Skip to content
Kahani Ki Duniya
Menu
  • Home
  • Stories
    • Bedtime Stories
    • Fairy Tales
    • Inspirational Stories
    • Magic & Fantasy
    • Moral Stories
  • Folk Tales
  • YouTube Channel
  • About
  • Contact
Menu
Untitled 1 17

गरीब Woodcutter का DIVINE Gift 🌟 | Barfili Raat Ka Chamatkar | Hindi Moral Story

Posted on January 24, 2026 by Kahani Ki Duniya

रात भर की मूसलाधार बारिश के बाद गांव पर कड़कड़ाती ठंड का कहर टूट पड़ा था। इसी ठंड में रमेश जंगल से लकड़ियों का भारी गट्ठर उठाए गांव की ओर लौट रहा था। आज अगर लकड़ी नहीं बिकी तो चूल्हा नहीं जलेगा।

गांव के बीच खड़े पुराने बरगद के नीचे ठंड से कांपते हुए शंकर काका बैठे थे। उनके घर का अलाव बुझ चुका था और पेंशन इतनी नहीं कि महंगी लकड़ियां खरीद सकें।

“ओ रमेश, जरा इधर तो आ बेटा।”

“राम राम काका। बस घर जा रहा था। बड़ी मुश्किल से ये लकड़ियां मिली हैं।”

“अरे, ये गट्ठर सब अपने घर ही ले जाएगा क्या? जरा दो-चार मोटी लकड़ियां दे दे बेटा। ठंड से हाथ-पांव सुन्न हो गए हैं।”

“काका, रात भर की बारिश में सब भीग गया था। जंगल के अंदर तक जाना पड़ा सूखी टहनियों के लिए।”

“समझ रहा हूं बेटा। बता क्या लेगा?”

“पूरा गट्ठर बीस रुपये का है काका।”

“बीस रुपये! अरे बेटा, इतनी तो मेरी पेंशन भी नहीं आती।”

रमेश ने सोचा और बोला, “चलिए आप पुराने आदमी हैं। बारह रुपये दे दीजिए।”

“ठीक है बेटा। तेरी मेहनत का मान रखता हूं।”

रमेश ने शंकर काका की कुटिया में लकड़ियां रख दीं और अपने घर की ओर चल पड़ा। घर पहुंचते ही उसकी पत्नी सुमित्रा ने राहत की सांस ली।

“आ गए आप! हे भगवान, मैं तो कब से राह देख रही थी।”

“बस सुमित्रा, बच गया समझो। रास्ते में ऐसी हवा थी कि लगा आज घर नहीं पहुंच पाऊंगा।”

अगली सुबह रमेश अपने दोस्त गोपाल और मनोज से मिला। “राम राम भाइयों।”

“राम राम रमेश। तुझे खबर भी है या नहीं? मौसम विभाग ने चेतावनी दी है। अगले दो-तीन दिनों में ऐसा भयंकर तूफान आने वाला है कि पुराने पेड़ भी टिक नहीं पाएंगे।”

“क्या कह रहे हो?”

“हां भाई। रेडियो पर भी खबर आई है। संभल कर रहना।”

रमेश तुरंत जंगल की ओर भागा। उसने जी-जान लगाकर सूखी लकड़ियां इकट्ठी कीं। लौटते समय उसे गांव का सबसे बड़ा कंजूस सेठ बद्रीनाथ मिल गया।

“अरे रमेश, ये लकड़ियां बेचने के लिए हैं?”

“जी सेठ जी। इस पूरे गट्ठर का दाम चालीस रुपये लगेगा।”

“चालीस रुपये! अरे रमेश, तू तो लूट मचा रहा है। पंद्रह रुपये दूंगा।”

“सेठ जी मजाक मत कीजिए। कम से कम पैंतीस रुपये।”

“बीस रुपये ले और यह गट्ठर मेरे घर रख दे।”

“सेठ जी, आपकी कंजूसी पूरे इलाके में मशहूर है। जब तूफान आएगा तब समझ आएगा।”

कुछ दिन बाद मौसम विभाग की भविष्यवाणी सच साबित हुई। ऐसी मूसलाधार बारिश शुरू हुई कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। रात होते-होते ठंड इतनी बढ़ गई कि बारिश की बूंदें जमने लगीं और सफेद बर्फ गिरने लगी।

अगली सुबह रमेश के दरवाजे पर दस्तक हुई। सेठ बद्रीनाथ खड़े थे।

“रमेश, रात भर बिजली नहीं थी और चूल्हा जलाने को सूखी लकड़ी नहीं। मुझे माफ कर दो। कल मैंने जो कहा था वो मेरी मूर्खता थी। ये लो तुम्हारे चालीस रुपये।”

“सेठ जी, मुझे ज्यादा पैसे नहीं चाहिए। जो हक का था वही लूंगा।” रमेश ने लकड़ियां दे दीं।

