एक शांत गली में एक छोटा सा सुंदर घर था। इस घर में दीवार पर एक चमकदार आईना टंगा हुआ था और उसके पास ही एक मेज पर एक छोटा सा साधारण दीपक रखा था। आईना अपनी चमकदार सतह पर बहुत गर्व करता था और हमेशा अपनी इस खूबी की तारीफ करता था कि वह हर चीज को बिल्कुल सही तरीके से दिखा सकता है।
रोज सुबह जब सूरज की पहली किरण घर में आती, तो आईना अपने आप में खुश हो जाता। वह अपनी चमकदार सतह में कमरे की हर चीज को देखता – सुंदर फर्नीचर, रंग-बिरंगे फूल, और घर की हर खूबसूरत चीज। आईना सोचता था कि वह इस घर की सबसे जरूरी और सबसे खूबसूरत चीज है।
एक दिन आईने ने दीपक की तरफ देखा और घमंड से कहा, “मैं तुमसे कहीं ज्यादा उपयोगी हूं। मैं पूरे कमरे को दिखाता हूं और हर चीज को खूबसूरत बनाता हूं। बताओ, तुम क्या कर सकते हो जो मेरी बराबरी करे?”
दीपक, जो हमेशा से विनम्र और शांत था, धीरे से बोला, “हो सकता है कि मैं तुम्हारी तरह सुंदर न हूं, लेकिन जब अंधेरा होता है तो मैं कमरे में रोशनी लाता हूं। मेरे बिना अंधेरे में कोई भी स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता, यहां तक कि तुम्हारे प्रतिबिंब भी नहीं।”
आईने ने हंसकर कहा, “तुम सिर्फ अंधेरे में ही काम आते हो! दिन के समय तो सभी मेरी तारीफ करते हैं और मुझे निहारते हैं।”
दीपक चुपचाप अपनी जगह पर बैठा रहा। वह जानता था कि बहस करने से कोई फायदा नहीं होगा। वह सिर्फ अपना समय आने का इंतजार करता रहा।
जैसे-जैसे दिन बीतता गया, आईना अपनी महत्ता के बारे में और भी ज्यादा सोचने लगा। वह सोचता था कि दीपक तो बस एक साधारण सी चीज है, जबकि वह तो पूरे घर की शान है।
फिर शाम का समय आया। धीरे-धीरे सूरज डूबने लगा और घर में अंधेरा छाने लगा। जैसे ही कमरा पूरी तरह से अंधकार में डूब गया, आईना बिल्कुल अदृश्य हो गया। अब कोई भी उसके प्रतिबिंब नहीं देख सकता था। आईना एहसास करने लगा कि अंधेरे में उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है।
तभी अचानक दीपक जल उठा। उसकी गर्म और आरामदायक रोशनी से पूरा कमरा भर गया। दीपक की मधुर रोशनी में अब आईना फिर से दिखाई देने लगा। घर के लोग दीपक की रोशनी की वजह से अब आराम से काम कर सकते थे।
दीपक ने आईने की तरफ मुड़कर प्यार से कहा, “देखो मित्र, हो सकता है कि तुम दिन के समय चमकते रहो, लेकिन जब संसार में अंधेरा छाता है, तब मेरी जरूरत होती है। हम दोनों का अपना-अपना समय है और अपना-अपना महत्व है।”
आईना को अब अहसास हुआ कि वह कितना गलत था। उसे दीपक के प्रकाश के महत्व का एहसास हुआ। आईने ने शर्मिंदगी से कहा, “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, मित्र। मैंने अपने घमंड में तुम्हारी अहमियत को नहीं समझा। हम दोनों के अपने-अपने काम हैं। तुम अंधेरे में रोशनी लाते हो, और मैं दिन में सुंदरता दिखाता हूं। साथ मिलकर हम इस घर को सच में खूबसूरत बनाते हैं।”
उस दिन के बाद से आईना और दीपक ने एक-दूसरे का सम्मान करना सीखा। वे समझ गए कि हर किसी की अपनी खासियत होती है और सभी का अपना महत्व होता है। आईना दिन में घर की खूबसूरती बढ़ाता था, और दीपक रात में रोशनी से घर को गर्मजोशी से भर देता था।
घर के लोग भी खुश थे क्योंकि अब आईना और दीपक मिलकर उनके घर को दिन-रात सुंदर बनाते थे। दोनों मित्र बन गए और हमेशा एक-दूसरे की मदद करते रहे।
हर व्यक्ति में अपनी अलग क्षमता और महत्व होता है। जब हम मिलकर काम करते हैं, तो हम सभी के गुण और भी निखर कर आते हैं।

