बहुत समय पहले एक गाँव में एक चोर रहता था। वह अक्सर गाँव में जाकर लोगों का सामान चुरा लेता था। एक दिन मंदिर के पास से गुजरते समय उसकी नजर एक सुंदर घंटी पर पड़ी। उसने उत्साह से घंटी को पकड़ लिया और सोचने लगा कि इसे बेचकर वह कितने पैसे कमा सकता है।
“अरे वाह! यह तो अच्छी कीमत में बिकेगी,” चोर ने खुशी से कहा।
जैसे ही चोर ने घंटी पकड़ी, पास के पेड़ के नीचे आराम कर रहे एक बाघ ने घंटी की आवाज सुनी। “यह क्या आवाज है? मुझे देखना चाहिए,” बाघ ने सोचा।
“अरे नहीं! बाघ! कृपया मुझे मत मारो!” चोर चिल्लाया।
बाघ तुरंत झपटा और चोर को मार डाला। घंटी जमीन पर गिर गई। कुछ समय बाद जब बाघ चला गया, तो बंदरों का एक झुंड जंगल से गुजर रहा था।
उत्सुकता से उन्होंने उस चमकीली चीज को देखा। “यह क्या चमकदार चीज है?” एक बंदर ने पूछा।
“यह घंटी है! चलो इसे अपने साथ ले चलते हैं,” दूसरे ने कहा।
बंदरों ने खुशी से घंटी उठाई और अपने साथ ले गए। “चलो इससे खेलते हैं!” वे सभी बंदर घंटी के साथ खेलने लगे।
घंटी की आवाज से पूरा जंगल गूंज रहा था। गाँव के लोगों ने यह अजीब आवाज सुनी तो डर गए।
“जंगल से यह कैसी अजीब और डरावनी आवाज आ रही है?” लोग परेशान हो गए।
“शायद कोई बुरी आत्मा है जो लोगों को मारती है और घंटी बजाकर खुशी मनाती है,” कुछ लोगों ने कहा।
गाँव में एक बहादुर महिला रहती थी। उसने कहा, “मैं इस बुरी आत्मा की बात पर विश्वास नहीं करती। मैं सच्चाई का पता लगाऊंगी।” उस साहसी महिला ने रात के समय जंगल में जाने का फैसला किया।
“हमारे गाँव में क्या हो रहा है?” राजा ने पूछा।
महिला ने कहा, “महाराज, मैं इस रहस्य को सुलझाने में मदद कर सकती हूँ और हमारे गाँव में खुशी वापस ला सकती हूँ।”
“तुम यह कैसे कर सकती हो?” राजा ने पूछा।
“महाराज, यदि आप मुझे कुछ पैसे दे दें तो मैं इस समस्या का समाधान कर दूंगी।” महिला ने कहा।
“ठीक है, मैं तुम्हें पैसे दूंगा और यदि तुम सफल हो गईं तो इनाम भी दूंगा।” राजा ने कहा।
महिला ने मटर, बादाम और फल लाए और पेड़ के नीचे बैठकर प्रार्थना की। “मैं इन्हें बंदरों को लुभाने के लिए इस्तेमाल करूंगी। कृपया हमारे गाँव में शांति वापस लाने में मेरी मदद करें।”
प्रार्थना के बाद महिला उठी, फल और मेवे लेकर साहस से जंगल में गई। रात और गहरी होती जा रही थी। उसने खाना जमीन पर रखा और पेड़ के पीछे छुप गई।
बंदरों ने खाना देखा तो खुशी से चिल्लाए, “देखो कितना स्वादिष्ट खाना है! चलो घंटी को छोड़कर यह खाना उठा लेते हैं।”
शरारती बंदरों ने इतना स्वादिष्ट खाना देखकर घंटी छोड़ दी और खाना उठा लिया।
महिला ने मौका देखकर घंटी उठाई और तुरंत गाँव वापस भागी। उसने घंटी राजा को दी।
“तुमने घंटी वापस ला दी! तुमने यह कैसे किया?” राजा ने पूछा।
“महाराज, यह शरारती बंदर थे जो घंटी के साथ खेल रहे थे। मैंने एक योजना बनाकर उन्हें मात दी और घंटी वापस ले आई।” महिला ने बताया।
“बहुत अच्छा! तुम्हारी बहादुरी और बुद्धिमानी ने हमारे गाँव को बचाया है।” राजा ने प्रशंसा की।
गाँववालों ने साहसी महिला की प्रशंसा की। “वह सच में बहादुर है। हम भाग्यशाली हैं कि वह हमारे बीच है।”
राजा ने महिला को सोने के सिक्कों से भरा थैला दिया। महिला इनाम पाकर बहुत खुश हुई।
इस घटना के बाद गाँव में शांति वापस आ गई। साहसी महिला को पूरे गाँव में सम्मान मिला।
छोटी-छोटी बातों से डरना नहीं चाहिए। बुद्धिमानी और साहस से हर मुश्किल को जीता जा सकता है।

