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 गंदे गोला गंडे का सबक

Posted on November 11, 2025 by Kahani Ki Duniya

 

 

एक छोटे से शहर की गलियों में राजू नाम का एक दस साल का लड़का रहता था। राजू बहुत ही शरारती और खाने का बेहद शौकीन था। उसे स्कूल से घर आते समय रास्ते में मिलने वाले तरह-तरह के स्ट्रीट फूड खाना बहुत पसंद था। उसकी माँ सुनीता हमेशा उसे समझाती थी कि बाहर का खाना सेहत के लिए ठीक नहीं होता, लेकिन राजू कभी उनकी बात नहीं सुनता था।

एक गर्म दोपहर की बात है। स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी और राजू अपने दोस्त मोहन के साथ घर की ओर जा रहा था। दोनों दोस्त बातें करते हुए चल रहे थे कि अचानक उन्हें सड़क किनारे एक गोला गंडे वाले चाचा की आवाज सुनाई दी। चाचा जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, “ठंडा-ठंडा गोला गंडा! मीठा और स्वादिष्ट गोला गंडा!”

राजू की आँखें चमक उठीं। गर्मी की उस दोपहर में ठंडा गोला गंडा खाने का विचार ही उसे बहुत लुभावना लग रहा था। वह तुरंत मोहन को खींचते हुए गोला गंडे वाले चाचा की ठेली की ओर दौड़ा। ठेली के पास पहुँचकर उसने देखा कि वहाँ की साफ-सफाई बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी। बर्फ के चारों ओर गंदगी फैली हुई थी, और ठेली के आसपास मक्खियाँ भिनभिना रही थीं।

मोहन ने राजू को रोकते हुए कहा, “यार राजू, यहाँ तो बहुत गंदगी है। चल, आगे किसी और जगह से खाते हैं।” लेकिन राजू को गोला गंडा खाने की इतनी जल्दी थी कि उसने मोहन की बात अनसुनी कर दी।

राजू ने चाचा से कहा, “अंकल, एक गोला गंडा बना दें।”

चाचा ने मुस्कुराते हुए कहा, “अभी लो सरकार।” उन्होंने जल्दी-जल्दी बर्फ को कुचला और उस पर लाल रंग की चटपटी चटनी डाल दी।

जैसे ही चाचा गोला गंडा राजू की ओर बढ़ा रहे थे, राजू ने देखा कि उसमें एक मच्छर बैठा हुआ था। उसने तुरंत कहा, “इसमें तो मच्छर है।”

चाचा ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने गंदे हाथ से मच्छर को हटाते हुए कहा, “हाँ, हाँ, लो जी सरकार, फेंक दिया मच्छर।” उन्होंने मच्छर को ऐसे फेंका जैसे यह कोई बड़ी बात ही न हो।

मोहन फिर से बोला, “राजू, मत खा यार। यह साफ नहीं दिख रहा।”

लेकिन राजू ने उसकी बात फिर से नहीं सुनी। उसने पैसे देते हुए चाचा से कहा, “मेरा तो चेक करें। बहुत मजेदार।” और फिर उसने गोला गंडा खाना शुरू कर दिया।

पहले काटने में ही राजू को बहुत मजा आया। ठंडा, मीठा, और चटपटा स्वाद उसकी जीभ पर घुल गया। उसने मोहन को देखते हुए कहा, “गंदा है पर लजीज है। हे!” और वह खुशी-खुशी अपना गोला गंडा खाता रहा।

मोहन ने सिर हिलाया और उससे अलग हो गया। राजू ने पूरा गोला गंडा खत्म किया और फिर घर की ओर चल पड़ा। घर पहुँचकर उसने अपनी माँ को कुछ नहीं बताया और अपने कमरे में जाकर होमवर्क करने लगा।

शाम होते-होते राजू को पेट में हल्का दर्द महसूस होने लगा। पहले उसने सोचा कि शायद भूख की वजह से हो रहा है, लेकिन रात के खाने के बाद भी दर्द कम नहीं हुआ। रात होते-होते उसका पेट दर्द और भी बढ़ गया। वह बिस्तर पर करवटें बदलने लगा और दर्द से कराहने लगा।

सुनीता ने जब राजू की हालत देखी तो वह घबरा गई। उन्होंने पूछा, “राजू, तुमने दोपहर में कुछ बाहर का खाया था क्या?”

राजू ने दर्द से कराहते हुए सच बता दिया, “हाँ माँ, मैंने रास्ते में गोला गंडा खाया था।”

सुनीता को सब कुछ समझ में आ गया। उन्होंने तुरंत राजू को डॉक्टर के पास ले जाने का फैसला किया। डॉक्टर ने जाँच के बाद बताया कि राजू को फूड पॉइजनिंग हो गई है। गंदे और असाफ खाने की वजह से उसके पेट में संक्रमण हो गया था।

डॉक्टर ने राजू को दवाइयाँ दीं और सख्त हिदायत दी कि आगे से वह कभी भी बाहर का गंदा खाना न खाए। राजू को दो दिन तक बहुत तकलीफ हुई। उसे दवाइयाँ खानी पड़ीं, और वह स्कूल भी नहीं जा सका।

इस घटना ने राजू को एक बहुत बड़ा सबक सिखाया। उसने महसूस किया कि माँ और दोस्तों की बात सुनना कितना जरूरी है। गंदे और असाफ खाने से सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारी भी हो सकती है।

जब राजू ठीक हो गया, तो उसने अपनी माँ से माफी माँगी। उसने वादा किया, “माँ, अब मैं कभी भी बाहर का गंदा खाना नहीं खाऊँगा। मैं हमेशा साफ-सफाई का ध्यान रखूँगा।”

उस दिन से राजू ने अपना वादा निभाया। जब भी वह स्कूल से लौटता, वह गोला गंडे वाले चाचा की ठेली के पास से गुजरता, लेकिन कभी नहीं रुकता। उसने अपने दोस्तों को भी समझाना शुरू कर दिया कि वे हमेशा साफ-सुथरी जगह से ही खाना खाएँ।

मोहन ने एक दिन राजू से कहा, “तुम सच में बदल गए हो दोस्त।”

राजू ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, मैंने अपनी गलती से सीख ली है। अब मैं जानता हूँ कि स्वास्थ्य सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

राजू की यह घटना उसके पूरे स्कूल में फैल गई। कई बच्चों ने उसकी कहानी सुनकर यह फैसला किया कि वे भी अब बाहर का गंदा खाना नहीं खाएँगे। राजू की माँ सुनीता बहुत खुश थीं कि उनके बेटे ने आखिरकार सही और गलत में फर्क करना सीख लिया।

राजू ने सीखा कि जीवन में कुछ चीजें सिर्फ स्वाद के लिए नहीं होतीं। सेहत और साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। उस दिन के बाद से राजू ने कभी भी गंदे खाने का वादा नहीं तोड़ा।

  स्वाद के लालच में आकर अस्वच्छ खाना खाने से बीमारी हो सकती है। हमेशा साफ-सफाई का ध्यान रखें और बड़ों की सलाह मानें। स्वास्थ्य सबसे बड़ी संपत्ति है।

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Category: Bedtime Stories, Fairy Tales, Inspirational Stories, Magic & Fantasy, Moral Stories, Stories

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