“आज समझ आया कि मेहनत की कोई कीमत नहीं होती। तेरा बहुत शुक्रिया रमेश।”

कुछ दिन बाद घर में लकड़ियां कम होने लगीं। रमेश फिर जंगल की ओर निकला। जंगल में हर तरफ नमी थी। बहुत भीतर जाने पर उसने देखा कि एक बूढ़ी अम्मा पेड़ के नीचे बैठी हैं।

“बेटा, क्या तुम्हारे पास कुछ खाने को होगा? मैं कई दिनों से भूखी हूं।”

रमेश का दिल पसीज गया। उसने बिना सोचे सुमित्रा की दी हुई पोटली बूढ़ी अम्मा के सामने रख दी।

“अम्मा, यह साधारण भोजन है पर मेरी पत्नी ने बड़े प्रेम से बनाया है।”

बूढ़ी अम्मा ने भोजन किया। फिर बोलीं, “बेटा, तू बड़ा दयालु है। खुद भूखा रहकर तूने एक बुढ़िया का पेट भरा। बता, तू क्या ढूंढ रहा है?”

“अम्मा, गांव में ठंड है। मैं सूखी लकड़ियां लेने आया था पर भारी बारिश ने सब भिगो दिया।”

“ले बेटा, यह जादुई वृक्ष के बीज हैं। इन्हें अपने घर के सामने लगा देना। इन पेड़ों की टहनियां हमेशा सूखी रहेंगी। तू जितना काटेगा, यह उतनी ही तेजी से बढ़ेंगे।”

रमेश की खुशी का ठिकाना न रहा। घर पहुंचकर उसने सुमित्रा को सारी बात बताई।

“क्या सच में एक पोटली खाने के बदले इतना बड़ा चमत्कार?”

“हां सुमित्रा, इंसानियत कभी खाली नहीं जाती।”

रात को दोनों ने मिलकर बीज आंगन में बो दिए। जैसे ही सुबह की किरण पड़ी, रमेश की आंख खुली।

“सुमित्रा! जल्दी बाहर आ। देख यह क्या हो गया?”

जहां कल रात खाली जमीन थी, वहां एक विशाल, हरा-भरा पेड़ खड़ा था।

“हे भगवान! यह तो कमाल है। इसकी टहनियां तो देखो, बिल्कुल सूखी हैं!”

“सुमित्रा, उस बूढ़ी अम्मा ने सच कहा था। देख, हमारा पेड़ सूखी लकड़ियों का खजाना बन गया।”

“सचमुच भगवान गरीबों की सुनता है। धन्यवाद अम्मा जी।”

रमेश ने उस पेड़ से सूखी लकड़ियां काटीं और गांव में बांटने निकल पड़ा। गांव के लोग रमेश की ईमानदारी और दरियादिली देखकर बहुत खुश हुए। उसने शंकर काका को मुफ्त में लकड़ियां दीं। गरीब परिवारों की मदद की।

सेठ बद्रीनाथ ने भी अपना स्वभाव बदल लिया। उन्होंने रमेश से माफी मांगी और गांव में एक सामुदायिक भंडार बनवाया जहां जरूरतमंदों को सस्ती लकड़ियां मिल सकें।

धीरे-धीरे पूरे गांव में खुशहाली छा गई। रमेश का जादुई पेड़ कभी सूखा नहीं। जितना काटो, उतना बढ़ता था। ठंड की उस भयानक रात में मिला वरदान पूरे गांव के लिए आशीर्वाद बन गया।

“दयालुता और परोपकार का फल हमेशा मीठा होता है। जो दूसरों की भलाई के लिए अपना त्याग करता है, भगवान उसे हजार गुना लौटाता है।”

Post Views: 7
Category: Bedtime Stories, Fairy Tales, Folk Tales, Inspirational Stories, Magic & Fantasy, Moral Stories, Stories

Post navigation

← सच्ची Friendship की कहानी 🦌🐘 | True Dosti Test | Hindi Moral Story

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • गरीब Woodcutter का DIVINE Gift 🌟 | Barfili Raat Ka Chamatkar | Hindi Moral Story
  • सच्ची Friendship की कहानी 🦌🐘 | True Dosti Test | Hindi Moral Story
  • (no title)
  • सच्ची मित्रता की परीक्षा 🦅 True Friendship Test | बाज़ की कहानी | Hawk Moral Story | Hindi Kahaniya
  • धोखा देकर हुआ Fail! | Widow’s Powerful Comeback | देवर को मिला करारा जवाब

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025

Categories

  • Bedtime Stories
  • Fairy Tales
  • Folk Tales
  • Inspirational Stories
  • Magic & Fantasy
  • Moral Stories
  • Stories
© 2026 Kahani Ki Duniya | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme