Skip to content
Kahani Ki Duniya
Menu
  • Home
  • Stories
    • Bedtime Stories
    • Fairy Tales
    • Inspirational Stories
    • Magic & Fantasy
    • Moral Stories
  • Folk Tales
  • YouTube Channel
  • About
  • Contact
    • गोपनीयता नीति (Privacy Policy)
    • Disclaimer Page (डिस्क्लेमर पेज)
    • Terms of Use / Terms and Conditions Page (उपयोग की शर्तें)
Menu
Whisk 5ec3dc2696c7f358d2f4c936dd1683b4dr

सुनीता की आखिरी रात — Uss Ghar Ka Khooni Raaz | Hindi Horror Story 😱

Posted on April 22, 2026 by Kahani Ki Duniya

हर घटना के पीछे एक कहानी या कोई राज छुपा होता है जो आसानी से आंखों के सामने नहीं आता। इस छोटे से शहर में भी एक ऐसा ही घर था जो अपने ही अंदर ना जाने कितने सारे राज दबाए हुए था।
सुनीता पिछले ढाई महीनों से इस घर में केयरटेकर का काम कर रही है। उसका यहां ज्यादा कुछ काम नहीं रहता है। बस मिस्टर साहनी को टाइम पर खाना और दवाइयां देना रहता है और उनकी थोड़ी बहुत साफ सफाई का ध्यान रखना होता है।
अंकल आपका खाना आ गया है।
पिछले सात सालों से मिस्टर साहानी पूरी तरह से पैरालाइज्ड है।
मुंह खोलिए अंकल। आ करिए।
वो खुद से बिस्तर से भी नहीं उठ पाते हैं। इसीलिए उनकी बेटी प्रियंका ने
आ करिए।
सुनीता को काम पर रखा था।
क्या हुआ? भूख नहीं है।
सुनीता उस घर में ढाई महीने से काम कर रही थी। मगर अब भी वह इस बात से अनजान थी कि उस घर में प्रियंका और उसके पापा के अलावा कोई और भी रहता है।
उन्हें खाना और दवाइयां खिलाकर सुनीता उस कमरे से बाहर जाने लगती है। मगर शायद मिस्टर शहानी उसे कुछ कहना चाहते थे जो वह कभी कह नहीं पाए।
हेलो
हां हेलो मैडम
सब काम हो गया है मैडम मैं निकलूं क्या?
सुनीता आज रात के लिए तुम रुक जाओगी क्या? मेरा एक अर्जेंट मीटिंग आ गया है। मैं सुबह 4:00 बजे तक आ जाऊंगी।
पर मैडम
अरे तुम गेस्ट रूम में सो जाना और पापा को रात में किसी की जरूरत नहीं होती है तो तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी। अर्जेंट नहीं होता तो मैं खुद ही नहीं बोलती तुम्हें। अच्छा अच्छा ठीक है मैडम। ठीक।
सुनीता का रात में उस घर में रुकने का जरा भी मन नहीं था। मगर पहली बार प्रियंका ने उससे इतना रिक्वेस्ट किया था। इसीलिए वह उसकी बात टाल नहीं सकी और उस रात वहीं रुक गई। फिर भी उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी। बिस्तर पर लेटते ही कुछ ही समय में उसकी आंख लग गई और अब रात के 1:00 बज रहे थे।
गहरे सन्नाटे को चीरता हुआ वो आवाज सुनीता को जगा देता है।
वो दरवाजा खोल कर देखती है तो आसपास कोई नहीं था। मगर वो देखती है कि वहां जमीन पर एक घड़ी पड़ा हुआ था।
यह देखकर उसे अजीब लगा कि टेबल पर रखी हुई घड़ी उसके दरवाजे पर इतनी तेज कैसे टकराई जबकि उसके अलावा उस घर में सिर्फ मिस्टर सहानी ही थे जो कि खुद से उठ भी नहीं सकते थे। सुनीता मेन दरवाजे के पास जाकर देखती है तो दरवाजा अच्छी तरह से लॉक था।
दरवाजा तो बंद है।
वो अंकल के कमरे की तरफ जाने लगती है चेक करने के लिए कि मिस्टर साहनी सही सलामत है या नहीं।
