सिमरानपुर नाम के एक गांव में प्रिया अपने पति राजेश के साथ रहती थी। राजेश एक दयालु और ईमानदार व्यक्ति था जो अपनी छोटी सी कमाई में हमेशा संतुष्ट रहता था। लेकिन उसकी पत्नी प्रिया बहुत लालची महिला थी जो हमेशा अमीर बनने का सपना देखती थी। उसके पति एक कंपनी में दिहाड़ी मजदूर का काम करते थे। वह अक्सर उन्हें ताने मारती और अपनी किस्मत को भी कोसती रहती। अमीर बनने की उसकी चाह इतनी प्रबल हो गई थी कि वह अब इसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी।
एक दिन प्रिया ने कहा, “तुम कब तक इस गरीब आदमी की जिंदगी जीते रहोगे? जिंदगी में सिर्फ दिहाड़ी मजदूरी से ज्यादा भी कुछ है।”
राजेश ने जवाब दिया, “तुम क्या कह रही हो प्रिया? तुम जानती हो मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं। मैं जो काम कर सकता हूं उसे करके ईमानदारी से कमाने में ही संतुष्टि महसूस करता हूं।”
“हां हां, तुम तो इससे आगे सोच भी नहीं सकते। देखो सुरेश को, उसने सिर्फ एक ठेले से शुरुआत की थी और अब उसके पास दो ठेले हैं। तुम्हें तो पता भी नहीं अमीर लोग कैसे रहते हैं। बड़ी गाड़ियां, बंगले, महंगे कपड़े।”
यह सब सोचते-सोचते प्रिया एक सपने में खो गई जहां वह खुद को एक अमीर महिला के रूप में देखती है। उसके पास दो बड़ी गाड़ियां हैं और वह उनमें से एक में शॉपिंग करने जा रही है।
अचानक राजेश ने उसे हिलाकर जगाया। “महारानी जी, अपने सपने से जागो और मुझे खाना परोसो।”
“मैंने तुमसे कितनी बार कहा है मुझे सपनों से मत जगाओ? असली जिंदगी में नहीं तो कम से कम सपनों में तो मैं अमीर बन सकती हूं।”
“ठीक है, मुझे याद रहेगा।” राजेश अब खाने बैठ गया जबकि प्रिया उसे परोस रही थी।
खाते समय प्रिया सोचने लगी और अपना मन बना लिया। अगले दिन उसने एक छोटा व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। उसे अचानक याद आया कि उसने शादी से पहले आइसक्रीम बनाने की क्लासेज ली थीं और वह इसमें अच्छी थी।
प्रिया ने अपने पति के साथ यह व्यवसाय का विचार साझा किया। “सुनो, तुम जो पैसे लाते हो उससे मुझे वो सब चीजें नहीं मिल पातीं जो मुझे चाहिए। इसलिए मैंने तय किया है कि कल से मैं आइसक्रीम बनाकर बेचूंगी और कुछ पैसे कमाऊंगी।”
“प्रिया, तुम जो चाहो कर सकती हो, लेकिन कभी ईमानदारी का रास्ता मत छोड़ना। शुरुआत में तुम्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन तभी तुम सफलता का स्वाद चखोगी।”
“हां हां, चिंता मत करो। मैं बिल्कुल वैसा ही करूंगी जैसा तुम कहते हो।”
प्रिया ने दूध खरीदा और स्वादिष्ट आइसक्रीम तैयार की, फिर इसे फ्रिज में रख दिया। अगले दिन से उसने सड़कों पर आइसक्रीम बेचना शुरू कर दिया।
“आइसक्रीम! आइसक्रीम! ताजी आइसक्रीम, फ्लेवर वाली आइसक्रीम। आओ और अपनी आइसक्रीम लो।”
गर्मियों का मौसम चरम पर था, इसलिए बच्चे उसकी तरफ दौड़ते हुए आते और कीमत और फ्लेवर के बारे में पूछते। वे चखते और तुरंत इसे पसंद कर लेते। प्रिया आइसक्रीम बनाने में बेहतरीन थी। जो भी इसे एक बार चखता, वह फिर से आए बिना नहीं रह सकता था।
