गांव के गरीब किसान रामप्रसाद का जीवन संघर्षों से भरा था। पत्नी और दो बच्चों के साथ वह मुश्किल से गुजारा करता था। एक दिन उसके पुराने मित्र धनराज सेठ उसके घर आए।
“रामप्रसाद भाई, कितने दिन बाद तुम्हारे घर आया हूं,” धनराज सेठ ने खुशी से कहा।
“आइए सेठजी, आपका स्वागत है। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है,” रामप्रसाद ने हाथ जोड़कर कहा।
धनराज सेठ कई दिनों तक रामप्रसाद के घर रुके। इधर रामप्रसाद की बेटी सुनीता की शादी में दहेज की समस्या थी। उसकी मां ने सुझाव दिया कि धनराज सेठ से मदद मांगी जाए, लेकिन सुनीता ने मना कर दिया।
“मां, हम गरीब हैं लेकिन भिखारी नहीं। मैं सेठजी से कुछ नहीं मांगूंगी,” सुनीता ने दृढ़ता से कहा।
गांव के ईर्ष्यालु पड़ोसी मुकेश और विनोद को रामप्रसाद की बढ़ती इज्जत से जलन हो रही थी। उन्होंने एक शातिर योजना बनाई।
“देखो विनोद, हमें रामप्रसाद को बदनाम करना होगा। धनराज सेठ के पैसे और आभूषण चुराकर रामप्रसाद के घर छुपा देंगे,” मुकेश ने कहा।
रात के अंधेरे में दोनों ने धनराज सेठ के कमरे से सारे पैसे और सोने के आभूषण चुराकर रामप्रसाद के कमरे में छुपा दिए।
सुबह जब चोरी का पता चला, तो मुकेश ने आरोप लगाया, “रामप्रसाद ने ही चोरी की होगी। उसकी बेटी की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी।”
जब सबने मिलकर तलाशी ली तो सारा सामान रामप्रसाद के कमरे से मिल गया। गांव वाले उसे चोर कहने लगे।
रामप्रसाद आंसू बहाते हुए बोला, “हे भगवान, मैंने कभी चोरी नहीं की। यह मेरे साथ अन्याय हो रहा है।”
धनराज सेठ ने रामप्रसाद का साथ दिया, “मैं जानता हूं, रामप्रसाद ऐसा नहीं कर सकता।”
राजू को अपने पिता पर पूरा भरोसा था। उसने अपने मित्र आनंद के साथ मिलकर सच्चाई का पता लगाने की ठानी।
“भाई, कल रात मैंने मुकेश और विनोद को हमारे घर की तरफ आते देखा था,” आनंद ने बताया।
राजू को समझ आ गया। उसने दोनों को पकड़कर धमकाया, “सच बताओ, नहीं तो पुलिस के हवाले कर दूंगा।”
डर के मारे विनोद ने सब कुछ कबूल कर लिया, “हमने ही चोरी की थी और रामप्रसाद को फंसाया था।”
गांव के सामने दोनों ने माफी मांगी। रामप्रसाद की इज्जत वापस आ गई। शर्म के मारे मुकेश और विनोद को गांव छोड़ना पड़ा।
धनराज सेठ ने रामप्रसाद को व्यापार के लिए पैसे दिए और सुनीता की शादी एक अच्छे घर में कराई।
अंत में रामप्रसाद ने कहा, “सच्चाई हमेशा जीतती है। ईमानदारी और धैर्य से हर मुश्किल का समाधान मिल जाता है।”
सत्य की हमेशा विजय होती है। ईर्ष्या और षडयंत्र से किसी का भला नहीं होता। धैर्य रखकर सच्चाई के साथ खड़े रहना चाहिए।

