रामकृष्ण नाम का व्यक्ति अपनी पत्नी गीता और बेटी प्रिया के साथ सुंदरगांव में रहता था। वे तीनों एक छोटे से घर में खुशी से रहते थे। रामकृष्ण गांव के सेठ विकास के ढाबे पर काम करता था। शादी के अठारह साल बाद उन्हें संतान का सुख मिला था। सेठ के ढाबे पर हमेशा ग्राहकों की भीड़ रहती थी और रामकृष्ण की मेहनत से ही घर चलता था।
एक दिन सेठ विकास ने अमित नाम के युवक को खाना बनाने के काम पर रख लिया। रामकृष्ण ने चिंता जताई तो सेठ ने समझाया, “भाई, काम बढ़ गया है और तुम्हारी उम्र भी हो गई है। अमित तुम्हारी मदद करेगा।”
रामकृष्ण ने अमित को सब काम सिखा दिया। दोनों मिलकर काम करने लगे। लेकिन अमित के मन में जलन थी। वह सोचता, “यह बूढ़ा कम काम करता है फिर भी ज्यादा तनख्वाह लेता है। इसे किसी तरह यहाँ से हटाना होगा।”
शाम को सेठ दोनों को मजदूरी देता और रामकृष्ण को खाना भी देता। अमित ने शिकायत की तो सेठ ने कहा, “रामकृष्ण काका पुराने कर्मचारी हैं, यह उनका हक है।”
अगले दिन रामकृष्ण को तेज बुखार आया। वह काम पर जाने की जिद कर रहा था। प्रिया ने कहा, “बाबा, आज मैं आपकी जगह काम पर जाऊंगी। आज मेरा व्रत भी है।” गीता ने भी समर्थन किया।
ढाबे पहुंचकर प्रिया ने सब को स्थिति बताई। सेठ ने दया करके उसे काम करने दिया। दोपहर में सेठ किसी काम से गया तो अमित को मौका मिल गया।
अमित ने प्रिया से कहा, “तुम खाना बनाना छोड़ो, मैं करूंगा। तुम गल्ले पर बैठो।” जब प्रिया बाथरूम गई तो अमित ने गल्ले से पैसे निकालकर प्रिया के बैग में छुपा दिए।
शाम को सेठ आया तो गल्ले में पैसे कम थे। उसने अमित पर शक किया। अमित ने चालाकी से कहा, “मालिक, मेरी तलाशी ले लो। पैसे तो प्रिया के पास होंगे।”
सेठ और अमित प्रिया के घर गए। प्रिया के बैग में पैसे मिले। सब हैरान रह गए। प्रिया रोकर कहने लगी कि वह निर्दोष है। लेकिन सेठ ने रामकृष्ण को काम से निकाल दिया। रामकृष्ण ने गुस्से में प्रिया को घर से निकाल दिया।
प्रिया ने रोते हुए माँ दुर्गा से प्रार्थना की, “हे माँ, मैंने श्रद्धा से व्रत रखा है। मेरी सच्चाई सबके सामने लाओ।”
रात को माँ दुर्गा अमित के सपने में आई और कहा, “दुष्ट! तूने मेरी भक्त को सताया है। जल्दी अपना गुनाह कबूल कर, नहीं तो भुगतना पड़ेगा।”
अगले दिन ढाबे में एक पुलिसकर्मी खाना खाने आया। वह अपनी घड़ी और फोन टेबल पर रखकर हाथ धोने गया। वापस आने पर सामान गायब था। अमित की जेब से घड़ी और फोन गिरे। पुलिसकर्मी ने अमित को बुरी तरह पीटा।
अमित को माँ दुर्गा की बात याद आई। वह रोते हुए सेठ के पास गया और सच कबूल किया। उसने बताया कि उसने ही पैसे चुराकर प्रिया के बैग में रखे थे।
सेठ गुस्से में प्रिया के घर गया। उसने रामकृष्ण से माफी मांगी और काम पर वापस आने को कहा। तभी माँ दुर्गा प्रकट हुई और अपने हाथ से उनके छोटे घर को भव्य महल में बदल दिया।
सच्ची भक्ति और धैर्य का फल हमेशा मिलता है। माँ दुर्गा अपने सच्चे भक्तों की रक्षा करती हैं।