दिन बीतते गए और उसका व्यवसाय फलने-फूलने लगा। जल्द ही प्रिया ने अच्छी रकम बचा ली। एक दिन उसने अपने पति से कहा, “देखा? मैंने तुमसे ज्यादा पैसे बचा लिए हैं। बहुत जल्द मैं अपना खुद का आइसक्रीम ठेला खरीदूंगी।”
“वाह प्रिया, लगता है तुम्हारा व्यवसाय बहुत अच्छा चल रहा है। लगता है तुम्हारा सपना पूरा होने वाला है।”
“हां हां, जरूर होगा।”
अब प्रिया सोचने लगी कि अगर वह मात्रा कम कर दे या कीमत बढ़ा दे तो वह और भी ज्यादा कमाएगी। इसलिए अगले दिन से उसने मात्रा कम कर दी और कीमत बढ़ा दी। फिर भी स्वाद की वजह से लोग उसकी आइसक्रीम खरीदते रहे।
फिर प्रिया ने सोचा कि क्यों न और पैसे बचाने के लिए घटिया क्वालिटी के ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल शुरू किया जाए? उसका लालच दिन-ब-दिन बढ़ता गया। उसकी आइसक्रीम की गुणवत्ता गिरने लगी।
एक ग्राहक जिसने उससे खरीदा, बोला, “प्रिया जी, क्या आपने आइसक्रीम में कुछ बदलाव किया है? यह बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही।”
“नहीं साहब, आप क्या कह रहे हैं? सब कुछ वैसा ही है।”
धीरे-धीरे उसके ग्राहक कम होने लगे। प्रिया चिंतित होने लगी। एक दिन एक आदमी ने उसकी आइसक्रीम खाई और उल्टी करने लगा।
जब ग्राहक ने इसके बारे में प्रिया से पूछा तो प्रिया ने कहा, “साहब, शायद आपने पहले कुछ खराब खा लिया होगा। मेरी आइसक्रीम बहुत अच्छी है। सबको पसंद आती है।”
उस आदमी ने शिकायत दर्ज करा दी। खाद्य और औषधि अधिकारी आए और उसकी आइसक्रीम का परीक्षण किया। उन्हें पता चला कि वह घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग कर रही थी। इसकी वजह से लोग बीमार पड़ रहे थे। प्रिया को गिरफ्तार कर लिया गया। वह रोने और गिड़गिड़ाने लगी।
“साहब, कृपया मुझे माफ कर दीजिए। मैं फिर कभी ऐसा नहीं करूंगी। मैंने यह सब अमीर बनने के लालच में किया। कृपया मुझे माफ कर दीजिए।”
प्रिया रोती और गिड़गिड़ाती रही। तभी उसके पति राजेश आए और उसे जमानत पर छुड़ा लाए।
घर पर प्रिया ने कहा, “कृपया मुझे माफ कर दो। मैंने तुम्हारी बात न मानकर बहुत बड़ी गलती की। जल्दी अमीर बनने के लालच में मैंने सस्ती सामग्री का इस्तेमाल किया। और आज मेरी वजह से तुम्हें इतनी परेशानी झेलनी पड़ी।”
राजेश ने कहा, “देखो प्रिया, मैंने तुमसे हमेशा कहा है और फिर कहूंगा। कम पैसों में भी हम अमीर हो सकते हैं। धन सिर्फ पैसों में नहीं होता। यह विचारों में भी होता है। यह इस बारे में नहीं है कि हमारे पास कितना है। यह इस बारे में है कि हम कितने खुश हैं।”
प्रिया राजेश के पैरों पर गिर गई और माफी मांगी। उसने वादा किया कि वह फिर कभी यह गलती नहीं दोहराएगी।
लालच का फल हमेशा बुरा होता है। ईमानदारी और संतोष से जीवन जीने में ही असली खुशी और सम्मान है। जल्दी अमीर बनने के चक्कर में गलत रास्ते अपनाने से केवल पतन ही मिलता है।

