एक समय की बात है, अकबर के दरबार में एक धनवान सेठ आया। उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थीं। वह बीरबल के समक्ष अपनी समस्या लेकर उपस्थित हुआ। सेठ ने कहा, “महाराज, मेरे घर में कोई नौकर चोरी कर रहा है। मैं बहुत परेशान हूं क्योंकि मुझे नहीं पता कि वास्तव में चोर कौन है।”
सेठ ने आगे बताया कि उसके घर में पांच नौकर काम करते हैं और सभी बहुत ईमानदार लगते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसके घर से पैसे और कीमती सामान गायब होते जा रहे हैं। उसने कई बार सभी नौकरों से पूछा था, लेकिन किसी ने भी अपना गुनाह कबूल नहीं किया था। सेठ ने बीरबल से प्रार्थना की कि वे उसकी मदद करें और सच्चे चोर को पकड़ने में उसका साथ दें।
बीरबल ने सेठ की बात ध्यान से सुनी। उनकी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध बीरबल ने तुरंत एक चतुर योजना सोची। वे जानते थे कि अपराधी का मन हमेशा डरा हुआ रहता है और वह किसी भी तरह से अपने को बचाने की कोशिश करता है। बीरबल ने सेठ से कहा कि वे कल सुबह उसके घर आएंगे और इस समस्या का समाधान करेंगे।
अगले दिन बीरबल सेठ के घर पहुंचे। उन्होंने सभी पांच नौकरों को एक कमरे में बुलाया। सभी नौकरों के चेहरे पर घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। बीरबल ने अपने पास से पांच समान लंबाई की लकड़ी की छड़ियां निकालीं। प्रत्येक छड़ी की लंबाई लगभग एक फुट थी।
बीरबल ने सभी नौकरों से कहा, “ये छड़ियां जादुई हैं। अगर आप में से कोई चोर है, तो कल सुबह तक उसकी छड़ी तीन इंच बढ़ जाएगी। आप सभी इन छड़ियों को अपने पास रखें और कल सुबह मुझे दिखाएं।” सभी नौकरों ने छड़ियां ले लीं और अपने-अपने घर चले गए।
उस रात चोर नौकर बहुत परेशान हो गया। उसे लगा कि अगर छड़ी तीन इंच बढ़ गई तो वह पकड़ा जाएगा। डर के कारण उसने सोचा कि अगर वह छड़ी को तीन इंच छोटा कर दे, तो सुबह छड़ी के बढ़ने के बाद भी वह दूसरों के बराबर हो जाएगी। रात भर सोचने के बाद उसने छड़ी को तीन इंच काट दिया।
अगली सुबह जब सभी नौकर अपनी छड़ियों के साथ आए, तो बीरबल ने देखा कि चार नौकरों की छड़ियां तो समान लंबाई की थीं, लेकिन एक नौकर की छड़ी तीन इंच छोटी थी। बीरबल मुस्कराए और तुरंत समझ गए कि यही व्यक्ति चोर है।
बीरबल ने उस नौकर की ओर इशारा करते हुए कहा, “तुम्हीं चोर हो। तुमने डर के कारण अपनी छड़ी काट दी थी क्योंकि तुमको लगा कि वह बढ़ जाएगी।” चोर नौकर का चेहरा पीला पड़ गया और उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। उसने सेठ से माफी मांगी और चुराए गए सभी सामान वापस करने का वादा किया।
सेठ बीरबल की बुद्धिमत्ता से बहुत प्रभावित हुआ। उसने बीरबल को धन्यवाद दिया और उनकी चतुराई की प्रशंसा की। इस प्रकार बीरबल ने बिना किसी जांच-परख के केवल अपनी बुद्धि से चोर को पकड़ा।
सच्चाई हमेशा सामने आती है। चाहे कितनी भी चालाकी की जाए, सत्य को छुपाया नहीं जा सकता।

