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Bhoot

रांटस: कश्मीर की खूनी डायन जो जवान मर्दों को मौत के मुंह में ले जाती है | Hindi Horror Story

Posted on March 27, 2026 by Kahani Ki Duniya

 

 

बूढ़े दादा और दादी के बीच कुछ बच्चे आग

 

के सामने बैठे आग ताप रहे थे।

 

दादा जी दादा जी हमें कोई कहानी सुनाइए

 

ना।

 

यह सुनकर दादा ने बच्चों की तरफ देखा।

 

बच्चा

 

आज के जमाने में जहां बच्चे मोबाइल फोन

 

में लगे रहते हैं वहां तुम मुझसे कहानी

 

सुनाने की बात कर रहे हो।

 

दादा जी जो कहानियां इंटरनेट पर होती है

 

वो तो हमने बहुत सुनी है। आज आप कुछ

 

सुनाइए ना।

 

यह सुनकर दादा ने कुछ सोचा और फिर कहानी

 

सुनाना शुरू किया। कमलेश और गोमती दोनों

 

की शादी को कुछ ही दिन गुजरे थे। लेकिन

 

उनके बीच कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा था।

 

उनके बीच बहुत लड़ाई झगड़े हुआ करते थे और

 

उस रात कमलेश गोमती को उसके मायके छोड़ने

 

जा रहा था।

 

क्या हुआ? अब क्या तुमसे यह गाड़ी भी नहीं

 

चलाई जा रही?

 

बकवास मत करो। मुझे टॉयलेट आया है।

 

उसने गाड़ी को बंद किया और बाहर निकल

 

झाड़ियों में चला गया। घूमती गाड़ी में

 

बैठी-बैठी बड़बड़ा रही थी।

 

बेवकूफ आदमी पीछे होटल से होकर आ रहे हैं।

 

वहां टॉयलेट नहीं कर सकता था।

 

कुछ ही देर में कमलेश वापस आया और उसने

 

गाड़ी में बैठ स्टार्ट करने के लिए चाबी

 

घुमाई।

 

अरे ये स्टार्ट क्यों नहीं हो रही है?

 

लगता है ठंड की वजह से इंजन ठंडा हो गया

 

है।

 

गोमती यह सुनकर और ज्यादा गुस्सा हो गई।

 

कमलेश ने देखा कि कुछ ही दूरी पर घर है और

 

वो गोमती को लेकर वहां पहुंचा।

 

अरे बच्चों कौन हो तुम लोग?

 

मां जी। um हमारी गाड़ी खराब हो गई है।

 

क्या हम सुबह तक यहां रुक सकते हैं?

 

हां, रुक सकते हो। जल्दी से अंदर आ जाओ।

 

रात का समय है। इस समय बाहर घूमना ठीक

 

नहीं।

 

बूढ़ी ने इन दोनों को अंदर ले लिया।

 

अब दोनों उस कमरे में जाकर सो जाओ। बाहर

 

निकलना ठीक नहीं है।

 

जी शुक्रिया मां जी। ये दोनों कमरे में

 

चले गए। लेकिन वहां भी ज्यादा देर तक ये

 

शांत नहीं रह पाए। यह सब तुम्हारी वजह से

 

हुआ है। अगर तुम सुसु करने नहीं रुकते ना,

 

तो गाड़ी भी ठंडी नहीं पड़ती।

 

कमलेश ने भी उसे जवाब दिया और दोनों में

 

बहस बढ़ गई। बूढ़ी तब तक सो गई थी। कमलेश

 

उसी समय घर से निकल गया।

 

मैं तो गाड़ी में ही सो जाऊंगा। जब देखो

 

बहस-बहस और कुछ आता ही नहीं।

 

वो बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ रहा था। तभी

 

उसने देखा कि सामने से एक लड़की बल खाती

 

कमर लहराए चली आ रही है। जैसे-जैसे वो

 

करीब आती तो उसका खूबसूरत आकर्षण कमलेश को

 

साफ होता नजर आ रहा था। लाल साड़ी जो नीचे

 

जमीन तक मिली हुई थी। गोरा बदन लंबे

 

लहराते बाल सर्द रात में कोई बूढ़ा भी

 

उसको देख ले तो वह भी जवानी की दुआ मांगने

 

लगे। वह कमलेश के करीब आई। उसने नजरें

 

मिलाई और फिर बिना कदमों को रोके आगे बढ़

 

गई। ना जाने क्या नशा था उसके सौंदर्य

 

में। कमलेश बिना कुछ सोचे समझे उसके पीछे

 

हो लिया।

 

