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चतुर कौआ

Posted on July 29, 2025July 29, 2025 by Kahani Ki Duniya

गर्मियों का समय था। सूरज अपनी पूरी शक्ति से आकाश में चमक रहा था। धरती झुलस रही थी और हवा में गर्मी की लहरें तैर रही थीं। पेड़-पौधे, जानवर-पक्षी सभी इस भीषण गर्मी से परेशान थे। पानी की एक-एक बूंद अमृत के समान कीमती लग रही थी।

इसी गर्मी में एक काला कौआ अपने घोंसले से भोजन की तलाश में निकला था। वह सुबह से ही इधर-उधर उड़ रहा था, लेकिन उसे कहीं भी भोजन नहीं मिला था। धीरे-धीरे दिन चढ़ता गया और गर्मी बढ़ती गई। कौए की सांस तेज़ होने लगी और उसका गला सूखने लगा। अब उसे भोजन से कहीं ज्यादा पानी की ज़रूरत महसूस होने लगी।

कौआ इधर-उधर उड़ता रहा, अपनी तेज़ आंखों से पानी की तलाश करता रहा। वह नदी-नाले, तालाब-कुएं सभी जगह गया, लेकिन हर जगह पानी सूख चुका था। गर्मी की वजह से सभी जल स्रोत खत्म हो गए थे। कौआ बहुत परेशान हो गया। उसकी जीभ सूख रही थी, गला जल रहा था, और सांस लेना मुश्किल हो रहा था।

निराश होकर कौआ एक पुराने बगीचे में आकर बैठ गया। यह बगीचा कभी हरा-भरा रहा होगा, लेकिन अब यहां सिर्फ सूखे पेड़ और मुरझाए हुए पौधे ही दिखाई दे रहे थे। बगीचे के बीच में एक पुराना मकान था, जो अब वीरान पड़ा था। लगता था कि महीनों से यहां कोई नहीं आया था।

कौआ उम्मीद छोड़ चुका था, लेकिन फिर उसकी नज़र मकान के बरामदे में रखे एक घड़े पर पड़ी। घड़ा मिट्टी का बना हुआ था और उसका मुंह संकरा था। कौए के मन में एक किरण उम्मीद जगी। वह तुरंत उड़कर घड़े के पास गया और अंदर झांकने लगा।

जैसे ही कौए ने घड़े के अंदर देखा, उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। घड़े में पानी था! हालांकि पानी बहुत कम था और घड़े की तली में था, लेकिन फिर भी यह कौए के लिए किसी खजाने से कम नहीं था। उसे लगा जैसे उसकी सभी समस्याओं का समाधान मिल गया हो।

लेकिन खुशी कुछ ही क्षणों की थी। जब कौए ने पानी पीने की कोशिश की, तो उसे एहसास हुआ कि समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। घड़े का मुंह बहुत छोटा था और पानी इतना नीचे था कि उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुंच रही थी। उसने कई बार कोशिश की, अपनी गर्दन को घड़े में जितना अंदर डाल सकता था डाला, लेकिन पानी उसकी पहुंच से बाहर ही रहा।

कौआ निराश हो गया। पानी उसकी आंखों के सामने था, लेकिन वह उसे पी नहीं सकता था। यह स्थिति किसी सजा से कम नहीं थी। वह घड़े के चारों ओर चक्कर लगाने लगा, इधर-उधर से देखने लगा, लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।

थोड़ी देर बाद कौए ने सोचा कि क्यों न घड़े को गिराकर पानी निकाला जाए। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर घड़े को धक्का देने की कोशिश की, लेकिन घड़ा बहुत भारी था और वह हिला भी नहीं। कौए की सारी शक्ति व्यर्थ गई।

फिर कौए के मन में एक और विचार आया। उसने सोचा कि अगर वह घड़े में कोई लकड़ी डाल दे, तो शायद उससे पानी पी सकेगा। उसने चारों ओर देखा और एक सूखी टहनी मिली। उसने टहनी को घड़े में डाला, लेकिन टहनी पानी में डूब गई और कोई फायदा नहीं हुआ।

