Skip to content
Kahani Ki Duniya
Menu
  • Home
  • Stories
    • Bedtime Stories
    • Fairy Tales
    • Inspirational Stories
    • Magic & Fantasy
    • Moral Stories
  • Folk Tales
  • YouTube Channel
  • About
  • Contact
Menu
Untitled 1 12

झूठ बोलने के परिणाम | प्रेरक बाल कहानी :True Friend’s Identity | Moral Story for Kids

Posted on January 14, 2026 by Kahani Ki Duniya

बहुत समय पहले की बात है, एक शहर में आर्यन नाम का सात साल का लड़का रहता था। वह अपने माता-पिता के साथ रहता था। आर्यन खेलकूद और पढ़ाई दोनों में बहुत अच्छा था और इसी कारण उसके माता-पिता और शिक्षक उससे बहुत खुश रहते थे।

आर्यन की कक्षा में रोहन नाम का एक लड़का था। रोहन और आर्यन बहुत अच्छे दोस्त थे। जहाँ आर्यन बहुत सीधा और भोला था, वहीं रोहन बहुत शरारती था। वह हमेशा अपने दिमाग में कोई न कोई शरारत की योजना बनाता रहता था।

एक दिन शिक्षक ने कक्षा में उपस्थित विद्यार्थियों से कहा, “बच्चों, कल मैं अंग्रेजी की परीक्षा लूँगा, इसलिए सभी कल की परीक्षा के लिए तैयार होकर आएं। और याद रहे, जो भी कम अंक लाएगा, मैं उसे प्रधानाचार्य सर के पास ले जाऊँगा।”

यह सुनकर आर्यन डर गया। “प्रधानाचार्य सर बहुत सख्त हैं, इसलिए कल मैं परीक्षा के लिए तैयार होकर आऊँगा।”

स्कूल खत्म होने के बाद आर्यन सीधे घर वापस चला गया। खाना खाने के बाद उसने पढ़ाई शुरू कर दी। जब वह पढ़ाई कर रहा था, शाम हो गई। तभी अचानक रोहन आर्यन के कमरे में आया।

“अरे रोहन! तुम मेरे घर कब आए?”

“मैं तुम्हें पार्क में खेलने के लिए लेने आया हूँ। चलो पार्क चलते हैं और खेलते हैं।”

“लेकिन आज मैं पार्क नहीं जा सकता। मुझे अभी दो अध्याय और पढ़ने हैं। तुम भी घर जाओ और कल की परीक्षा की तैयारी करो।”

“तुम्हें अच्छी तरह पता है कि मैं कितनी भी कोशिश कर लूँ, मुझे ये अध्याय याद नहीं होते।”

“ठीक है, तो तुम पार्क जाओ और खेलो। परीक्षा में तुम मुझसे नकल करके पास हो जाओगे।”

अगले दिन उन्होंने वैसा ही किया जैसा उन्होंने तय किया था। जब परीक्षा शुरू हुई, तो पहले आर्यन ने जल्दी-जल्दी अपना पेपर पूरा किया। फिर उसने रोहन को, जो उसके पास बैठा था, अपनी उत्तर पुस्तिका से नकल करने दी और धोखाधड़ी में उसकी मदद की।

रोहन को दस में से दस अंक मिलते देख शिक्षक ने सोचा, “रोहन पूरा दिन शरारतें करता रहता है, फिर उसे दस में से दस अंक कैसे मिल सकते हैं?”

यह सोचकर शिक्षक ने विद्यार्थियों से कहा, “बच्चों, कल मैं तुम्हारी गणित की परीक्षा लूँगा।”

यह सुनकर आर्यन ने रोहन से कहा, “रोहन, चिंता मत करो। मैं कल की परीक्षा में भी तुम्हारी मदद करूँगा।”

अगले दिन हमेशा की तरह वे दोनों परीक्षा देने के लिए साथ बैठे। लेकिन तभी अचानक शिक्षक ने कहा, “आर्यन, तुम यहाँ सोना के साथ बैठो।”

“लेकिन शिक्षक जी, मैं हमेशा यहाँ रोहन के साथ बैठता हूँ।”

“लेकिन आज तुम यहाँ बैठोगे।”

शिक्षक के ऐसा कहने के बाद आर्यन आकर सोना के बगल में बैठ गया और रोहन ने अकेले बैठकर परीक्षा दी।

आर्यन परेशान था, इसलिए उसने जल्दी से अपना पेपर खत्म कर दिया। लेकिन रोहन पूरे समय यही सोचता रहा, “मुझे एक भी सवाल का जवाब नहीं आता। अब क्या करूँ?”

