आज मकर संक्रांति का पावन पर्व था। सुबह-सुबह राज और टीना जल्दी उठ गए। मम्मी-पापा भी तैयार हो गए थे। घर में खुशी का माहौल था। सभी ने पीले रंग के कपड़े पहने हुए थे, जो इस त्योहार का पारंपरिक रंग है।
“मम्मी-पापा, चलो जल्दी से सोसाइटी में पतंग उड़ाने चलते हैं,” टीना ने उत्साह से कहा।
“हाँ बेटा, मैं भी बहुत उत्साहित हूँ। इस बार मकर संक्रांति को सब मिलकर मनाएंगे,” मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा।
“और इस बार आदित्य और प्रिया दीदी भी हमारे साथ होंगे,” राज ने खुशी से कहा।
“हाँ, और यह छोटू का पहला मकर संक्रांति है हमारे साथ,” टीना ने हँसते हुए कहा।
“चलो बच्चों, अब चलते हैं,” पापा ने कहा।
सबसे पहले सभी लोग मंदिर के सामने इकट्ठा हुए। वहाँ भगवान विष्णु और सूर्यदेव की पूजा की गई। मम्मी ने तिल, गुड़ और चावल चढ़ाए। फिर सभी को प्रसाद मिला।
“लो बच्चों, तिल और गुड़ के लड्डू खाओ। हैप्पी मकर संक्रांति,” मम्मी ने सभी को प्रसाद देते हुए कहा।
“थैंक यू मम्मी! आपको भी मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,” सभी बच्चों ने एक साथ कहा।
प्रसाद खाने के बाद सभी नीचे सोसाइटी के मैदान में आ गए। चारों तरफ रौनक थी। पतंगों की दुकानें लगी थीं। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ रही थीं। सभी बच्चे खुशी से झूम रहे थे।
“वाह! आज तो बहुत मजा आएगा। है ना छोटू?” राज ने अपने पालतू कुत्ते से कहा।
“भौं भौं!” छोटू ने खुशी से भौंकते हुए कहा।
तभी राज और टीना के दोस्त आदित्य, हरी, गुड्डी और बंटू आ गए। उनके साथ रोहित भी था।
“हैप्पी मकर संक्रांति राज! हैप्पी मकर संक्रांति आंटी-अंकल,” सभी ने एक साथ कहा।
“आप सभी को भी मकर संक्रांति की ढेर सारी शुभकामनाएं,” मम्मी-पापा ने कहा।
“चलो राज, हम सब पतंग उड़ाते हैं। देखो यहाँ कितनी सुंदर-सुंदर पतंगें हैं,” आदित्य ने कहा।
“अरे रुको! देखो मेरे पास तो सबसे बड़ी और सुंदर पतंग है। यह सबसे ऊपर उड़ेगी और तुम सबकी पतंगें काट देगी,” रोहित ने घमंड से कहा।
“ऐसा कुछ नहीं होगा रोहित। पतंग कैसी है, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि पतंग उड़ाने का हुनर कैसा है,” टीना ने आत्मविश्वास से कहा।
“बिल्कुल सही कहा। और सबको पता है कि पूरी सोसाइटी में मुझसे अच्छा कोई पतंग नहीं उड़ा सकता,” टीना ने मुस्कुराते हुए कहा।
टीना की बात सुनकर रोहित जोर से हँसने लगा।
“क्या? क्या कहा तुमने? एक छोटी बच्ची तुमसे बेहतर पतंग उड़ा सकती है,” रोहित ने मजाक उड़ाते हुए कहा।
“नहीं, ऐसा नहीं है। रोहित भैया सबसे अच्छा पतंग उड़ाते हैं,” बंटू ने रोहित का साथ दिया।
“ठीक है, तो फिर मुकाबला करते हैं। देखते हैं किसकी पतंग पहले कटती है,” टीना ने चुनौती दी।
“ठीक है, मंजूर है,” रोहित ने कहा।
“चलो दोस्तों, अपनी-अपनी पसंदीदा पतंगें ले आते हैं,” राज ने कहा।
छोटू भी सभी के पीछे-पीछे दौड़ने लगा। सभी ने अपनी पसंद की पतंगें खरीदीं।
“चलो, शुरू करते हैं मुकाबला,” टीना ने कहा।
लेकिन तभी उन्होंने देखा कि रोहित ने तो पहले से ही अपनी पतंग उड़ा दी थी।
“अरे रोहित! यह धोखा है। तुमने पहले से ही अपनी पतंग क्यों उड़ा दी?” टीना ने नाराज होकर कहा।
“इसमें कोई धोखा नहीं है टीना। अब बातें बंद करो और मुकाबला शुरू करो। वरना तुम्हारी पतंग जमीन पर ही रह जाएगी,” रोहित ने घमंड से कहा।
टीना भी जल्दी से अपनी पतंग उड़ाने लगी। राज पीछे से डोर पकड़े खड़ा था। टीना ने डोर छोड़ी और पतंग आसमान में ऊपर उठने लगी। देखते ही देखते उसकी पतंग बहुत ऊपर चली गई।
