एक गाँव में रामप्रसाद नाम का एक किसान रहता था। उसके पास दो बैल थे – शेरू और बद्री। दोनों बैल बहुत स्वस्थ और मजबूत थे। बद्री कई सालों से रामप्रसाद के लिए काम कर रहा था। उसने अपने मालिक की बहुत मदद की थी। दोनों बैल बहुत मेहनती थे, लेकिन बद्री शेरू से उम्र में बड़ा था। अब वह पहले की तरह लंबे समय तक कठिन परिश्रम नहीं कर सकता था। थोड़ा सा काम करने के बाद ही वह थक जाता था। कभी-कभी जब वह खेत में काम करते हुए थक जाता, तो बैठ जाता था।
रामप्रसाद को अपने बैलों से बहुत लगाव था। उसे बद्री से कठिन परिश्रम करवाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। उसने सोचा कि अगर वह बद्री को आजाद कर दे, तो वह अपना बाकी जीवन खुशी से बिता सकेगा। एक दिन रामप्रसाद बद्री को लेकर गाँव से बाहर निकल गया। जंगल की ओर जाते हुए बद्री ने अपने मालिक के साथ अपनी भावनाएं साझा कीं।
रामप्रसाद ने प्यार से कहा, “बद्री, तुमने इतने सालों में मेरी बहुत मदद की है। तुमने ईमानदारी से अपना काम किया है। अब तुम बूढ़े हो गए हो और मुझे तुमसे मेहनत करवाना पसंद नहीं है। इसलिए मैं तुम्हें आजाद कर रहा हूँ ताकि तुम अपना बाकी जीवन आराम से बिता सको। मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद।”
बद्री भावुक हो गया। वह आजाद नहीं होना चाहता था। वह दुखी था। वह रामप्रसाद के साथ घर वापस जाना चाहता था। वह अपना बाकी जीवन अपने मालिक के साथ बिताना चाहता था। लेकिन फिर उसने सोचा कि अब उसे अपना ध्यान खुद रखना होगा। वह अपने मालिक पर बोझ नहीं बन सकता। रामप्रसाद ने आज तक उसकी बहुत प्यार से देखभाल की है। अब उसके लिए उसके खर्च उठाना संभव नहीं होगा।
बद्री ने रामप्रसाद को गले लगाया। रामप्रसाद ने भी उसके स्नेह का जवाब दिया। उसने उसे अलविदा कहा और वापस घर चला गया। बद्री जंगल में रहने के लिए एक सुरक्षित जगह खोजने लगा। उसे अपने लिए भोजन भी खोजना था। कुछ देर चलने के बाद बद्री को एक गुफा मिली। गुफा के आसपास बहुत सारी हरी घास थी। पास में एक झील भी थी। बद्री बहुत खुश हुआ। उसे बहुत सारे भोजन के साथ एक आश्रय मिल गया था।
फिर भी बद्री सावधानी से गुफा के अंदर गया। अंदर कोई नहीं था। बद्री वहाँ खुशी से रहने लगा। एक दिन उसने एक विशाल शेर को गुफा की ओर आते हुए देखा। बद्री डर गया। वह घबरा गया, लेकिन उसने एक योजना सोची। जैसे ही शेर गुफा के पास आया, बद्री ने गहरी आवाज में उससे बात की।
“सुनो मेरी जंगल की नई रानी! आज हम दावत का आनंद लेने वाले हैं। एक शेर इस गुफा की ओर आ रहा है। जैसे ही वह गुफा में प्रवेश करेगा, मैं उसे अपने तेज सींगों से हमला करूंगा और उसे जमीन पर गिरा दूंगा। उस पर कूद जाओ। फिर हम उसकी दावत उड़ाएंगे। तैयार हो जाओ। वह जल्द ही यहाँ होगा।”
यह सुनकर शेर डर गया। वह वापस भागने लगा। एक चालाक लोमड़ी ने उसे तेज गति से भागते हुए देखा और उससे कारण पूछा।
“तुम इतने डरे हुए क्यों हो और कहाँ जा रहे हो?”