इस तरफ अब गोमती को भी अपनी गलती का एहसास

 

होने लगा था।

 

मैंने कुछ ज्यादा ही बोल दिया। इतना नहीं

 

कहना चाहिए था।

 

वो धीमे कदमों से कमरे से बाहर निकली।

 

लेकिन उसका हाथ कुर्सी से टकराया।

 

कौन है? तुम इतनी रात में कमरे से बाहर

 

क्या कर रही हो? कुछ नहीं मांझी। हम दोनों

 

का झगड़ा हो गया था। तो वो बाहर चले गए।

 

अब उनको ही देखने जा रही हूं। यह सुनकर

 

बूढ़ी के चेहरे का रंग सा उड़ गया।

 

मैंने तुम लोगों से कहा था ना कमरे से

 

बाहर ना निकलना। चलो अब जल्दी से।

 

बूढ़ी गोमती को साथ बाहर निकली। गोमती को

 

भी जब दूर-दूर तक कमलेश नजर नहीं आया तो

 

वो परेशान हो उठी। बूढ़ी आगे बढ़ती जा रही

 

थी और सामने एक गुफा नजर आने लगी थी।

 

अम्मा जी कमलेश मिल तो जाएंगे ना। वो नजर

 

क्यों नहीं आ रहे?

 

बूढ़ी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया

 

और कदमों को तेज कर दिया और उस गुफा के

 

दरवाजे पर एक जूता पड़ा हुआ था। जिसे

 

देखकर गोमती डर गई।

 

यह तो कमलेश का जूता है। जिसका मुझे डर था

 

वही हुआ।

 

बूढ़ी गुफा के अंदर आगे बढ़ती रही। और एक

 

जगह जाकर इन दोनों के कदम रुक गए। बूढ़ी

 

का दिल दहल उठा और बूढ़ी की आंखें भी खौफ

 

से फट पड़ी। जो औरत कुछ देर पहले इतनी

 

खूबसूरत दिख रही थी। अब वो एक बेहद भयानक

 

डायन में बदल चुकी थी।

 

दादा जी वो भयानक डायन कौन थी?

 

विवेक और रणविजय दोनों कश्मीर में अपने

 

दोस्त मोहित से मिलने और घूमने के इरादे

 

से आए थे।

 

बस स्टॉप पर रुकी तो वहां पहले से ही इनका

 

दोस्त मोहित खड़ा हुआ था।

 

अरे मोहित कैसा है भाई?

 

आ गए तुम लोग? बहुत याद किया यार मैंने

 

तुमको। वो उन दोनों को अपने घर ले गया।

 

मोहित अपनी बीवी श्रुति के साथ रहता था।

 

सभी ने साथ में डिनर किया और फिर अपनी

 

पुरानी यादों को ताजा करते हुए बातें करने

 

लगे। तीनों एक दूसरे से कई दिनों बाद मिले

 

थे। इसीलिए देर रात तक यह बातें करते रहे।

 

अगले दिन ये तीनों एक साथ घूमने निकले और

 

पूरा दिन इन्होंने घूमने में ही निकाल

 

दिया।

 

तीन दिनों तक घूमने के बाद तीसरी सुबह।

 

यार तुम लोगों को छोड़कर जाने का मन तो

 

नहीं कर रहा लेकिन अब मुझे जॉब पर जाना ही

 

पड़ेगा। तीन दिन से छुट्टी पर था ना?

 

अरे हां भाई तू जॉब पर जा। हमारी फिक्र मत

 

कर। अरे हम तो खुद भी घूम लेंगे।

 

विवेक और रणविजय आज अकेले घूमने निकले

 

और 4:00 बजे तक वापस घर आ गए।

 

शाम के टाइम रणविजय विवेक से बोला अब

 

विवेक मैं जरा सिगरेट पीने जा रहा हूं। तू

 

चलेगा?

 

अरे नहीं नहीं तू ही जा भाई। मैं पहले ही

 

थक गया हूं। यह सुनकर रणविजय घर से निकला।

 

गली काफी लंबी थी और दुकान बहुत दूर थी।

 

वह तेज-तेज़ कदमों के साथ रवाना हो गया।

 

कितनी ठंड है यहां? ये लोग हमेशा यहां

 

कैसे रहते हैं?

 

जो लोग यहां रहते हैं उनको तो आदत डालनी

 

ही होती है।

 

उस आवाज को सुनकर रणविजय ने सामने देखा।

 

एक खूबसूरत लड़की जिसके लंबे बाल थे। उसने

 

नीली लंबी साड़ी पहनी हुई थी। वो बस स्टॉप

 

पर खड़ी थी।

 

जी सही कहा आपने। इस पर लड़की ने कोई जवाब

 

नहीं दिया। वैसे आपका नाम क्या है?

