जयपुर के घने जंगल में राजू नाम का एक फुर्तीला हिरण रहता था। उसका सबसे प्रिय मित्र गजराज नाम का एक विशालकाय हाथी था। दोनों की मित्रता देखकर जंगल के सभी प्राणी आश्चर्यचकित हो जाते थे। राजू गजराज की पीठ पर बैठकर पूरे जंगल में घूमता था। गजराज जैसा शक्तिशाली मित्र होने के कारण राजू को किसी का भय नहीं था।
उसी जंगल में चालू नाम का एक धूर्त सियार भी रहता था। उनकी मित्रता देखकर उसे बहुत ईर्ष्या होती थी। वह सोचता था कि यदि राजू को गजराज से अलग कर दिया जाए, तो वह स्वयं गजराज का मित्र बन सकता है।
एक दिन जब राजू किसी काम से दूर गया था, चालू को अवसर मिल गया। वह गजराज के पास गया और बोला, “गजराज महाराज, आप इतने शक्तिशाली और बुद्धिमान हैं, फिर भी एक छोटे से हिरण को मित्र बनाए बैठे हैं। जंगल में सब आपका उपहास करते हैं। वह आपके किसी काम का नहीं है। संकट में भाग जाएगा। मुझे अपना मित्र बनाइए, मैं चतुर हूं और हर परिस्थिति में आपकी सहायता करूंगा।”
चालू की मीठी बातों में आकर गजराज का मन बदल गया। जब राजू वापस आया और उत्साह से बोला, “गजराज भाई, चलो आज पहाड़ी की सैर करें,” तो गजराज ने रूखेपन से कहा, “मैं तुम्हारा नौकर नहीं हूं। जाओ, मुझे अकेला छोड़ो।”
राजू को बहुत दुख हुआ। तभी चालू वहां आया और गजराज की पीठ पर बैठ गया। दोनों चले गए। राजू समझ गया कि चालू ने गजराज को भड़काया है, लेकिन उसे चिंता थी कि गजराज किसी संकट में फंस सकता है। इसलिए वह दूर से उनका पीछा करने लगा।
कुछ दिन बाद, गजराज चालू को लेकर उसी रास्ते से जा रहा था। शिकारियों ने वहां एक गड्ढा खोदकर पत्तों से ढक दिया था। चालाक चालू ने गड्ढा देखकर नीचे उतर दिया, लेकिन गजराज गड्ढे में गिर गया।
गजराज चिल्लाया, “चालू भाई, मेरी सहायता करो!” चालू बोला, “मैं अभी आता हूं,” और झाड़ियों में छिपकर बैठ गया।
राजू दौड़ता हुआ आया। अपने मित्र की हालत देखकर वह तुरंत जंगल में गया और अन्य हाथियों को बुला लाया। सभी हाथियों ने मिलकर गजराज को गड्ढे से बाहर निकाला।
गजराज शर्मिंदा होकर बोला, “राजू, तुम सच्चे मित्र हो। मुझसे भूल हुई। मुझे माफ कर दो।” राजू ने मुस्कुराते हुए कहा, “सच्चा मित्र वही है जो संकट में काम आए। मतलबी लोगों पर कभी विश्वास मत करना।” दोनों फिर से मित्र बन गए और चालू लज्जित होकर भाग गया।
काशीपुर के जंगल में एक तालाब था जहां चिंटू और मिंटू नाम का बत्तख का जोड़ा रहता था। एक दिन मिंटू ने दो अंडे दिए। दोनों बहुत खुश थे।
पास के बिल में नागिन नाम की एक सांप रहती थी। उसकी नजर अंडों पर पड़ी तो वह लालच में आ गई। शाम को जब चिंटू-मिंटू खाना खाने गए, नागिन ने दोनों अंडे खा लिए।
अगले दिन मिंटू ने फिर अंडे दिए। इस बार चिंटू ने घास से अंडों को ढक दिया, लेकिन नागिन फिर भी अंडे खा गई। चिंटू-मिंटू ने पेड़ के पीछे छिपकर देखा और सच्चाई जान गई।
चिंटू ने चिड़िया से मदद मांगी। चिड़िया ने कहा, “सांप तो मेरा पसंदीदा भोजन है। मैं तुम्हारी मदद करूंगी।”
अगले दिन मिंटू ने फिर अंडे दिए। जब नागिन अंडों की ओर बढ़ी, चिड़िया ने झपट्टा मारकर उसकी गर्दन पकड़ ली और उड़ गई। पहाड़ पर जाकर चिड़िया ने नागिन को छोड़ दिया।
कुछ दिन बाद अंडों से प्यारे बच्चे निकले। चिंटू-मिंटू बहुत खुश हुए और चिड़िया को धन्यवाद दिया।
सच्चा मित्र वही है जो मुसीबत में साथ दे। मतलबी और धोखेबाज लोगों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। बुद्धिमानी और एकता से हर समस्या का समाधान संभव है।