रोहन को फेल होते देख आर्यन और रोहन दोनों रोने लगे।

“तुमने कहा था कि तुम मुझे अपनी उत्तर पुस्तिका से नकल करने दोगे।”

“माफ करना रोहन, लेकिन शिक्षक ने मेरी सीट बदल दी।”

उन्हें रोता देख शिक्षक पास आए और समझाते हुए बोले, “रोहन, मुझे पता था कि तुम हमेशा आर्यन की उत्तर पुस्तिका से नकल करके परीक्षा पास करते हो, इसलिए जानबूझकर मैंने तुम दोनों की बैठने की व्यवस्था बदल दी।”

“और आर्यन, रोहन से भी ज्यादा तुम्हें यह सीखने की जरूरत है कि अच्छे दोस्त हमेशा अपने दोस्तों को गलती करने से रोकते हैं। वे उनकी गलतियों को छुपाते नहीं हैं।”

तो बच्चों, हमने इस कहानी से क्या सीखा? हमें कभी भी अपने दोस्तों की गलतियों को नहीं छुपाना चाहिए, बल्कि एक अच्छे दोस्त की तरह हमें हमेशा अपने दोस्तों को गलतियाँ करने से रोकना चाहिए।

बहुत समय पहले एक शहर में एक परिवार रहता था। उस परिवार में सात साल की अनन्या और आठ साल का अंश भी थे।

अनन्या और अंश अक्सर झूठ बोलते थे। वे हर विषय पर झूठ बोलते थे।

“लो, तुम दोनों बच्चों यह क्या कर रहे हो? यह कैसा शोर है?”

“लगता है माँ और पापा आ रहे हैं। अब हम क्या करेंगे?”

“हम वही करेंगे जो हम हमेशा करते हैं।”

“ये सारे कपड़े इतने बिखरे क्यों हैं? तुमने अपने कमरे का क्या हाल बना दिया है?”

“हमने कुछ नहीं किया।”

“हाँ माँ, कुछ बंदर खिड़की से आए थे, इसलिए उन्होंने यह सब किया है।”

इस तरह वे हर विषय पर झूठ बोलते थे। उनके माता-पिता इस वजह से बहुत परेशान थे।

एक दिन उनके माता-पिता कुछ काम से बाहर गए और बच्चे घर में अकेले थे। वे अपने कमरे में स्कूल का होमवर्क कर रहे थे।

अचानक उन्हें लिविंग रूम से एक आवाज सुनाई दी, जैसे कुछ गिर गया हो।

“भैया, लिविंग रूम से कैसी आवाज आ रही है?”

“लगता है घर में चोर घुस गए हैं।”

“चोर! अब वे क्या करेंगे? माँ-पापा भी घर पर नहीं हैं।”

“धीरे बोलो, चोर हमारी आवाज सुन लेंगे तो हमें भी अपने साथ ले जाएंगे।”

“भैया, मैं बहुत डर गई हूँ। मैं चोरों के साथ नहीं जाना चाहती।”

“तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं पापा को फोन कर रहा हूँ।”

यह कहकर अंश ने अपने पिता को फोन किया, लेकिन उनका फोन बंद था।

“लगता है पापा का फोन बंद है। अब हम क्या करें?”

“लगता है अब हमें कुछ करना होगा। लेकिन क्या? मुझे सोचने दो।”

यह कहकर वह सोचने लगा। कुछ देर सोचने के बाद उसने कहा, “अब हम दोनों को कुछ ऐसा करना होगा कि वे यहाँ से चले जाएं।”

“लेकिन कैसे भैया?”

“अगर हम उन्हें यह विश्वास दिला दें कि घर में बड़े लोग भी हैं, तो वे जरूर चले जाएंगे।”

“हाँ, यह अच्छा विचार है। मेरे साथ आओ। अब जो मैं करूँ, तुम भी वही करना।”

“हाँ, करूँगी।”

वे दोनों अपने कमरे से बाहर निकले और लिविंग रूम में जाकर देखा कि सब कुछ बिखरा हुआ था। काले मास्क पहने दो चोर उनके दादाजी के कमरे में घुसने वाले थे।

यह देखकर अंश तुरंत अपने लिविंग रूम में आया, अपने कमरे की ओर मुंह करके जोर से बोलने लगा, “अनन्या, तुम ऐसे नहीं सुधरोगी। रुको, मैं अभी पापा को फोन करता हूँ।”

उनके पिता का नाम सुनकर चोर डर गए और ऊपर की ओर भागने लगे।

अनन्या भी कमरे से बाहर आई। उसने चोरों को ऊपर की ओर भागते देखा। वह भी चिल्लाई और बोली, “तुम सोचते हो मेरी शिकायत करके खुश रहोगे? रुको, मैं अभी दादाजी को ऊपर से बुलाती हूँ।”

दादाजी का नाम सुनकर भी चोर डर गए और रसोई की ओर भागने लगे।

एक बार फिर अंश चिल्लाया और बोला, “दादाजी क्या करेंगे? रुको, मैं अभी रसोई से दादी को बुलाता हूँ। वह तुम्हें सबक सिखाएंगी।”

