एक घने जंगल में एक विशाल बरगद का पेड़ था। इस पेड़ पर दो चिड़ियों के घोंसले थे। एक चिड़िया का नाम था चंचल और दूसरी का नाम था सुस्ती। चंचल बहुत ही मेहनती और सतर्क चिड़िया थी, जबकि सुस्ती को हमेशा आराम करना और टाल-मटोल करना पसंद था। दोनों चिड़ियों के छोटे-छोटे प्यारे बच्चे थे जो अभी उड़ना सीख रहे थे।
एक सुबह, जब चंचल अपने बच्चों के लिए दाना लेकर आई, तो उसने देखा कि पेड़ के नीचे एक हरी बेल उगने लगी है। वह बेल धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रही थी। चंचल को यह देखकर चिंता हुई क्योंकि वह जानती थी कि अगर यह बेल उनके घोंसले तक पहुंच गई, तो सांप इस बेल के सहारे चढ़कर उनके बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
चंचल तुरंत अपनी पड़ोसी सुस्ती के पास गई और बोली, “सुस्ती बहन, तुमने देखा? नीचे एक बेल उग आई है। यह बहुत खतरनाक है। अगर यह बेल ऊपर तक आ गई, तो सांप हमारे बच्चों तक पहुंच सकते हैं। हमें मिलकर इस बेल को काटना होगा।”
सुस्ती ने आलस्य से आंखें खोलीं और बोली, “अरे चंचल, तुम व्यर्थ में परेशान हो रही हो। अभी तो बेल बहुत नीचे है। अभी-अभी तो मैंने नाश्ता किया है, थोड़ा आराम कर लेने दो। फिर देखेंगे।” यह कहकर सुस्ती फिर से सो गई।
चंचल निराश होकर वापस अपने घोंसले में चली गई। उसने सोचा कि शायद कल सुस्ती उसकी बात समझ जाएगी। अगले दिन चंचल ने देखा कि बेल और ऊपर चढ़ गई थी। अब वह पेड़ के तने पर लिपट रही थी और तेजी से बढ़ रही थी।
चंचल फिर से सुस्ती के पास गई और बोली, “सुस्ती, देखो! बेल और ऊपर आ गई है। अब हमें तुरंत कुछ करना होगा। यह बेल बहुत तेजी से बढ़ रही है।”
सुस्ती ने एक नजर नीचे देखा और फिर उदासीनता से बोली, “हां, मैंने देखा। लेकिन अभी भी काफी दूर है। आज मौसम इतना सुहावना है कि मन नहीं कर रहा कुछ करने का। कल पक्का काट देंगे।” और वह फिर से अपनी मस्ती में लग गई।
चंचल बहुत चिंतित थी, लेकिन वह अकेले बेल को नहीं काट सकती थी। उसे सुस्ती की मदद की जरूरत थी। कुछ और दिन बीत गए। बेल अब पेड़ के बीच तक पहुंच गई थी। उसकी हरी पत्तियां और डालियां पूरे तने को ढक रही थीं।
चंचल अब बहुत डर गई थी। वह फिर से सुस्ती के पास गई और विनती करते हुए बोली, “सुस्ती, अब तो यह बहुत गंभीर हो गया है। बेल आधे पेड़ तक आ गई है। कृपया अब तो चलो और इसे काटने में मेरी मदद करो। हमारे बच्चों की जान खतरे में है।”
सुस्ती ने जम्हाई लेते हुए कहा, “चंचल, तुम बेकार में इतना परेशान क्यों हो रही हो? अभी तो यह हमारे घोंसलों से बहुत दूर है। मैं अभी-अभी चने खाकर आई हूं, पेट भरा है। थोड़ा आराम कर लूं, फिर शाम को देखते हैं।” यह कहकर सुस्ती ने अपनी आंखें बंद कर लीं।
चंचल निराश होकर वापस चली गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि सुस्ती को कैसे समझाए। दिन बीतते गए और बेल बढ़ती रही। एक सुबह जब चंचल की नींद खुली, तो उसने देखा कि बेल उनके घोंसलों के बिल्कुल पास तक आ गई थी। अब खतरा बहुत करीब था।
चंचल घबरा गई और सुस्ती के पास दौड़ी। “सुस्ती! सुस्ती! उठो! बेल हमारे घोंसलों तक आ गई है। अब बहुत देर हो चुकी है। हमें तुरंत यहां से जाना होगा!”
सुस्ती ने आंखें खोलीं और जब उसने बेल को अपने घोंसले के पास देखा, तो वह भी डर गई। “अरे! यह तो सचमुच हमारे पास आ गई। अब क्या करें?”
चंचल ने कहा, “अब बेल काटने का समय नहीं रहा। यह पेड़ अब हमारे और हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है। किसी भी समय सांप इस बेल के सहारे चढ़कर हमारे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है। हमें तुरंत इस पेड़ को छोड़कर कहीं और जाना होगा।”
चंचल ने अपने परिवार के साथ उसी दिन वह पेड़ छोड़ने का फैसला कर लिया। उसने अपने बच्चों को साथ लिया और एक सुरक्षित पेड़ की तलाश में निकल पड़ी। उसे अपना प्रिय घोंसला छोड़ना पड़ा, लेकिन उसने अपने बच्चों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया।
सुस्ती भी डर गई थी और उसे भी अपना घोंसला छोड़ना पड़ा। लेकिन अब उसे अपने आलस्य का अहसास हो गया था। अगर उसने चंचल की बात पहले सुन ली होती और समय रहते बेल को काट दिया होता, तो उन्हें अपना प्यारा घर नहीं छोड़ना पड़ता।
सुस्ती को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने चंचल से कहा, “मुझे माफ कर दो चंचल। मेरे आलस्य की वजह से हम दोनों को अपना घर छोड़ना पड़ा। आज मैंने सीखा कि समय रहते काम करना कितना जरूरी है।”
चंचल ने सुस्ती को समझाया, “सुस्ती, जीवन में जो भी खतरा दिखाई दे, उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। छोटी समस्याओं को टालने से वे बड़ी समस्या बन जाती हैं।”
दोनों चिड़ियों ने एक नए पेड़ पर अपने घोंसले बनाए। सुस्ती ने अपने आलस्य को छोड़ दिया और अब वह भी चंचल की तरह सतर्क रहने लगी। उस दिन से सुस्ती ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा कि आलस्य और टाल-मटोल करना बहुत बड़ी मुसीबत बन सकता है।
आलस्य और टाल-मटोल करना जीवन में बड़ी समस्याएं पैदा करता है। समय रहते समस्याओं का समाधान करना जरूरी है, नहीं तो छोटी समस्याएं बड़ी मुसीबत बन जाती हैं। सतर्कता और मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