जब वो उनके कमरे में जाती है तो उन्हें बैठा देख वो एकदम से चौंक जाती है क्योंकि जब से वह काम कर रही थी आज तक वो खुद से बिस्तर से उठ नहीं पाए थे। और अचानक से ऐसे बैठा देख वो घबरा गई और उसने तुरंत ही यह बात बताने के लिए प्रियंका को फोन लगाया।
हेलो हेलो मैडम वो अंकल उठकर बैठे हुए हैं। लगता है वो ठीक हो गए हैं। आप जल्दी से घर आ जाइए। हेलो आपकी आवाज नहीं आ रही है। मैडम हेलो
सुनीता प्रियंका को सब बता देती है। मगर प्रियंका की तरफ से कोई सीधा जवाब नहीं आया क्योंकि प्रियंका नेटवर्क क्षेत्र से बाहर थी।
जब सुनीता वापस उनके कमरे में गई तो मिस्टर शहानी विंडो के पास बिना किसी के सहारे खड़े हुए थे। यह देखकर सुनीता और भी ज्यादा डर गई।
मैडम से बात हुई है। वो आ रही हैं। अंकल आप सो जाइए ना। बस थोड़ी देर आप आराम करिए। वो आ जाएंगी।
सो जाइए। ये बुड्ढा तो 7 साल से पैरालाइज है। आज अपने आप कैसे ठीक हो गया?
सुनीता उन्हें बिस्तर पर तो सुला देती है मगर अब भी यह सवाल सुनीता के मन को बेचैन कर रहा था कि अचानक से वो कैसे पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।
वो अपने कमरे में आ जाती है। पर अंदर ही अंदर उसे डर जैसा महसूस हो रहा था।
उसके दिमाग में यही चल रहा था कि बिना मतलब वो वहां रुक गई और फालतू की मुसीबत अपने सर मोल ले ली। इतने में ही दोबारा दरवाजे पर दस्तक हुई।
अंकल
अपने रूम में चलिए अंकल। मैडम से बात हुई है। वो आ रही हैं। आप सो जाइए ना। बस थोड़ी देर आप आराम करिए। वो आ जाएंगी।
चलिए
जैसे ही सुनीता उनके कमरे में घुसी वो 16 साल पहले जो हुआ था उसका साफ दृश्य देख पा रही थी।
पापा बोल रहे थे कि आप मुझे छोड़कर चली जाओगी।
क्या पढ़ने वाली हो?
मैं तुम्हें छोड़कर कभी नहीं जाऊंगी।
तुम चाहोगी फिर भी मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी।
मैं यहीं इसी घर में रहूंगी हमेशा हमेशा के लिए।
प्रियंका की बीमार मां मर तो जाती है मगर अपना वादा नहीं भूलती और तब से वो उसी घर में रहती थी।
वो कौन है?
सुनीता की आंखों के सामने अभी जो कुछ भी हुआ था उसे हजम करना बहुत मुश्किल था। मगर वो इतना समझ चुकी थी कि उस घर में एक पल भी और रहना अपनी मौत को दावत देना था। दौड़ते हुए सुनीता दरवाजे तक पहुंची। और जब उसने दरवाजा खोलना चाहा तो वो खुला ही नहीं।
उसे क्या पता था कि उसको मारने की कितनी बुरी साजिश की गई है। दरवाजे में बाहर से ताला लगा हुआ था। इतने में ही उसे पीछे से एक आवाज सुनाई दी। उसने मुड़ कर देखा तो अंकल एक बड़ी सी कुल्हाड़ी लिए नीचे उसकी तरफ आ रहे थे। घबराई हुई सुनीता तुरंत वहां से भागी और अपने कमरे में जाकर उसने अंदर से दरवाजा लॉक कर लिया।
उसके दिमाग में इस वक्त हजारों सवाल चल रहे थे कि आखिर उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है? पर जब उसने खिड़की पर भी कील ठुका हुआ देखा तो उसका दिमाग सुन्न हो गया। क्योंकि अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था।
उन बूढ़े आंखों में वो अजीब सी चमक साफ-साफ बता रही थी कि वो किसी के वश में है और वो कोई और नहीं उनकी पत्नी की रूह थी। यह सब बातें सुनीता को भी समझ आ रही थी। मगर उसके पास भागने का अब कोई रास्ता नहीं था।
