एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में फिन नाम का एक दयालु व्यक्ति रहता था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। एक दिन जब वह नदी के किनारे टहल रहा था, तो उसने एक भिखारी को देखा जो बहुत परेशान लग रहा था।
भिखारी गंदे कपड़े पहने हुए था और उसका चेहरा उदास था। वह अपने हाथों में एक पुराना जाल लिए हुए था। फिन ने देखा कि भिखारी नदी के किनारे बैठकर सिर्फ दुखी हो रहा था, कोई काम नहीं कर रहा था।
फिन ने उससे पूछा, “भाई, तुम इतने परेशान क्यों लग रहे हो? क्या बात है?”
भिखारी ने जवाब दिया, “साहब, मैं बहुत गरीब हूँ। मुझे खाना नहीं मिल रहा। मैं हर दिन भीख माँगता हूँ लेकिन कभी-कभी कुछ नहीं मिलता। मेरे पास यह जाल है लेकिन मैं मछली पकड़ना नहीं जानता।”
फिन ने समझदारी से कहा, “देखो भाई, अगर तुम सिर्फ भीख माँगते रहोगे तो हमेशा गरीब ही रहोगे। क्यों न तुम मछली पकड़ने की कोशिश करो? मैं तुम्हें सिखा सकता हूँ।”
भिखारी ने झिझकते हुए कहा, “लेकिन साहब, यह बहुत मुश्किल काम है। मुझसे नहीं होगा।”
फिन ने धैर्य से समझाया, “कुछ भी मुश्किल नहीं है अगर तुम मेहनत करो। पहले तुम्हें धैर्य रखना होगा।” उसने भिखारी को जाल फेंकने का सही तरीका सिखाया।
भिखारी ने जाल को नदी में फेंका और किनारे पर बेचैनी से इधर-उधर टहलने लगा। वह बार-बार जाल को खींचने की कोशिश कर रहा था।
फिन ने उसे शांत करते हुए कहा, “अरे भाई, आराम से। धैर्य रखो। आओ, मेरे साथ बैठो। क्या तुम यह काम रोज करते हो? क्या तुम्हें इतनी मेहनत करके और इतना इंतजार करके गुस्सा नहीं आता?”
भिखारी ने मुस्कराते हुए जवाب दिया, “हाहा। नहीं मेरे दोस्त। मैं अपनी पूरी कोशिश करता हूँ और हर दिन धैर्य से इंतजार करता हूँ। जो इनाम और संतुष्टि मुझे बाद में मिलती है, वह इन सब कष्टों के लायक है।”
अचानक फिन ने कहा, “अरे देखो! अब तुम अपना जाल वापस किनारे पर खींच सकते हो।”
भिखारी खुशी से उछलकर अपना जाल अपनी तरफ खींचने लगा। जब उसने जाल देखा तो वह हैरान रह गया। जाल में दर्जनों स्वस्थ मछलियाँ भरी हुई थीं।
फिन ने कहा, “यही है वह इनाम जिसका तुमने इतने धैर्य से इंतजार किया। अब तुम बाज़ार जाकर इन्हें बेचकर कुछ पैसे कमा सकते हो। अब तुम्हें भीख माँगने की ज़रूरत नहीं है, बशर्ते तुम अपने लिए मेहनत करो और आलसी न बनो।”
भिखारी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने कहा, “ओ दयालु इंसान! अब मुझे पूरी बात समझ में आ गई है। इतना महत्वपूर्ण सबक सिखाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”
फिन ने मुस्कराते हुए कहा, “वाह, यह एक शानदार कहानी थी। मुझे लगता है कि मैंने अपनी आलस को अपने धैर्य और मेहनत करने की क्षमता पर हावी हो जाने दिया था। शाबाश बेटे, तुम कर सकते हो।”
इस तरह भिखारी ने सीखा कि मेहनत, धैर्य और लगन से कोई भी व्यक्ति अपनी स्थिति को बदल सकता है। उसने भीख माँगना छोड़ दिया और एक मेहनती मछुआरा बन गया।
मेहनत, धैर्य और लगन से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है। आलस्य छोड़कर काम करने से ही सफलता मिलती है।