शेर ने कहा, “आगे एक गुफा है। उसके अंदर एक खतरनाक जानवर है। वह बहुत विशाल है। उसके बड़े-बड़े सींग हैं। वह मुझे मारना चाहता था।”
शेर की बात सुनकर लोमड़ी हंसने लगी। “कोई भी जानवर तुम्हें डरा नहीं सकता। मेरे साथ चलो। तुम ही उसका शिकार कर सकते हो।”
शेर ने कहा, “नहीं, मैं कहीं नहीं जाना चाहता। अगर वह जानवर हम पर हमला करता है, तो तुम भाग जाओगी और मैं वहीं फंस जाऊंगा।”
लोमड़ी ने कहा, “नहीं, मैं नहीं भागूंगी। अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है, तो चलो हम अपनी पूंछें एक साथ बांध लेते हैं। अगर वह हम पर हमला करता है, तो तुम मुझे उस जानवर के सामने फेंक सकते हो।”
लोमड़ी और शेर गुफा के पास पहुंचे। बद्री ने अनुमान लगा लिया कि क्या हुआ होगा। वह चालाक लोमड़ी की योजना समझ गया। उसने एक नई योजना सोची।
बद्री ने जोर से कहा, “यह क्या है? तुम मेरे लिए केवल एक शेर लाई हो? मैंने तुमसे दो शेर लाने के लिए कहा था। मेरा परिवार और मैं बहुत भूखे हैं। एक शेर हमारी भूख मिटाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।”
जैसे ही शेर ने बद्री के शब्द सुने, वह विपरीत दिशा में भागने लगा। वह लोमड़ी को अपने साथ घसीटता हुआ ले गया। बद्री बहुत खुश हुआ।
उसी गाँव में एक दूधवाला रहता था जिसका नाम गोपाल था। उसके पास बहुत सारी भैंसें थीं। वह अपनी भैंसों का बहुत ख्याल रखता था। वह अलग-अलग गाँवों में उनका दूध बेचता था। वह बहुत ईमानदार था। वह दूसरे दूधवालों की तरह दूध में पानी नहीं मिलाता था। इसलिए गाँव वाले उससे ही दूध खरीदना पसंद करते थे। उसके ग्राहकों की संख्या बढ़ गई। उसके पास दूध की कमी होने लगी। कभी-कभी वह अपने सभी ग्राहकों को दूध नहीं दे पाता था।
एक दिन एक बच्चे ने पूछा, “चाचा, क्या मुझे आधा लीटर दूध मिलेगा?”
गोपाल ने कहा, “बेटा, मेरे पास दूध नहीं बचा है। खत्म हो गया है।”
दूधवाले ने अपने सभी ग्राहकों की जरूरत पूरी करने के लिए एक और भैंस खरीदने का फैसला किया। वह पैसे लेकर भैंस खरीदने गया। भैंस के तबेले में पहुंचकर उसने कहा, “भाई, मुझे एक भैंस खरीदनी है।”
विक्रेता ने कहा, “आप कौन सी भैंस खरीदना चाहेंगे? आप वह भैंस खरीद सकते हैं।”
दूधवाले ने भैंसों को ध्यान से देखा। उसने एक बड़ी काली भैंस चुनी। “मैं यह भैंस खरीदना चाहता हूँ।”
विक्रेता ने कहा, “आप बहुत चतुर हैं। आपने वह भैंस चुनी जो रोजाना 6-7 लीटर दूध देती है। यह भैंस दिन में दो बार दूध देती है। अगर आप यह भैंस खरीदते हैं तो आपको बहुत लाभ होगा।”
गोपाल ने भैंस का दाम चुकाया और भैंस लेकर चला गया। घर पहुंचने के लिए उसे जंगल से गुजरना था। अचानक एक चोर दूधवाले के सामने प्रकट हुआ। चोर के हाथ में एक लाठी थी।
चोर ने कहा, “मुझे भैंस दे दो नहीं तो मैं लाठी से तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा।”
दूधवाले ने थोड़ी देर सोचा और फिर कहा, “ठीक है, भाई। भैंस ले लो।”
चोर ने कहा, “तुम बहुत मूर्ख हो। तुम डर गए और मुझे अपनी भैंस दे दी।”
चोर खुशी-खुशी भैंस लेकर जाने ही वाला था कि दूधवाले ने कहा, “तुमने मेरी भैंस ले ली है। कृपया मुझे अपनी लाठी दे दो। मैं खाली हाथ घर कैसे जाऊं?”
चोर ने सोचा कि वह अपनी लाठी उसे दे देगा। “तुम बहुत बेवकूफ हो। लाठी ले लो। भाग जाओ यहाँ से।”
जैसे ही दूधवाले को लाठी मिली, उसने लाठी से चोर को धमकाया और कहा, “मुझे मेरी भैंस दे दो नहीं तो मैं इस लाठी से तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा।”
चोर को अपनी मूर्खता का एहसास हुआ। “यह रहा तुम्हारा भैंस। मुझे मेरी लाठी वापस दे दो।”
गोपाल ने कहा, “यहाँ से भाग जाओ नहीं तो मैं तुम्हें इस लाठी से बुरी तरह पीटूंगा और तुम्हें पुलिस स्टेशन ले जाऊंगा।”
चोर डर गया और भाग गया। दूधवाला खुशी-खुशी भैंस के साथ घर लौट आया।
बुद्धिमत्ता और सूझबूझ शक्ति से अधिक प्रभावी होते हैं। मुश्किल परिस्थितियों में शांत दिमाग से सोचना और चतुराई से काम लेना हमें विजयी बना सकता है।