 

क्यों? नाम जानकर आपको क्या करना है?

 

तभी वहां एक बस आकर रुकी।

 

वो लड़की मुस्कुराई और बस में चढ़ गई।

 

रणविजय वहीं खड़ा-खड़ा रह गया। उसने जल्दी

 

से मोबाइल में टाइम देखा।

 

6:30

 

हो सकता है यह कल भी यहां आए।

 

अगले दिन रणविजय 6:00 बजे ही बस स्टॉप पर

 

पहुंचा और खड़ा हो गया। आज पहले ही यहां आ

 

गया। आज तो उससे बात करने का मौका मिल ही

 

जाएगा।

 

तभी वही लड़की उसको सामने से आती हुई नजर

 

आई और वो रणविजय को देखकर मुस्कुराई। फिर

 

स्टॉप पर आकर खड़ी हो गई।

 

अब कैसी हैं आप?

 

ओहो आप तो आज भी हमारा नाम पूछने चले आए।

 

देखिए गलत नहीं समझना लेकिन ना जाने क्यों

 

आपसे बात करने का मन करता है।

 

अच्छा बात करने का या दोस्ती करने का?

 

यह सुनकर रणविजय मुस्कुराने लगा।

 

वैसे आपने कल मेरा नाम पूछा था ना देविका।

 

मेरा नाम रणविजय है।

 

वैसे आज मुझे कहीं नहीं जाना। मैं तो बस

 

यह देखने आई थी कि आप मुझसे बात करने के

 

लिए आते हैं या नहीं। यह कहकर वो

 

मुस्कुराई और आगे बढ़ गई। रणविजय भी

 

मुस्कुराया और उसके साथ-साथ चलते हुए

 

बातें करने लगा।

 

लड़की ने अपने बारे में ज्यादा कुछ नहीं

 

बताया। लेकिन रणवििजय की जिंदगी के बारे

 

में वह ज्यादा दिलचस्पी ले रही थी। रणविजय

 

भी उससे बातें करता हो आ गया था और वो

 

उसके पीछे जंगलों में पहुंच गया।

 

अरे मैं यहां कैसे आ गया? मैं तो देविका

 

के साथ था। वो उठा और घर पहुंचा।

 

अब रात के 8:00 बज चुके थे। अब अगले दो

 

दिनों तक रणविजय उसी समय स्टॉप पर पहुंचा

 

और दो दिनों तक लगातार उसके साथ ऐसा ही

 

हुआ। उसे अब अपने अंदर कमजोरी भी महसूस हो

 

रही थी।

 

इसलिए जब चौथे दिन वो देविका से मिला तो

 

उसने उससे यह बात कह डाली। देविका

 

मुझे एक बात पूछनी थी। मैं रोजाना तुमसे

 

मिलता हूं और फिर तुमसे बात करते-करते ना

 

जाने कहां खो जाता हूं। और जब होश आता है

 

तो मैं उसी बस स्टॉप पर होता हूं। यह

 

सुनकर देविका को गुस्सा आ गया।

 

तुम कहना क्या चाहते हो? बोलो क्या मैं

 

तुम पर कोई काला जादू कर रही हूं?

 

अरे मैं तो बस ऐसे ही

 

मैं जा रही हूं। कल अगर मिलना हो तो आ

 

जाना। मुझे तुमसे बात करना बहुत अच्छा

 

लगता है। बस यही एक वजह है।

 

ये कहकर वो वहां से चली गई।

 

उस रात डिनर के समय विवेक रणविजय से बोला

 

अरे रणविजय

 

तुझे क्या हो गया है यार तू कमजोर होता जा

 

रहा है रोजाना शाम को बिना बताए कहां चला

 

जाता है और दो-ती घंटे पहले तू वापस भी

 

नहीं आता आखिर क्या चल रहा है अरे अब तुम

 

लोगों से क्या छिपाना एक लड़की है अब

 

देविका मेरी दोस्त बनी बनी है।

 

ओ हो

 

तो लड़की का चक्कर है।

 

ये किस फ्रेंड की बात कर रहे हैं?

 

अब भाभी जी वो एक लड़की है। बस टॉप पर

 

रोजाना मिलती है मुझसे। बहुत बात होनी है।

 

यह सुन श्रुति ने मोहित की तरफ देखा और

 

बोली

 

कहीं वो लड़की तुमको अपने साथ किसी जंगली

 

इलाके में तो लेकर नहीं जाती।

 

यह सुनकर रणविजय को थोड़ा हैरानी हुई।

 

हां।

 

ले जाती है। लेकिन तुम लोगों को कैसे पता?