“वाह टीना! बहुत अच्छा,” सभी ने ताली बजाई।
“अब क्या रोहित? अब मैं अपनी पतंग को तुमसे भी ऊपर ले जाऊंगी,” टीना ने कहा।
“देखते हैं,” रोहित ने चुनौतीपूर्ण स्वर में कहा।
टीना ने और डोर छोड़ी। उसकी पतंग और ऊपर उड़ने लगी। आसमान में कई रंग-बिरंगी पतंगें उड़ रही थीं। सभी बच्चे खुशी से चिल्ला रहे थे।
“वाह! कुछ ही सेकंड में तुम सबसे ऊपर पहुँच गईं,” आदित्य ने कहा।
“लेकिन ज्यादा देर तक नहीं। अब मैं तुम्हारी पतंग काट दूंगा,” रोहित ने कहा।
रोहित ने अपनी पतंग और ऊपर उड़ाई। टीना भी अपनी पतंग को संभालते हुए ऊपर ले गई।
तभी प्रिया दीदी और आदित्य वहाँ आए।
“राज, यहाँ क्या हो रहा है?” प्रिया दीदी ने पूछा।
“दीदी, टीना और रोहित भैया में पतंग उड़ाने का मुकाबला चल रहा है,” राज ने बताया।
“अरे वाह! बहुत दिलचस्प है,” आदित्य ने कहा।
दोनों खड़े होकर मुकाबला देखने लगे। रोहित टीना की पतंग काटने की कोशिश कर रहा था। टीना अपनी पतंग बचाने में लगी थी। तभी अचानक टीना की नजर छोटू पर पड़ी। छोटू दुकानों की तरफ दौड़ा जा रहा था। वहाँ एक बड़ा लकड़ी का बोर्ड रखा था जो किसी भी वक्त गिर सकता था।
“छोटू! नहीं! वहाँ मत जाओ। वह बोर्ड तुम पर गिर जाएगा,” टीना जोर से चिल्लाई।
लेकिन छोटू ने नहीं सुना। वह एक तितली के पीछे भाग रहा था।
“अब मैं क्या करूँ?” टीना ने सोचा।
उसने अपनी पतंग की ओर देखा, फिर छोटू की ओर। और तुरंत अपनी पतंग की डोर छोड़कर छोटू की तरफ दौड़ी।
“अरे! तुम्हारी पतंग!” राज ने चिल्लाकर कहा।
लेकिन टीना ने किसी की नहीं सुनी। वह तेजी से छोटू के पास पहुँची। बोर्ड गिरने ही वाला था। टीना ने झपटकर छोटू को पकड़ा और वहाँ से हटा दिया। बोर्ड धड़ाम से गिर गया।
“तुम ठीक तो हो छोटू? तुम तो चोटिल हो ही जाते,” टीना ने राहत की सांस लेते हुए कहा।
सभी लोग दौड़कर टीना के पास आए। और इसी बीच रोहित ने टीना की पतंग की डोर काट दी।
“ओह नो! टीना, अगर तुम न आतीं तो छोटू को इस बोर्ड से चोट लग जाती। तुमने अपना मुकाबला छोड़कर छोटू की जान बचाई,” प्रिया दीदी ने कहा।
“हमने तुमसे कहा था ना छोटू कि दुकानों के पास मत जाना। देखो तुम्हारी वजह से टीना का मुकाबला हार गई,” राज ने कहा।
“कोई बात नहीं राज। फिर भी मैं ही विजेता हूँ। और अगर तुम छोटू को बचाने न भी जातीं तो भी मैं जीत जाता,” रोहित ने घमंड से कहा।
रोहित की बातें सुनकर सोसाइटी के सभी लोग हँसने लगे।
तभी पापा ने कहा, “बच्चों, टीना ने अपना मुकाबला छोड़कर छोटू की जान बचाई। यह हमें एक महत्वपूर्ण सीख देता है कि मकर संक्रांति सिर्फ पतंग उड़ाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे अच्छे मूल्यों को मनाने का त्योहार भी है। इस दिन हमें एक-दूसरे का ख्याल रखना चाहिए। तभी हम किसी भी त्योहार को खुशी से मना सकते हैं।”
“बिल्कुल सही कहा पापा ने। चलो सब मिलकर पतंग उड़ाते हैं,” टीना ने कहा।
“चलो रोहित भैया, इस बार हम तुम्हारी पतंग जरूर काटेंगे,” राज ने मुस्कुराते हुए कहा।
“ठीक है राज, देखते हैं,” रोहित ने कहा।
फिर सोसाइटी के सभी लोग एक साथ आसमान में पतंगें उड़ाने लगे। पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया। सभी ने मिलकर मकर संक्रांति का त्योहार बड़ी खुशी और उत्साह के साथ मनाया।
जीवन में प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण है, लेकिन दूसरों की भलाई और जान बचाना सबसे बड़ी जीत है। त्योहार हमें एक-दूसरे के साथ प्रेम, सहयोग और संवेदनशीलता के साथ रहना सिखाते हैं।