कौआ बहुत परेशान हो गया। वह घड़े के पास बैठकर सोचने लगा। गर्मी बढ़ती जा रही थी और उसकी हालत खराब होती जा रही थी। अचानक उसकी नज़र घड़े के पास पड़े छोटे-छोटे कंकड़ों पर पड़ी।

कौए के दिमाग में एक विचार कौंधा। उसने सोचा कि अगर वह इन कंकड़ों को घड़े में डाल दे, तो शायद पानी का स्तर बढ़ जाएगा। यह विचार उसे बहुत अच्छा लगा। उसने तुरंत एक कंकड़ उठाया और घड़े में डाल दिया।

‘छप्प!’ की आवाज़ हुई और कंकड़ पानी में गिर गया। कौए ने ध्यान से देखा और उसे लगा कि पानी का स्तर थोड़ा सा बढ़ा है। उसकी उम्मीदें बढ़ गईं। उसने एक और कंकड़ उठाया और घड़े में डाल दिया। फिर एक और, और एक और।

कौआ बहुत मेहनत से काम करने लगा। वह एक-एक करके कंकड़ उठाता और घड़े में डालता जाता। धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता जा रहा था। हर कंकड़ के साथ पानी थोड़ा और ऊपर आ जाता था।

यह काम आसान नहीं था। कंकड़ छोटे थे और उनका प्रभाव भी कम था। कौए को लगातार मेहनत करनी पड़ी। गर्मी की वजह से वह थक भी रहा था, लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह जानता था कि यही एकमात्र रास्ता है।

कौआ घंटों तक काम करता रहा। उसने पचास, साठ, सत्तर कंकड़ डाले होंगे। उसकी चोंच दुखने लगी थी, पंख थक गए थे, लेकिन वह रुका नहीं। उसकी मेहनत रंग लाने लगी थी। पानी का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था।

आखिरकार वह घड़ी आई जिसका कौआ इंतज़ार कर रहा था। जब उसने अपनी चोंच घड़े में डाली, तो वह पानी तक पहुंच गई! कौए की खुशी का कोई ठिकाना न था। उसने मीठे, ठंडे पानी की पहली घूंट ली और उसे लगा जैसे उसकी जान में जान आ गई हो।

कौआ आराम से पानी पीता रहा। हर घूंट के साथ उसकी थकान दूर होती जा रही थी। उसका सूखा गला तर हो गया, उसकी प्यास बुझ गई। वह बहुत खुश था कि उसने हार नहीं मानी और अपनी बुद्धि का उपयोग करके समस्या का समाधान निकाला।

पानी पीने के बाद कौआ घड़े के पास बैठकर आराम करने लगा। वह अपनी सफलता पर बहुत गर्व महसूस कर रहा था। उसने सोचा कि कैसे एक छोटी सी चीज़ – कंकड़ – ने उसकी इतनी बड़ी समस्या का समाधान कर दिया। उसे एहसास हुआ कि बुद्धि और धैर्य से कोई भी मुश्किल काम किया जा सकता है।

इस घटना से कौए ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा। उसे पता चला कि जब कोई समस्या आए तो घबराना नहीं चाहिए, बल्कि शांति से सोचकर समाधान ढूंढना चाहिए। छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़े काम आ सकती हैं। धैर्य और मेहनत से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है।

कौआ उस दिन के बाद और भी समझदार हो गया। जब भी उसे कोई समस्या आती, वह पहले शांति से सोचता, फिर समाधान की तलाश करता। उसकी इस बुद्धिमानी की वजह से वह जंगल में एक चतुर और समझदार पक्षी के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि संकट के समय में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। धैर्य, मेहनत और बुद्धि से हर समस्या का समाधान मिल सकता है। छोटे-छोटे प्रयास भी मिलकर बड़े काम कर सकते हैं। जैसे कौए ने छोटे-छोटे कंकड़ों से अपनी बड़ी समस्या का समाधान निकाला, वैसे ही हम भी अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से बड़ी सफलता पा सकते हैं।

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Category: Moral Stories

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