 

क्या उससे मिलते समय तुम्हारे साथ कुछ

 

अजीब होता है? कुछ बहुत अजीब?

 

हां, मैं रोजाना उससे मिलने जाता हूं और

 

फिर उससे बातें करते-करते उसके साथ जंगली

 

इलाके में चला जाता हूं। लेकिन फिर जब मैं

 

होश में आता हूं तो बस स्टॉप पर ही होता

 

हूं। और मुझे कुछ याद नहीं रहता कि 2

 

घंटों में मेरे साथ क्या हुआ था।

 

मोहित जरा देखो रणविजय की गर्दन के पीछे

 

कोई निशान तो नहीं है?

 

तभी मोहित ने उसकी गर्दन के पीछे देखा तो

 

पाया वहां दो निशान थे।

 

हां जान। वहां दो निशान है। जैसे किसी ने

 

दांत मारे हो।

 

जिसका डर था वही हुआ।

 

यह सुनकर रणविजय परेशान हो उठा। अरे तुम

 

लोग कब तक पहेलियां बुझाते रहोगे? कुछ

 

बोलोगे भी कि मेरे साथ क्या चल रहा है?

 

यह कश्मीर है जिसे धरती का स्वर्ग कहा

 

जाता है। हर एक जगह खूबसूरत वादी,

 

खूबसूरत, बड़े-बड़े पहाड़। जो भी यहां आता

 

है, यहां से जाने का उसका मन ही नहीं

 

होता। जहां हमारा कश्मीर बहुत ही खूबसूरत

 

है। कहीं यहां के लोगों के बीच एक डर भी

 

बना रहता है। कैसा डर?

 

रंटस

 

रंटस वो क्या होता है?

 

जिस तरह चुड़ैल, दायने और पिशाचिनी होती

 

है, उसी तरह रानस भी एक डायनी होती है। यह

 

कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में गुफाओं में

 

वास करती है और अक्सर यह जवान मर्दों को

 

अपना शिकार बनाने के लिए एक खूबसूरत रूप

 

में निकलती है। फिर यह उसको अपने प्यार के

 

जाल में फंसाकर पूरे सात दिनों तक उसकी

 

जीवन शक्ति को धीरे-धीरे खत्म करती रहती

 

है। वह इसके प्रभाव में इतना बहक जाता है

 

कि उसको यह भी पता नहीं चलता कि वह

 

धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। और फिर

 

सातवें दिन यह उस आदमी को अपनी गुफा में

 

ले जाती है और फिर वहां उसका अंत कर देती

 

है।

 

यह सुनकर मोहित, विवेक और रणविजय तीनों ही

 

हैरान रह गए।

 

मतलब वो मुझे भी खत्म कर देगी। नहीं अब तू

 

उसके पास नहीं जाएगा।

 

इनको जाना होगा। अगर यह नहीं गए तो वो

 

यहां आ जाएगी।

 

तो तुम क्या कहना चाहती हो कि मैं अपने

 

दोस्त को खुद मौत के मुंह में धकेल दूं?

 

नहीं मैं यह नहीं कह रही। मैं बोल रही हूं

 

कि तुम उसको छल से मार सकते हो। और इस तरह

 

तुम अपने आप को उससे बचा सकते हो।

 

मैं उसे मार सकता हूं। एक डायन को वो

 

कैसे?

 

तुम कल जब उससे मिलने जाओ तो तुम अपने साथ

 

चंदन की लकड़ी का एक खंजर लेकर जाना। और

 

जैसे ही वह तुम्हारे सामने हो तो तुम उसकी

 

गर्दन में उसे गाड़ देना। चंदन की लकड़ी

 

के हथियार से रानतास को मारा जा सकता है।

 

रणविजय अगले दिन शाम के समय जब निकल रहा

 

था तो श्रुति ने उसे एक लकड़ी का खंजर

 

दिया।

 

तू हिम्मत से काम लेना। हां, मुझे यह करना

 

ही पड़ेगा। रणविजय ने एक खंजर को अपनी

 

जैकेट में छिपाया

 

और बस स्टॉप पर पहुंचा और उसके आने का

 

इंतजार करने लगा।

 

25 मिनट ऊपर हो गए। ये अभी तक क्यों नहीं

 

आई? तभी उसको सामने से वो देविका आती हुई

 

नजर आई। करीब आकर उसने रणविजय को देखा।

 

अरे आप यहां आप तो

 

वो अपनी बात पूरी करती। इससे पहले ही

 

रणविजय ने खंजर निकाल पीछे से उस पर चंदन

 

के खंजर से वार किया।

 

वो घर पहुंचा तो बहुत ही डरा हुआ लग रहा

 

था।

 

मैंने उस दुष्ट आत्मा का अंत किया है। एक

 

डायन का अंत। मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा।

 

अरे भाई ये तू क्या कह रहा है?

