मोली एक दूधवाली थी जो गाँव में रहती थी। उसका काम था गायों का दूध दुहना और बाज़ार में बेचना। मोली बहुत सपने देखने वाली लड़की थी। वह हमेशा सोचती रहती थी कि जब उसके पास पैसे होंगे तो वह क्या-क्या खरीदेगी। लेकिन अभी तक उसके पास वे पैसे नहीं थे जिनके बारे में वह सपने देखती थी। एक सुनहरी सुबह, मोली अपनी बाल्टी में ताज़ा दूध भरकर बाज़ार जा रही थी। बाल्टी एकदम भरी हुई थी और दूध की सफ़ेदी धूप में चमक रही थी। रास्ते में चलते-चलते उसने एक मुर्गी को देखा जो अपने चूज़ों के साथ दाना चुग रही थी। मुर्गी को देखते ही मोली के मन में एक नया सपना आया। “अरे वाह!” मोली ने मन में सोचा, “अगर मैं इस दूध को बेचकर एक मुर्गी खरीद लूँ तो कितना अच्छा होगा! मुर्गी रोज़ अंडे देगी और मैं उन अंडों को बेचकर और भी पैसे कमा सकूँगी।” वह चलते-चलते और भी बड़े सपने देखने लगी। “हाँ, जब मेरे पास बहुत सारे अंडे होंगे तो मैं उन्हें बाज़ार में ले जाकर बेचूँगी। फिर उन पैसों से और भी मुर्गियाँ खरीदूँगी। जल्दी ही मेरे पास मुर्गियों का पूरा झुंड होगा!” मोली का सपना और भी बड़ा होता जा रहा था। वह सोचने लगी कि जब उसके पास बहुत सारी मुर्गियाँ होंगी तो गाँव की दूसरी लड़कियाँ उससे कितनी जलेंगी। वे सब उसकी तरफ़ देखकर कहेंगी, “देखो, मोली कितनी अमीर हो गई है! उसके पास दूध का धंधा भी है और मुर्गियों का भी!” इन सपनों में खो जाने से मोली बहुत उत्साहित हो गई थी। वह अपनी सफलता के सपने में इतनी मगन हो गई कि वह भूल गई कि वह सिर पर दूध की बाल्टी लिए जा रही है। अचानक उसने अपना सिर झटका दिया और खुशी में उछलने लगी। “मैं कितनी अमीर हो जाऊँगी!” वह बोली और खुशी में उछली। लेकिन यह क्या! उसके सिर पर रखी दूध की बाल्टी लुढ़क गई और सारा दूध ज़मीन पर बिखर गया। सफ़ेद दूध मिट्टी में मिल गया और मोली के सारे सपने पल भर में टूट गए। मोली अपनी खाली बाल्टी को देखकर रोने लगी। अब उसके पास न तो दूध था, न पैसे थे, और न ही मुर्गी खरीदने का कोई तरीका था। उसके सारे सपने धूल में मिल गए थे। निराश होकर मोली खाली बाल्टी लेकर घर वापस गई। घर पहुँचकर उसकी माँ ने पूछा, “मोली, तुम इतनी जल्दी क्यों वापस आ गईं? और यह बाल्टी खाली क्यों है? दूध कहाँ गया?” मोली ने अपनी माँ को पूरी कहानी सुनाई। उसने बताया कि कैसे वह मुर्गी खरीदने के सपने में खो गई थी और कैसे उसकी लापरवाही से सारा दूध बर्बाद हो गया था। माँ ने प्यार से मोली को समझाया, “बेटी, सपने देखना बुरी बात नहीं है, लेकिन हकीकत को भूलकर केवल सपनों में खो जाना ठीक नहीं। जब तक अंडे न फूटें, तब तक चूज़ों की गिनती नहीं करनी चाहिए। पहले जो काम तुम्हारे हाथ में है, उसे पूरा करो, फिर आगे की सोचो।” मोली को अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने सीखा कि सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन वर्तमान की जिम्मेदारियों को भूलकर केवल भविष्य के सपनों में खो जाना नुकसानदायक हो सकता है। जो चीज़ें अभी तक मिली नहीं हैं, उनकी गिनती पहले से न करें। पहले अपने वर्तमान के कामों पर ध्यान दें, फिर भविष्य की योजना बनाएं। धैर्य और मेहनत से ही सफलता मिलती है, केवल सपने देखने से नहीं।

