एक समय की बात है, उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव कुसुमपुर में एक अजीब घटना घट रही थी। यह गांव चारों ओर से हरे-भरे खेतों, पुराने पेड़ों और टूटी-फूटी सड़कों से घिरा था। दिन में तो गांव सामान्य लगता था, लेकिन रात होते ही एक अजीब सन्नाटा छा जाता था, जैसे कोई अदृश्य शक्ति पूरे गांव को अपने अधीन कर लेती हो।
पिछले कुछ हफ्तों से गांव में एक डरावनी घटना हो रही थी। हर रात एक-एक करके लोग गायब हो रहे थे। सुबह उनकी जगह पर केवल एक काला निशान मिलता था, जैसे किसी ने उन्हें जला दिया हो। गांव वाले इतने डर गए थे कि रात होते ही सब अपने घरों में दुबक जाते थे।
राजन शहर में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। उसके पिता की हाल ही में मृत्यु हो गई थी। अब उसे अपनी पुश्तैनी जमीन और घर के कागजात पूरे करने के लिए कुसुमपुर लौटना पड़ा। शहर की चकाचौंध में रहने वाला राजन गांव की इन अंधविश्वासी बातों में विश्वास नहीं करता था।
शाम का समय था जब राजन ऑटो में बैठकर गांव की ओर जा रहा था। आकाश में घनी धुंध थी और सड़कें लगभग सुनसान थीं। ऑटो चालक बिल्कुल चुप था। राजन ने हल्के मजाक में कहा, “भाई साहब, यहां तो रात में बहुत सन्नाटा रहता है।”
ऑटो वाले ने गंभीर आवाज में कहा, “साहब, रात में बाहर मत निकलना। यह सलाह है।”
राजन ने उसकी बात को हंसकर टाल दिया। लेकिन जैसे-जैसे ऑटो गांव के अंदर जा रहा था, उसे सड़क किनारे अजीब परछाइयां दिखने लगीं। पेड़ों की शाखाएं हवा में ऐसे हिल रही थीं जैसे कोई फुसफुसा रहा हो।
गांव के मुख्य चौक पर पहुंचकर राजन हैरान रह गया। पूरा चौक खाली था। कोई दुकानदार नहीं, कोई आदमी नहीं। केवल दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी। ऑटो वाले ने जल्दी से पैसे लिए और वहां से निकल गया।
राजन अपने पुराने घर की ओर चला। रास्ते में उसे अपनी बचपन की दोस्त पूजा मिली। पूजा अब गांव में अकेली रहती थी। उसका चेहरा थका हुआ और डर से भरा था।
“राजन! इतने सालों बाद? तुम यहां कैसे?” पूजा ने पूछा।
“बस पिताजी की जमीन का काम पूरा करने आया हूं। लेकिन यह बताओ, गांव में इतना सन्नाटा क्यों है?” राजन ने पूछा।
पूजा ने डरते हुए कहा, “राजन, यहां कुछ अजीब हो रहा है। हर रात कोई न कोई गायब हो जाता है। कोई आवाज नहीं, कोई निशान नहीं। सुबह बस एक काला निशान मिलता है।”
राजन ने हंसते हुए कहा, “यह सब अंधविश्वास है। गांव वाले डरावनी कहानियां बनाते हैं।”
“अगर तुम इसे हल्के में लोगे तो बाद में पछताओगे। रात में अजीब आवाजें आती हैं, परछाइयां दिखती हैं, और कभी-कभी कोई नाम पुकारता है,” पूजा ने चेतावनी दी।
रात गहरी होने लगी। राजन घर के पुराने कमरे में बैठा था। खिड़कियों से बाहर अजीब परछाइयां गुजर रही थीं। हवा में फुसफुसाहटें और नाम पुकारने की आवाजें आ रही थीं।
अगले दिन राजन गांव में घूमने निकला। हर घर का दरवाजा बंद था। तभी उसे गांव के पुराने पंडित दिखे। पंडित जी ने गंभीरता से कहा, “राजन, तुम्हें सच्चाई जाननी चाहिए। यह गांव शापित है और यह श्राप तुम्हारे परिवार की उसी जमीन से जुड़ा है।”
“कैसा श्राप?” राजन ने पूछा।
“तुम्हारे दादा ने इस जमीन पर एक पुराना मंदिर गिरवा दिया था। उस मंदिर में एक रक्षक की आत्मा थी जो गांव की रक्षा करती थी। जब मंदिर टूटा, तो वह आत्मा कैद हो गई। अब वह हर रात किसी की आत्मा खींचती है ताकि अपनी कैद से मुक्त हो सके,” पंडित ने बताया।
राजन ने रात को उस जगह जाने का फैसला किया जहां मंदिर था। पूजा ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन राजन नहीं माना।
रात में राजन उस जगह पहुंचा। वहां जली हुई मिट्टी, टूटी दीवारें और एक पुराना बुझा हुआ दिया पड़ा था। राजन ने दिया जलाया। जैसे ही लौ उठी, जमीन हिलने लगी और हवा में सिसकारियां गूंजने लगीं।
तभी पूजा वहां पहुंची, लेकिन उसका चेहरा बदल चुका था। उसकी आंखों में अब एक अलौकिक शक्ति दिख रही थी। पूजा वास्तव में वही राक्षस की आत्मा थी जो सालों से गांव वालों को मार रही थी।
“अब तुम मेरे हो। तुम्हें निगलने के बाद मैं इस श्राप से मुक्त हो जाऊंगी,” पूजा ने डरावनी आवाज में कहा।
राजन चिल्लाया, लेकिन चारों ओर धुआं फैल गया। धीरे-धीरे राजन गायब हो गया।
सुबह गांव में अफवाह फैली कि राजन भी उस राक्षस के चंगुल में फंस गया। गांव के लोग और अधिक डर गए। कुसुमपुर की धुंध और घनी हो गई। अब कोई नहीं जानता कि अगली रात किसकी बारी है।
पूजा अब पूरी शक्ति के साथ गांव में घूमती है, हर रात नए शिकार की तलाश में। और कोई नहीं जानता कि इस श्राप का अंत कैसे होगा।