 

हां तुमने तो एक डायन को खत्म किया है।

 

अगर तुम उसे नहीं मारते तो वो तुमको मार

 

डालती और फिर तुम्हारे बाद भी ना जाने

 

कितने मर्दों को शिकार बनाती।

 

हां रणविजय भाभी सही कह रही है।

 

और अब थोड़ा संभल कर रहना। अब अगर कोई

 

लड़की यहां तुमसे कहे कि उसे तुमसे बात

 

करना बहुत अच्छा लगता है तो समझ जाना कि

 

वो वही रांडस है। यह सुनकर रणविजय सोच में

 

पड़ गया और कुछ देर बाद हां मैंने सही

 

किया है। बिल्कुल सही। मैं जरा एक सिगरेट

 

पीकर आता हूं। यह कहकर रणविजय फिर से घर

 

से निकल गया। बेचारा पहली बार आया है और

 

पहली बार में ही इसके साथ यह सब हो गया।

 

मुझे नहीं लगता अब यह कभी कश्मीर आना

 

चाहेगा।

 

रणविजय कहीं 10:00 बजे घर लौटा।

 

उस समय श्रुति किचन में थी।

 

अरे 2 घंटे में आया है तू। कहीं फिर से तो

 

किसी लड़की के चक्कर में नहीं पड़ गया था।

 

रणविजय ने उन दोनों से थोड़ी बात की और

 

फिर सभी अपने-अपने कमरों में सोने के लिए

 

चले गए। रात के तकरीबन 1:00 बजे

 

विवेक को प्यास लगी और वो पानी पीने के

 

लिए कमरे से निकला।

 

तभी उसने श्रुति को सामने देखा।

 

भाभी जी आप इस पर श्रुति उसको देखकर

 

मुस्कुराई। उसकी आंखें लालाल चमकने लगी।

 

उसके दांत और नाखून रूप में बदल गए और वो

 

रट्टस के रूप में आ गई।

 

इससे पहले ही रणविजय ने निकाल पीछे से

 

उसको कंगन के भीतर से वार किया।

 

वो बुरी तरह चीखने चिल्लाने लगी और जमीन

 

पर गिर कर कसमसाने लगी और इन तीनों को

 

हैरानी भरी निगाहों से देखने लगी

 

तुमको यही लग रहा है ना हमें तुम्हारे

 

बारे में कैसे पता चला खेल तो तुमने बहुत

 

अच्छा खेला था लेकिन जब मैंने तुम्हारे

 

मुंह से वो बात सुनी

 

अब अगर कोई लड़की कि तुमसे यह कहे कि उसे

 

तुमसे बात करना बहुत अच्छा लगता है तो समझ

 

जाना कि वो वही रंटस है।

 

तो मुझे यकीन हो गया कि तुम श्रुति भाभी

 

नहीं हो क्योंकि यह बात रंटस ने मुझसे कही

 

है। ये मैंने आप में से किसी को नहीं

 

बताया था। मैं उसी समय घर से निकला और उसे

 

लेकर मैं एक तांत्रिक के पास पहुंचा।

 

तो उसने बताया कि वो चंदन की लकड़ी का

 

खंजर नहीं है। उसके बाद मैं समझ गया कि

 

असली देविका रोजाना 5:30 बजे स्टॉप पर आती

 

थी और तुम उसके रूप में आकर रोजाना मुझे

 

पहले ही वहां से ले जाया करती थी। इसलिए

 

आज रात तुम वहां नहीं पहुंची।

 

फिर उस तांत्रिक ने मुझे असली चंदन की

 

लकड़ी का खंजर दिया और मैं उसे लेकर घर

 

लौटा। फिर जब तुम श्रुति भाभी के रूप में

 

किचन में थे तो मैंने इन दोनों को सब कुछ

 

बता दिया और हमने तुमको तुम्हारे ही छल के

 

जरिए खत्म कर डाला। इतना सुनने के बाद ही

 

वो जोरों से चिल्लाई।

 

वहां खत्म हो गई।

 

अब जल्दी से श्रुति को ढूंढो। वो यहीं

 

कहीं होगी।

 

इन्होंने श्रुति को ढूंढा। तो वो स्टोर

 

रूम में इनको सही सलामत मिले।

 

 

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