बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल में काली नामक एक कौआ रहता था। काली एक साधारण कौआ था, जो पूरे दिन जंगल में इधर-उधर उड़ता रहता था और अपने भोजन की तलाश में रहता था। उसकी आवाज़ बहुत कर्कश थी, लेकिन वह खुद को जंगल का सबसे अच्छा गायक मानता था। काली को अपनी आवाज़ पर बहुत घमंड था और वह हमेशा सोचता था कि उसकी आवाज़ बुलबुल से भी मधुर है।
एक सुबह की बात है, काली अपने घोंसले से निकला और भोजन की तलाश में जंगल के बाहर एक गाँव की ओर उड़ चला। गाँव में एक छोटी सी दुकान थी, जहाँ मांस बेचा जाता था। काली की नज़र एक बड़े और रसीले मांस के टुकड़े पर पड़ी, जो दुकान के बाहर रखा हुआ था। दुकानदार किसी ग्राहक से बात करने में व्यस्त था और उसका ध्यान मांस पर नहीं था। काली ने यह सुनहरा अवसर देखा और तुरंत नीचे उतरकर मांस के उस बड़े टुकड़े को अपनी चोंच में दबा लिया और तेज़ी से उड़ गया।
दुकानदार ने देखा तो चिल्लाया, लेकिन तब तक काली बहुत दूर उड़ चुका था। काली बहुत खुश था। वह सोच रहा था कि आज उसे कितना अच्छा भोजन मिला है। वह एक ऊँचे पेड़ की शाखा पर जाकर बैठ गया और सोचने लगा कि इस स्वादिष्ट मांस को कैसे खाया जाए। मांस का टुकड़ा इतना बड़ा था कि वह उसे एक बार में नहीं खा सकता था। काली ने सोचा कि पहले वह थोड़ा आराम करेगा और फिर आराम से इस दावत का आनंद लेगा।
उसी समय, जंगल में रोमी नामक एक चालाक लोमड़ी घूम रही थी। रोमी पिछले दो दिनों से भूखी थी और उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला था। वह थकी-हारी इधर-उधर भटक रही थी और भोजन की तलाश में थी। अचानक उसकी नज़र ऊपर पेड़ की शाखा पर बैठे काली पर पड़ी और उसने देखा कि काली की चोंच में मांस का एक बड़ा टुकड़ा है।
रोमी की आँखें चमक उठीं। उसके मुंह में पानी आ गया। लेकिन वह जानती थी कि काली इतनी ऊंचाई पर बैठा है और मांस को इतनी मजबूती से पकड़े हुए है कि उसे छीनना असंभव है। रोमी ने सोचा कि उसे कोई चालाकी करनी होगी। वह बहुत चालाक थी और उसे पता था कि काली को अपनी आवाज़ पर बहुत घमंड है।
रोमी ने एक योजना बनाई। वह पेड़ के नीचे जाकर खड़ी हो गई और बहुत ही मीठी आवाज़ में बोली, “अरे वाह! यह कौन है? क्या यह महान काली जी हैं? आप कितने सुंदर दिख रहे हैं आज!”
काली ने नीचे देखा और रोमी को देखा। उसे रोमी की तारीफ़ सुनकर बहुत अच्छा लगा, लेकिन वह चुप रहा क्योंकि उसकी चोंच में मांस का टुकड़ा था।
रोमी ने अपनी बात जारी रखी, “काली जी, आप तो जंगल के सबसे सुंदर पक्षी हैं। आपके काले पंख इतने चमकदार हैं कि सूरज की रोशनी भी उनके सामने फीकी पड़ जाती है। आपकी चोंच इतनी मजबूत है और आपके पंजे इतने ताकतवर हैं। सच में, आप तो किसी राजा से कम नहीं हैं!”
काली को रोमी की बातें सुनकर बहुत गर्व महसूस हुआ। उसका सीना फूलने लगा और वह खुशी से फड़फड़ाने लगा। लेकिन फिर भी वह चुप रहा।
रोमी ने देखा कि उसकी योजना काम कर रही है। उसने अपनी चाल को और आगे बढ़ाया। उसने कहा, “काली जी, मैंने सुना है कि आपकी आवाज़ बहुत ही मधुर है। लोग कहते हैं कि आपकी आवाज़ कोयल से भी ज़्यादा मीठी है। जंगल के सभी पक्षी आपकी आवाज़ की तारीफ़ करते हैं। लेकिन मैंने तो कभी आपका गाना नहीं सुना। क्या आप मेरे लिए एक गाना गा सकते हैं? मैं तो आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ!”
काली को यह सुनकर और भी ज़्यादा खुशी हुई। उसने सोचा, “वाह! रोमी मेरी इतनी तारीफ़ कर रही है और मेरा गाना सुनना चाहती है। मुझे ज़रूर उसके लिए गाना चाहिए। आखिर मैं जंगल का सबसे अच्छा गायक हूँ!”
रोमी ने फिर से कहा, “प्लीज काली जी, बस एक छोटा सा गाना। मैं आपकी मधुर आवाज़ सुनने के लिए बहुत उत्सुक हूँ। आप इतने प्रतिभाशाली हैं, कृपया मुझे निराश मत कीजिए।”
काली अब और नहीं रुक सका। उसका घमंड इतना बढ़ गया था कि उसे कुछ भी याद नहीं रहा। वह भूल गया कि उसकी चोंच में मांस का टुकड़ा है। उसने अपनी चोंच खोली और ज़ोर से “काँव-काँव” करने लगा।
जैसे ही काली ने अपनी चोंच खोली, मांस का बड़ा टुकड़ा नीचे गिर गया। रोमी यही तो चाहती थी! उसने तुरंत मांस के टुकड़े को अपने मुंह में दबाया और खुशी से अपनी पूंछ हिलाने लगी।
काली को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह बहुत दुखी हो गया और चिल्लाया, “रुको! यह मेरा मांस है! तुमने मुझे धोखा दिया!”
रोमी ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद काली जी, आपकी आवाज़ वाकई बहुत… अनोखी है! लेकिन अगली बार याद रखना कि जब कोई आपकी इतनी तारीफ़ करे, तो समझ जाना कि वह कुछ चाहता है। तारीफ़ सुनकर अपना दिमाग़ मत खोना। अलविदा!” और यह कहकर रोमी मांस लेकर जंगल में गायब हो गई।
काली पेड़ पर बैठा रह गया, दुखी और शर्मिंदा। उसे अपनी मूर्खता पर बहुत पछतावा हुआ। वह समझ गया कि उसके घमंड और मूर्खता के कारण उसने अपना कीमती भोजन खो दिया।
उस दिन से काली ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा कि झूठी तारीफ़ों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए और घमंड हमेशा नुकसान पहुंचाता है।
झूठी प्रशंसा और चापलूसी पर विश्वास करना खतरनाक होता है। घमंड और मूर्खता हमें बड़े नुकसान में डाल सकती है। हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए और किसी की बातों में आकर अपना विवेक नहीं खोना चाहिए।

