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सच्ची मित्रता की परीक्षा 🦅 True Friendship Test | बाज़ की कहानी | Hawk Moral Story | Hindi Kahaniya

Posted on January 21, 2026 by Kahani Ki Duniya

घने जंगल में एक बाज़ रहता था जिसका नाम रुद्र था। रुद्र बहुत ही अकेला था और उसका कोई मित्र नहीं था। वह पूरे दिन अकेले ही आसमान में उड़ता रहता और शाम को अपने घोंसले में लौट आता। उसे अपने अकेलेपन का बहुत दुख रहता था।

एक सुबह जब रुद्र अपने पेड़ की डाली पर बैठा था, तभी उसने पास के पेड़ पर एक सुंदर मादा बाज़ को देखा। उसके पंख चमकीले भूरे रंग के थे और उसकी आँखें बहुत तेज़ थीं। रुद्र ने तुरंत उससे बात करने का फैसला किया। वह उड़कर उस पेड़ पर पहुंचा और उस मादा बाज़ के सामने प्रस्ताव रखा।

“हे सुंदरी! क्या तुम मुझसे विवाह करोगी?” रुद्र ने आशा भरी नज़रों से पूछा।

मादा बाज़ ने उसे देखा और मुस्कुराई। उसका नाम नीलिमा था। वह बोली, “रुद्र, तुम तो बिल्कुल अकेले हो। तुम्हारा कोई मित्र भी नहीं है। मैं तुमसे तभी विवाह करूंगी जब तुम कुछ अच्छे मित्र बना लोगे। मित्रता बहुत महत्वपूर्ण है जीवन में।”

यह सुनकर रुद्र उदास हो गया लेकिन उसने ठान ली कि वह मित्र अवश्य बनाएगा। वह उड़ान भरकर जंगल में मित्र खोजने निकल पड़ा।

पहले उसे एक मछलीमार पक्षी मिला जिसका नाम गरुड़ था। गरुड़ बहुत दयालु स्वभाव का था। रुद्र ने उससे मित्रता की और गरुड़ खुशी-खुशी मान गया।

फिर उसे झील के किनारे एक बुद्धिमान कछुआ मिला जिसका नाम कछुआराज था। कछुआराज बहुत समझदार था। रुद्र ने उससे भी मित्रता की और कछुआराज ने भी उसकी मित्रता स्वीकार कर ली।

अंत में उसे जंगल के राजा शेर केसरी मिले। केसरी बहुत शक्तिशाली और साहसी था। रुद्र ने डरते-डरते उससे भी मित्रता का प्रस्ताव रखा। केसरी को रुद्र की सच्चाई और साहस पसंद आया और उसने भी उसकी मित्रता स्वीकार कर ली।

तीन नए मित्रों के साथ रुद्र खुशी-खुशी नीलिमा के पास लौटा। “देखो नीलिमा! मैंने तीन अच्छे मित्र बना लिए हैं। अब क्या तुम मुझसे विवाह करोगी?”

नीलिमा बहुत खुश हुई। “हां रुद्र, अब मैं तुमसे विवाह करूंगी।”

उनका विवाह बड़ी धूमधाम से हुआ। गरुड़, कछुआराज और केसरी सभी उनके विवाह में शामिल हुए। महीने बीतते गए और रुद्र और नीलिमा के घोंसले में तीन सुंदर बच्चे हुए। उनका जीवन बहुत खुशहाल था।

एक रात, दो शिकारी जंगल में आए। वे भटकते हुए उसी पेड़ के नीचे आकर रुके जिस पर रुद्र और नीलिमा का घोंसला था। रात बहुत ठंडी थी इसलिए शिकारियों ने पेड़ के नीचे आग जलाई और सोने लगे।

आग से निकलता धुआं ऊपर पेड़ के घोंसले तक पहुंच गया। बच्चे खांसने लगे। नीलिमा घबरा गई। “रुद्र, यह धुआं हमारे बच्चों को परेशान कर रहा है। कुछ करो!”

रुद्र तुरंत उड़कर अपने मित्र गरुड़ के पास गया। उसने सारी बात बताई। गरुड़ ने कहा, “चिंता मत करो मित्र, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।”

गरुड़ झील में गया और अपने पंखों को भिगो लिया। फिर वह उड़कर आग के ऊपर आया और अपने गीले पंखों को हिलाया। पानी की बूंदें आग पर गिरीं और आग बुझ गई।

शिकारियों को ठंड लगने लगी। एक शिकारी बोला, “आग बुझ गई। चलो फिर से जलाते हैं।” उन्होंने फिर से आग जला ली।

तभी दूसरे शिकारी की नज़र पेड़ के ऊपर घोंसले पर पड़ी। “देखो! ऊपर बाज़ का घोंसला है। चलो उन पक्षियों को पकड़ लेते हैं। बाज़ारों में बेचकर अच्छे पैसे मिलेंगे।”

एक शिकारी पेड़ पर चढ़ने लगा। नीलिमा डर गई। “रुद्र! शिकारी आ रहा है। हमारे बच्चे खतरे में हैं!”

रुद्र तुरंत अपने मित्र कछुआराज के पास गया। उसने सारी स्थिति बताई। कछुआराज बोला, “मैं कुछ करता हूं।”

कछुआराज धीरे-धीरे चलकर शिकारियों के पास आया ताकि वे उसे देख लें। एक शिकारी चिल्लाया, “अरे देखो! कितना बड़ा कछुआ है! यह तो उन पक्षियों से भी ज्यादा कीमती है। चलो इसे पकड़ लेते हैं।”

दोनों शिकारी पेड़ से नीचे उतरे। उन्होंने रस्सी निकाली और रस्सी का एक सिरा कछुआराज से बांधा और दूसरा सिरा अपनी कमर से। लेकिन कछुआराज बहुत ताकतवर था। वह रस्सी खींचता हुआ सीधा झील की ओर चल पड़ा। शिकारी भी घिसटते हुए उसके साथ चले गए।

कछुआराज सीधा पानी में घुस गया। शिकारियों को डूबने का डर लगा और उन्होंने जल्दी से रस्सी खोल दी। वे किसी तरह पानी से बाहर निकले। लेकिन तब तक रुद्र ने अपने तीसरे मित्र केसरी को बुला लिया था।

केसरी जोर से दहाड़ा और शिकारियों के सामने कूद गया। शिकारी घबरा गए। “शेर! भागो वरना मार डालेगा!” दोनों शिकारी वहां से जान बचाकर भाग गए और फिर कभी उस जंगल में नहीं लौटे।

रुद्र ने अपने तीनों मित्रों को धन्यवाद दिया। गरुड़, कछुआराज और केसरी ने मिलकर उनके बच्चों की रक्षा की थी।

रुद्र को अब समझ आ गया था कि नीलिमा ने विवाह से पहले मित्र बनाने की शर्त क्यों रखी थी। सच्चे मित्र ही मुसीबत के समय काम आते हैं। मित्रता जीवन का सबसे अनमोल रत्न है।

उस दिन के बाद से रुद्र, नीलिमा और उनके बच्चे सुखपूर्वक रहने लगे। चारों मित्र हमेशा एक-दूसरे की मदद के लिए तैयार रहते थे। सच्चे मित्र मुसीबत में ही पहचाने जाते हैं। मित्रता जीवन का सबसे बड़ा धन है।

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Category: Bedtime Stories, Fairy Tales, Folk Tales, Inspirational Stories, Magic & Fantasy, Moral Stories

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