अब चोर और भी डर गए और सोफे के पीछे छिप गए।

“तुमने कहा था कि इस घर में बच्चों के अलावा कोई नहीं है, लेकिन सब लोग यहाँ हैं। मैंने खुद सबको घर से बाहर जाते देखा था। पता नहीं वे कब वापस आए।”

“अब क्या करें? बेहतर है यहाँ से भाग चलें।”

यह कहकर वे दोनों घर के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर भागे।

तब अनन्या चिल्लाई और बोली, “रुको, मैं अभी पुलिस अंकल को बुलाती हूँ। वे बाहर ही खड़े हैं। वे तुम्हें जेल में बंद कर देंगे।”

“हे भगवान! पुलिस अंकल बाहर खड़े हैं!”

“जितना जल्दी हो सके हमें खिड़की से कूदना होगा।”

और दोनों चोर खिड़की से कूदकर भाग गए।

उन्हें इस तरह भागता देख अंश और अनन्या बहुत खुश हुए। “हमने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया।”

फिर उनके माता-पिता भी वापस आ गए। घर में सब कुछ बिखरा देखकर उनकी माँ ने पूछा, “यह सारा सामान किसने बिखेरा है?”

बच्चों ने अपनी माँ को सब कुछ बता दिया।

“माँ, हमने यह किया है।”

“हाँ माँ, दो चोर हमारे घर में महंगी चीजें चुराने आए थे। उन्होंने सब कुछ बिखेर दिया।”

“अच्छा, लेकिन मुझे यहाँ कोई चोर नहीं दिख रहा। अब वे कहाँ हैं?”

“हमने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया।”

यह सुनकर माता-पिता ने सोचा कि इस बार भी बच्चे झूठ बोल रहे हैं, जैसा कि वे हमेशा करते हैं।

उन्होंने उन्हें डाँटा और कहा, “हम जानते हैं कि तुम दोनों हमेशा की तरह झूठ बोल रहे हो। तुम दोनों ने घर को बिखेरा है और हमेशा की तरह खुद को बचाने के लिए इस बार भी तुम हमें एक झूठी कहानी सुना रहे हो।”

बच्चों ने अपने माता-पिता को बहुत समझाया, “नहीं, हम झूठ नहीं बोल रहे। उन चोरों ने यह सब किया है। हम सच बोल रहे हैं।”

लेकिन उनके माता-पिता ने उनकी बात नहीं सुनी। “सजा से बचने के लिए तुम हमसे झूठ बोल रहे हो, लेकिन इस बार तुम्हें सजा मिलेगी। और तुम्हारी सजा यह है कि अब तुम सारी चीजें ठीक से रखोगे।”

यह कहकर उनके माता-पिता अपने कमरे में चले गए।

अब अनन्या और अंश समझ गए कि झूठ बोलने के कितने बुरे परिणाम होते हैं। उनकी आँखों में आँसू आ गए और रोते हुए उन्होंने कहा, “हमारी झूठ बोलने की आदत के कारण माँ-पापा हम पर विश्वास नहीं कर रहे। शायद झूठ बोलने पर यही होता है।”

और दोनों ने फैसला किया कि आज से हम कभी झूठ नहीं बोलेंगे।

इस तरह अनन्या और अंश ने अपना सबक सीख लिया और उसके बाद उन्होंने कभी झूठ नहीं बोला।

तो बच्चों, इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि बार-बार झूठ बोलने के बाद अगर हम सच भी बोलें तो कोई हम पर विश्वास नहीं करेगा

Post Views: 22
Category: Bedtime Stories, Fairy Tales, Inspirational Stories, Magic & Fantasy, Moral Stories, Stories

Post navigation

← पतंग उत्सव की सीख | मकर संक्रांति की प्रेरक कहानी | Makar Sankranti Story
धोखा देकर हुआ Fail! | Widow’s Powerful Comeback | देवर को मिला करारा जवाब →

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • गरीब Woodcutter का DIVINE Gift 🌟 | Barfili Raat Ka Chamatkar | Hindi Moral Story
  • सच्ची Friendship की कहानी 🦌🐘 | True Dosti Test | Hindi Moral Story
  • (no title)
  • सच्ची मित्रता की परीक्षा 🦅 True Friendship Test | बाज़ की कहानी | Hawk Moral Story | Hindi Kahaniya
  • धोखा देकर हुआ Fail! | Widow’s Powerful Comeback | देवर को मिला करारा जवाब

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025

Categories

  • Bedtime Stories
  • Fairy Tales
  • Folk Tales
  • Inspirational Stories
  • Magic & Fantasy
  • Moral Stories
  • Stories
© 2026 Kahani Ki Duniya | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme