सर्दी का मौसम था। छोटे से गाँव में राजू अपनी पत्नी सीमा के साथ रहता था। गरीबी ने उनके घर को चारों तरफ से घेर रखा था। राजू दूसरों के खेतों में मजदूरी करके किसी तरह घर चलाता था।
एक दिन सुबह जब राजू काम पर जाने लगा, तो उसने सीमा को आवाज दी। सीमा तुरंत बाहर आई।
“मैं काम पर जा रहा हूँ। तुम दरवाजा बंद रखना। बाहर बहुत ठंड है और तुम्हारे पास गर्म कपड़े भी नहीं हैं,” राजू ने चिंतित स्वर में कहा।
“चिंता मत करो। बुरे दिन सबके आते हैं। सब ठीक हो जाएगा। आप अपना ख्याल रखना,” सीमा ने हिम्मत से कहा।
रास्ते में राजू की मुलाकात उसके दोस्त अमित से हुई।
“अरे राजू! बिना गर्म कपड़ों के कहाँ निकल पड़े?” अमित ने पूछा।
“क्या करूँ भाई? गर्म कपड़े खरीदने के पैसे ही नहीं हैं। जो कमाता हूँ, वो राशन में खत्म हो जाता है। सीमा के लिए भी कुछ नहीं ला पा रहा,” राजू ने दुखी होकर कहा।
“घबरा मत। मेहनत करने वालों का भगवान साथ देता है,” अमित ने दिलासा दिया।
राजू रमेश काका के खेत पर पहुँचा और काम में लग गया। ठंड इतनी तेज थी कि उसका शरीर काँप रहा था। शाम को थका-हारा वह घर लौटा।
रात को सीमा ने कहा, “इतनी ठंड में आप कैसे काम करते हैं? आपका चेहरा लाल पड़ गया है।”
“क्या करूँ? काम छोड़ दूँ तो घर कैसे चलेगा?” राजू बोला।
दोनों चूल्हे के पास बैठकर आग की गर्मी लेने लगे। कम से कम वहाँ थोड़ी राहत मिलती थी।
अगली सुबह राजू को रमेश काका ने बुलाया।
“राजू बेटा, तुम्हारी हालत देखकर दिल दुखता है। आज जो काम करोगे, उसके पैसों से तुम अपने और सीमा के लिए गर्म कपड़े ले लेना। और राशन मेरे घर से ले जाना,” रमेश काका ने प्यार से कहा।
राजू की आँखें भर आईं। “काका आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।”
दोनों खेत पर गए। राजू ने पूरी मेहनत से सब्जियाँ तोड़ीं। काम पूरा होने पर रमेश काका ने उसे पैसे और राशन दिया।
खुशी-खुशी घर लौटते समय रास्ते में लाला जी मिल गए।
“अरे राजू! मेरी उधारी का क्या हुआ? दो महीने हो गए। अभी पैसे चाहिए,” लाला जी ने सख्ती से कहा।
राजू के हाथ में पैसे थे लेकिन वे गर्म कपड़ों के लिए थे। मगर लाला जी के सामने उसे सारे पैसे देने पड़े। दिल टूट गया।
घर पहुँचकर उसने सीमा को सब बताया।
“कोई बात नहीं। उधारी तो चुकानी ही थी। गर्म कपड़े बाद में ले लेंगे। हम चूल्हे के पास बैठकर गुजारा कर लेंगे,” सीमा ने हिम्मत दिखाई।
राजू की आँखें नम हो गईं। “तुम जैसी पत्नी सबको नहीं मिलती।”
अगली सुबह राजू घर पर ही था। कोई काम नहीं था। तभी गोपाल काका आए।
“राजू, मेरे खेत में दो घंटे का काम है। चलोगे?”
सीमा ने कहा, “जाइए। थोड़ा काम है तो हो जाएगा।”
राजू गोपाल काका के साथ खेत पर गया। काका बीज लेने बाजार चले गए और राजू काम में लग गया।
कुदाल चलाते समय अचानक ‘टक’ की आवाज आई। राजू ने देखा तो जमीन में दो चमचमाते सोने के टुकड़े थे!
राजू की खुशी का ठिकाना न रहा। “हे भगवान! आपने सच में चमत्कार कर दिया! सुबह से मन में उम्मीद थी कि कुछ अच्छा होगा।”
उस दिन से राजू की किस्मत बदल गई। सोने के टुकड़ों से उसने घर की हालत सुधारी। गर्म कपड़े खरीदे, राशन की चिंता खत्म हुई। घर में फिर से खुशियाँ लौट आईं।
राजू और सीमा अब रोज भगवान का शुक्रिया अदा करते। उन्होंने समझ लिया था कि मेहनत, ईमानदारी और धैर्य से बुरे दिन भी गुजर जाते हैं।
सीमा का साथ और भगवान की कृपा से राजू का जीवन बदल गया। अब वे खुशी-खुशी अपना जीवन बिताने लगे।
“मेहनत, ईमानदारी और धैर्य रखने वालों का भगवान हमेशा साथ देता है। बुरे दिन आते हैं लेकिन जो हिम्मत नहीं हारता, उसकी किस्मत जरूर बदलती है।”

