बहुत समय पहले की बात है, एक समुद्र के किनारे एक बूढ़ा मछुआरा और उसकी पत्नी रहते थे। वे दोनों एक छोटी सी झोपड़ी में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। मछुआरा प्रतिदिन समुद्र में जाकर अपने जाल से मछलियाँ पकड़ता था और उसकी पत्नी धागा कातने का काम करती थी। इस प्रकार वे दोनों अपना गुजारा चलाते थे।
एक दिन मछुआरा अपने जाल के साथ समुद्र के किनारे गया। उसने जाल को पानी में फेंका और फिर उसे खींचा। परंतु जाल में केवल कीचड़ के अलावा कुछ भी नहीं था। दूसरी बार जाल डालने पर उसमें केवल घास-फूस आया। तीसरी बार जब उसने जाल खींचा तो उसमें एक सुनहरी मछली फंसी हुई थी।
मछुआरा इस सुंदर सुनहरी मछली को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। लेकिन जब वह उसे छूने के लिए आगे बढ़ा तो अचानक मछली बोल पड़ी, “हे दयालु बुजुर्ग! कृपया मुझे छोड़ दीजिए और जाने दीजिए। मैं वादा करती हूँ कि आप जो भी मांगेंगे, मैं आपको वह सब कुछ दूंगी।”
मछुआरा इस बात को सुनकर अत्यंत आश्चर्यचकित हुआ। उसने मछली से विनम्रता के साथ कहा, “हे मछली रानी! मैं केवल इतना चाहता हूँ कि मेरी बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाएं और मैं थोड़ा धनवान बन जाऊं।”
इसके बाद उसने मछली को मुक्त कर दिया और घर की ओर चल पड़ा। जब वह घर पहुंचा तो देखकर दंग रह गया। उसकी पुरानी झोपड़ी के स्थान पर एक भव्य महल खड़ा था जिसमें सभी आधुनिक सुविधाएं थीं। उसने अपनी पत्नी को सारी बात बताई।
लेकिन उसकी पत्नी बहुत लालची थी। वह इन सब चीजों से संतुष्ट नहीं हुई। उसने अपने पति से कहा कि वह मछली के पास जाकर और भी ज्यादा चीजों की मांग करे।
बेचारा बूढ़ा मछुआरा कांपते हुए कदमों से समुद्र के किनारे गया। आँखों में आंसू लिए हुए उसने फिर से उस सुनहरी मछली को पुकारा। मछली तुरंत प्रकट हुई और बोली, “बताइए हे दयालु बुजुर्ग, आप क्या चाहते हैं?”
बूढ़ा मछुआरा कई बार अपनी पत्नी की बात कहने की कोशिश करता रहा लेकिन वह हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। मछली ने फिर से प्रेम से कहा, “हे भले इंसान! झिझक मत करिए, बताइए आप क्या चाहते हैं?”
मछुआरे ने कहा, “मैं कुछ नहीं चाहता, लेकिन मेरी लालची पत्नी ने मुझे फिर से आपके पास भेजा है। वह चाहती है कि वह सभी समुद्रों की महारानी बन जाए और आप उसकी दासी बनकर उसकी सेवा करें।”
यह सुनकर मछली ने कुछ भी उत्तर नहीं दिया। उसने अपनी पूंछ से पानी पर जोर से मारा और समुद्र की गहराई में गायब हो गई।
बूढ़ा मछुआरा धीमे-धीमे कदमों से घर की ओर लौटा। जब वह घर पहुंचा तो देखकर हैरान रह गया। उसकी पत्नी वापस उसी पुरानी झोपड़ी के सामने बैठी हुई थी और उसके पास वही पुराने टूटे हुए बर्तन थे। सब कुछ पहले जैसा हो गया था। लालच का फल हमेशा कड़वा होता है। संतुष्टि ही सच्ची खुशी का आधार है ।

