह से मेरी शादी हो गई। लड़की वालों को मेरा अनोखा स्टाइल पसंद आया।”
तभी दूसरा ग्राहक भी आया, “माधव भाई, आपके कारण मेरी पत्नी घर छोड़कर चली गई। अब मैं आजाद हूं। धन्यवाद!”
दोनों ने माधव को पैसे दिए। जल्द ही और लोग आने लगे। सभी को माधव के अनोखे स्टाइल पसंद आने लगे।
कुछ ही दिनों में माधव का सैलून बहुत प्रसिद्ध हो गया। लोग दूर-दूर से आने लगे। बिरजू का सैलून बंद हो गया।
जीवन में असफलता अक्सर सफलता का रास्ता दिखाती है। जो चीज़ें हमें नकारात्मक लगती हैं, वही कभी-कभी हमारी सबसे बड़ी ताकत बन जाती हैं।