वो उस पर कुल्हाड़ी से हमला कर देते हैं और सुनीता बच जाती है और वहां से भागने लगती है और तभी दीवार में फंसी वो कुल्हाड़ी बाहर निकल जाती है और वो उस धारदार कुल्हाड़ी को सीधा सुनीता के सर में दे मारता है। मौके पर ही उसकी मौत हो जाती है।
सुनीता को मार के और उसकी बलि को खाकर वो उस बेबस बुड्ढे को उसके कमरे में ले आती है।
और फिर से उसी पैरालिसिस की हालत में बिस्तर पर छोड़ देती है।
16 साल पहले जब प्रियंका की मां की मौत हुई थी। उससे कुछ ही समय पहले उसने कुछ काली विद्या सीख ली थी। जिसकी वजह से वह हमेशा के लिए उनके साथ रह सकती थी। बस उसे हर साल किसी की बलि चाहिए होती थी।
और उसके शिकार अक्सर ही भोलेभाले नौकर होते थे। जिन्हें पैसों की बहुत जरूरत होती थी।
सुबह के 4:00 बज जाते हैं। प्रियंका वापस घर लौटती है।
गाड़ी को पार्क करके वो दरवाजे की तरफ मुड़ती है तो वो देखती है कि अभी ताला लगा हुआ था।
वो उसे खोलती है और घर के अंदर जाने लगती है। उसके घुसते ही अंदर से खून की एक तेज महक उस तक पहुंचती है।
सुनीता
वो समझ जाती है
सुनीता
कि काम हो चुका था।
कहां हो तुम?
सुनीता।
प्रियंका बेजान से पड़ी उस सुनीता की लाश के करीब जाती है।
मुझे पता था
वो भी उसके खून से अपना हाथ भिगोती है।
पापा कभी डिसपॉइंट नहीं करते।
वो अपने पापा के कमरे की ओर जाने लगती है। दरवाजा खोलती है।
उसके पापा सोए हुए थे।
कुछ समय तक उन्हें निहारने के बाद वो खुद उनके करीब जाती है और उनके बगल में ही सो जाती है।
उन दर्जनों मासूमों की बलि देकर आज भी साहानी परिवार पहले की ही तरह पूरा था।
थैंक यू सो मच गाइस फॉर वाचिंग दिस वीडियो। अगर आपने यहां तक देखा है, तो मेक श्योर कि आप हमारा चैनल सब्सक्राइब करके जा रहे हो। क्योंकि इन वीडियोस को बनाने में बहुत मेहनत लगती है और हमारा बहुत समय जाता है।

Post Views: 50
Category: Stories

Post navigation

← “20 साल पहले गायब हुआ लड़का — Next Summer फिर आऊंगा… 👁️ | Haunted Camp”
जंगल की रात में सिर कटी चुड़ैल ने किया दोस्त का खून || Headless Woman || Horror Night →

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • अंधकूप की सच्चाई 😨 | 5 दिन की काली विधि ने ज़िंदगी बदली… या जान ले ली? Horror Story
  • मेघना का खूनी सपना 😱 | हॉन्टेड महल की भयानक सच्चाई | The Haunted Dancer Would Not Let Her Go 👻
  • जंगल की रात में सिर कटी चुड़ैल ने किया दोस्त का खून || Headless Woman || Horror Night
  • सुनीता की आखिरी रात — Uss Ghar Ka Khooni Raaz | Hindi Horror Story 😱
  • “20 साल पहले गायब हुआ लड़का — Next Summer फिर आऊंगा… 👁️ | Haunted Camp”

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025

Categories

  • Bedtime Stories
  • Fairy Tales
  • Folk Tales
  • Inspirational Stories
  • Magic & Fantasy
  • Moral Stories
  • Stories
© 2026 Kahani Ki Duniya | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme